पीएमसीएच में बनेगा अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर, 15 मिनट के अंदर मिलेगा उपचार
पीएमसीएच में लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर, गंभीर मरीजों को तुरंत इलाज
निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। पीएमसीएच ट्रॉमा सेंटर को लेकर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में जल्द ही लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर शुरू करने की योजना है। इसके लिए हड्डी रोग विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। योजना के अनुसार सड़क हादसे या अन्य गंभीर दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को इलाज के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अस्पताल पहुंचते ही मरीज की स्थिति का आकलन कर 15 मिनट के भीतर इलाज शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर में पीएमसीएच में पहले से मौजूद कई विशेषज्ञ विभागों को एकीकृत व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इससे गंभीर मरीजों के लिए जांच, ऑपरेशन, आईसीयू और ब्लड बैंक जैसी आवश्यक सेवाएं तेजी से उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।
पीएमसीएच में एक जगह मिलेगी 6 विशेषज्ञ सेवाएं
लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर के लिए पीएमसीएच में न्यूरो सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी, एनेस्थेसिया, रेडियोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी जैसी विशेषज्ञ सेवाओं को एक साथ जोड़ने की योजना है।
सड़क दुर्घटना में कई बार मरीज के सिर, हड्डी और शरीर के दूसरे हिस्सों में एक साथ गंभीर चोट लगती है। ऐसे मामलों में अलग-अलग विभागों के बीच तत्काल समन्वय जरूरी होता है। मौजूदा व्यवस्था में मरीज को एक विभाग से दूसरे विभाग तक ले जाने और विशेषज्ञों की राय लेने में समय लग सकता है।
नए सिस्टम का मकसद इसी देरी को कम करना है। मरीज के अस्पताल पहुंचते ही संबंधित विशेषज्ञों की टीम सक्रिय होगी और उसकी स्थिति के मुताबिक उपचार शुरू किया जाएगा।
15 मिनट में इलाज शुरू करने का लक्ष्य
प्रस्तावित व्यवस्था में गंभीर मरीजों के लिए समय को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। अस्पताल प्रशासन का लक्ष्य है कि मरीज के पहुंचने के बाद शुरुआती 15 मिनट में उपचार की प्रक्रिया शुरू हो जाए।
इसके लिए ट्रॉमा सेंटर को जांच और उपचार की सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। जरूरत पड़ने पर तत्काल ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, ब्लड बैंक और रेडियोलॉजी जांच की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

विशेषज्ञों के मुताबिक गंभीर हादसे के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज शुरू होने में होने वाली देरी मरीज की स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
पीएमसीएच में रोज पहुंचते हैं 15 से 20 गंभीर मरीज
पीएमसीएच में रोजाना करीब 15 से 20 गंभीर ट्रॉमा मरीज पहुंचते हैं। फिलहाल इन मरीजों को ट्रायज सिस्टम के माध्यम से उनकी स्थिति की गंभीरता के आधार पर उपचार दिया जाता है।
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लेकिन ऐसे मरीज जिनके शरीर के कई हिस्सों में चोट होती है, उनके इलाज के लिए एक साथ कई विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है। सिर की गंभीर चोट के साथ फ्रैक्चर या शरीर के दूसरे अंगों में चोट होने पर न्यूरो सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और जनरल सर्जरी समेत कई विभागों को मिलकर काम करना पड़ता है।
प्रस्तावित लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर में यही समन्वय एकीकृत तरीके से करने की योजना है। इससे मरीज को आवश्यक विशेषज्ञ सेवा उपलब्ध कराने में लगने वाला समय कम किया जा सकेगा।
गंभीर सिर और हड्डी की चोट वाले मरीजों को फायदा
नए ट्रॉमा सेंटर का सबसे ज्यादा फायदा गंभीर सड़क दुर्घटना के मरीजों को मिलने की उम्मीद है। खासकर सिर में चोट, हड्डियों के गंभीर फ्रैक्चर और एक साथ कई अंगों में चोट लगने वाले मरीजों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है।
समय पर विशेषज्ञ उपचार मिलने से मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर करने की जरूरत भी कम हो सकती है। फिलहाल गंभीर मामलों में अलग-अलग विशेषज्ञों की उपलब्धता और उपचार सुविधाओं के बीच समन्वय चुनौती बन सकता है। ट्रॉमा सेंटर में सभी संबंधित विभागों को एक साथ जोड़ने से इस चुनौती को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
पीएमसीएच में पहले से मौजूद हैं जरूरी विभाग
