चाचा-भतीजी का रिश्ता शर्मसार, युवक ने नाबालिग को बनाया हवस का शिकार, POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज
नाबालिग के गर्भवती होने पर 7 महीने बाद खुला मामला
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना जिले के मोकामा थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म का मामला करीब सात महीने बाद सामने आया है। मोकामा में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप पड़ोस में रहने वाले 55 वर्षीय व्यक्ति पर लगाया गया है, जिसे परिवार की ओर से बच्ची का मुंहबोला चाचा बताया गया है। घटना का खुलासा तब हुआ, जब लगातार तबीयत खराब रहने के बाद नाबालिग को अस्पताल ले जाया गया और जांच में उसके गर्भवती होने की जानकारी सामने आई।
नाबालिग की तबीयत बिगड़ने पर बढ़ी चिंता
बताया गया कि घटना करीब सात महीने पहले की है। इस दौरान नाबालिग को लगातार पेट में दर्द की शिकायत रहने लगी। धीरे-धीरे उसका पेट भी फूलने लगा। परिवार के लोगों ने शुरुआत में इसे किसी बीमारी के बजाय अंधविश्वास से जोड़ दिया।
परिजनों के अनुसार, गांव में यह बात फैल गई कि पड़ोस में एक गर्भवती महिला की मौत के बाद उसकी आत्मा नाबालिग के शरीर में आ गई है। इसके बाद परिवार ने चिकित्सकीय जांच कराने के बजाय झाड़-फूंक और ओझा-गुणी के जरिए उसका इलाज कराने की कोशिश की।
अंधविश्वास में बीत गए कई महीने
नाबालिग की हालत में सुधार नहीं होने के बावजूद परिवार काफी समय तक अंधविश्वास के चक्कर में रहा। पेट का आकार लगातार बढ़ता गया और परेशानी भी बनी रही। परिवार के लोग इसे किसी सामान्य बीमारी के रूप में भी नहीं समझ पा रहे थे।

लगातार बिगड़ती स्थिति के बाद आखिरकार परिजन नाबालिग को इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने उसकी जांच की। जांच के बाद डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि नाबालिग गर्भवती है।
अस्पताल में जांच के बाद सामने आई सच्चाई
डॉक्टरों की बात सुनकर परिवार के लोग हैरान रह गए। इसके बाद उन्होंने नाबालिग से घटना के संबंध में जानकारी लेने की कोशिश की। परिजनों के सामने मामला धीरे-धीरे स्पष्ट हुआ और उन्होंने पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति पर दुष्कर्म का आरोप लगाया।
परिवार का आरोप है कि आरोपी नाबालिग का मुंहबोला चाचा था और वह परिवार के परिचितों में शामिल था। घटना की जानकारी सामने आने के बाद परिजन मोकामा थाना पहुंचे और पुलिस को लिखित शिकायत दी।
नाबालिग मामले में POCSO एक्ट के तहत केस
मोकामा थाना पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की। थाना प्रभारी कुणाल कुमार ने बताया कि मामला संवेदनशील है और पॉक्सो एक्ट से संबंधित है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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पुलिस पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। मामले में लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है।
आरोपी से जुड़े पहलुओं की भी जांच
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और आरोपी की नाबालिग से किस तरह की पहचान थी। जांच के दौरान पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों और पीड़िता के बयान को आधार बनाकर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है।

साथ ही पुलिस यह भी देख रही है कि घटना के बाद मामला इतने लंबे समय तक सामने क्यों नहीं आया। अंधविश्वास के कारण इलाज में हुई देरी को भी पूरे घटनाक्रम के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
नाबालिग की सुरक्षा और जांच पर पुलिस का जोर
मामला सामने आने के बाद पुलिस की प्राथमिकता पीड़िता की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच करना है। पुलिस के अनुसार, संवेदनशील मामले में सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।
घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास के कारण स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं की अनदेखी के सवाल खड़े किए हैं। यदि नाबालिग को समय पर चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाया जाता, तो मामले का पता पहले भी चल सकता था। फिलहाल मोकामा थाना पुलिस मामले की जांच में जुटी है। पीड़िता के बयान और मेडिकल समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
