पटना साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश, 3 गिरफ्तार, दो पासबुक व 81,400 नगद बरामद
पटना में डिजिटल अरेस्ट गिरोह का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार
निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। पटना साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क का साइबर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई करते हुए गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक चारपहिया वाहन, पांच एटीएम कार्ड, दो पासबुक, तीन चेकबुक, एक मुहर और 81,400 रुपये नकद बरामद किए गए है
पटना पुलिस की तकनीकी जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क से जुड़े हुए थे। यह नेटवर्क बिहार के अलावा दूसरे राज्यों में भी लोगों को निशाना बनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी करता था।
पटना में साइबर गिरोह पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
पटना की साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गौरव कुमार (28), आदर्श कुमार (28) और अमन राज (26) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, तीनों पटना जिले के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के पास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंकिंग दस्तावेजों से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। अब इन उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है, जिससे गिरोह के काम करने के तरीके और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा सके।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का आरोप
पटना पुलिस के मुताबिक, गिरोह डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी जैसे तरीकों से लोगों को अपना निशाना बनाता था। ऐसे मामलों में साइबर अपराधी पीड़ितों से फोन या ऑनलाइन माध्यम से संपर्क कर उन्हें कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं और फिर पैसे ट्रांसफर कराने का प्रयास करते हैं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका नेटवर्क में किस स्तर पर थी और उन्होंने कितने लोगों को अपना निशाना बनाया।
पटना से दूसरे राज्यों तक फैला नेटवर्क
तकनीकी जांच के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल यानी NCRP पर आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी से संबंधित शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस का कहना है कि शिकायतों में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी से जुड़े मामलों का उल्लेख मिला है। हालांकि, इन शिकायतों में गिरफ्तार आरोपियों की वास्तविक भूमिका और कथित ठगी की रकम की पुष्टि के लिए आगे जांच की जा रही है।
इससे पुलिस को आशंका है कि यह केवल स्थानीय स्तर पर सक्रिय गिरोह नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क दूसरे राज्यों तक फैला हुआ हो सकता है।
बरामद सामान से खुलेंगे कई राज
गिरफ्तार आरोपियों के पास से मिले छह मोबाइल फोन और दो लैपटॉप पुलिस जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से संदिग्ध संपर्क, लेन-देन और साइबर गतिविधियों से संबंधित जानकारी मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा पांच एटीएम कार्ड, दो पासबुक और तीन चेकबुक भी बरामद की गई हैं। पुलिस इन बैंकिंग दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। एक मुहर और 81,400 रुपये नकद भी जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसियां बरामद सामान को साइबर ठगी से जुड़े मामलों के साथ मिलाकर देख रही हैं।
2 सितंबर को दर्ज हुआ मामला
पुलिस के अनुसार, इस मामले में साइबर थाना में 2 सितंबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C) और 66(D) के तहत कार्रवाई की गई है।
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कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब पुलिस आगे की जांच के आधार पर गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
बैंकिंग दस्तावेजों की भी हो रही जांच
पुलिस को आशंका है कि बरामद एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक का इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय लेन-देन में किया गया हो सकता है। हालांकि, इनके इस्तेमाल की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
पुलिस बैंक खातों और संबंधित लेन-देन का मिलान कर रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित ठगी की रकम कहां से आई और किन खातों के माध्यम से आगे भेजी गई।
NCRP शिकायतों से जोड़ी जा रही कड़ियां
जांच में NCRP पर दर्ज शिकायतों को भी महत्वपूर्ण सुराग माना जा रहा है। पुलिस इन शिकायतों और आरोपियों से बरामद डिजिटल उपकरणों से मिलने वाली जानकारी का मिलान कर रही है।

यदि दोनों के बीच संबंध स्थापित होते हैं तो गिरोह की गतिविधियों और उसके नेटवर्क का दायरा और स्पष्ट हो सकता है। पुलिस दूसरे राज्यों में दर्ज मामलों से भी संभावित कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह में कौन-कौन लोग शामिल हैं और उनकी अलग-अलग भूमिकाएं क्या थीं।
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पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों तक पहुंच बनाई जा सकेगी।
डिजिटल ठगी के खिलाफ बढ़ी निगरानी
पटना में सामने आया यह मामला साइबर अपराध के बदलते तरीकों को लेकर भी महत्वपूर्ण है। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामले भी जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बने हुए हैं।
पुलिस अब डिजिटल उपकरणों, बैंकिंग रिकॉर्ड और NCRP पर दर्ज शिकायतों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। बरामद सामान से मिलने वाले डिजिटल साक्ष्य आगे की कार्रवाई में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों तथा इससे जुड़े दूसरे मामलों की जानकारी जुटाने में लगी है। जांच आगे बढ़ने के साथ कथित साइबर नेटवर्क की और कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