पीएमसीएच में ट्रॉमा मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक कई विशेषज्ञ विभाग पहले से संचालित हैं। न्यूरो सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी, एनेस्थेसिया, रेडियोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी इनमें प्रमुख हैं।

प्रस्ताव के तहत इन विभागों को ट्रॉमा सेंटर की एकीकृत व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। इसका उद्देश्य मरीज के अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों की उपलब्धता, जांच और ऑपरेशन की तैयारी में अनावश्यक समय को कम करना है।
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हालांकि, ट्रॉमा सेंटर को प्रभावी बनाने के लिए केवल विभागों को जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा। 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टर, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की उपलब्धता भी जरूरी होगी।
बिहार में सड़क हादसे बड़ी चुनौती
बिहार में सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है। उपलब्ध NCRB आंकड़ों के मुताबिक राज्य में एक वर्ष में सड़क दुर्घटनाओं में 8,873 लोगों की मौत हुई और 6,539 लोग घायल हुए।
विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर हादसे के बाद शुरुआती एक घंटे में मिलने वाली चिकित्सा सहायता बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसे ट्रॉमा केयर में गोल्डन ऑवर के तौर पर देखा जाता है।
ऐसे में अस्पताल तक पहुंचने के बाद मरीज को जल्द से जल्द विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। पीएमसीएच में लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर की योजना इसी आवश्यकता को देखते हुए अहम मानी जा रही है।
राज्य में 11 नए ट्रॉमा सेंटर की योजना
राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 11 नए ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई थी। इनमें गोपालगंज, मधुबनी, कैमूर, नालंदा, पूर्वी चंपारण, अररिया, वैशाली, बांका, नवादा, खगड़िया और गया शामिल थे।
इससे पहले पीएमसीएच समेत राज्य के 10 मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर के रूप में अधिसूचित किया गया था।
हालांकि, ट्रॉमा सेंटरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके प्रभावी संचालन की रही है। कई जगह भवन और बेड उपलब्ध होने के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टर, प्रशिक्षित नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी बनी हुई है।
पीएमसीएच ट्रॉमा सेंटर के सामने भी चुनौती
पीएमसीएच में लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर शुरू करने की योजना के साथ इसके नियमित संचालन की चुनौती भी जुड़ी होगी। ट्रॉमा सेंटर को चौबीसों घंटे प्रभावी तरीके से चलाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या जरूरी होगी।
इसके अलावा अत्याधुनिक उपकरण, ब्लड की उपलब्धता, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और इमरजेंसी सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल भी जरूरी होगा।
पीएमसीएच के पूर्व अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन प्रसाद के मुताबिक ट्रॉमा सेंटरों की बड़ी समस्या मानव संसाधन और उपकरणों की कमी है। भवन तैयार होने के बावजूद पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर और प्रशिक्षित नर्स नहीं होने पर ऐसी व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकती।
हड्डी रोग विभाग तैयार कर रहा प्रस्ताव
पीएमसीएच के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश चौधरी ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसे लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर के निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
अब प्रस्ताव तैयार होने और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद योजना को जमीन पर उतारने की दिशा में काम बढ़ेगा। यदि प्रस्तावित व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो गंभीर सड़क हादसों के मरीजों को एक ही स्थान पर कई विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
फिलहाल पीएमसीएच में लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर की योजना को गंभीर मरीजों के लिए इलाज की गति और समन्वय बेहतर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विशेषज्ञ डॉक्टर, प्रशिक्षित स्टाफ, उपकरण और 24 घंटे की इमरजेंसी सेवाएं कितनी प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जाती हैं।
अमन कुमार की रिपोर्ट
