पीके का सरकार पर हमला, कहा- अगर शिक्षा में सुधार नहीं हुआ तो, बिहार की पीढ़ियां बर्बाद होगी

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पीके बोले- शिक्षा नहीं सुधरी तो बिहार की कई पीढ़ियां बर्बाद होंगी

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। पीके का सरकार पर हमला एक बार फिर बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सामने आया है। जन सुराज के संस्थापक और विधायक प्रशांत किशोर ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार की सबसे बड़ी समस्याओं में खराब होती स्कूल शिक्षा व्यवस्था भी शामिल है। अगर समय रहते इसमें सुधार नहीं किया गया तो इसका खामियाजा आने वाली कई पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह किसी परिवार और समाज की दिशा बदलने की क्षमता रखती है। उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके दादा मजदूरी करते थे और बैलगाड़ी चलाते थे। परिवार के लोगों ने मिलकर उनके पिता की पढ़ाई पूरी कराई। इसके बाद शिक्षा के जरिए परिवार में कई लोग आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बने।

पीके बोले- शिक्षा बदल सकती है परिवार की तस्वीर

पीके ने शिक्षकों से कहा कि शिक्षा के महत्व को उनके परिवार के उदाहरण से समझा जा सकता है। उनका कहना था कि एक व्यक्ति को बेहतर शिक्षा मिलने का असर केवल उसके जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता है।

उन्होंने कहा कि बिहार में अगर स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती गई तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा। उनके मुताबिक, आज के बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिली तो आने वाले वर्षों में इसका नुकसान पूरे राज्य को उठाना पड़ेगा।

 बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर पीके ने सरकार को घेरा

पीके ने बिहार में लंबे समय से सत्ता में रही नीतीश कुमार सरकार के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब इतिहास नीतीश कुमार के शासन का मूल्यांकन करेगा, तब बिहार की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति भी महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल होगी।

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पीके ने आरोप लगाया कि राज्य के शिक्षक लंबे समय से समान वेतनमान समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में शिक्षकों की संख्या छह लाख से अधिक है, तो सरकारें इतने बड़े वर्ग की मांगों को गंभीरता से क्यों नहीं लेतीं।

पीके की शिक्षकों से अपील- मुद्दों पर करें मतदान

शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने उनसे जाति और राजनीतिक दल से ऊपर उठकर मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपने पेशे, अधिकारों और बच्चों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “आपको नीतीश कुमार ने ठगा, सुशील कुमार मोदी ने ठगा, तेजस्वी यादव ने ठगा, अब मुझे भी ठगने का मौका मत दीजिए।” प्रशांत किशोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार में शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की स्थिति और सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक बहस लगातार होती रही है।

शिक्षकों की भूमिका को लेकर पीके का जोर

प्रशांत किशोर ने कहा कि किसी भी समाज को आगे बढ़ाने में शिक्षक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए शिक्षकों को केवल सरकारी कर्मचारी के रूप में नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य को तैयार करने वाले वर्ग के तौर पर देखा जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षकों को सम्मानजनक स्थान और बेहतर काम करने का माहौल मिलना जरूरी है। उनके मुताबिक, अगर स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा और शिक्षकों को उचित सम्मान मिलेगा तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य और राज्य के विकास पर पड़ेगा।

बिहार को शिक्षा की पहचान वापस दिलाने का दावा

जन सुराज के संस्थापक ने कहा कि उनकी पार्टी का उद्देश्य बिहार को फिर से ज्ञान और शिक्षा की पहचान दिलाना है। उन्होंने कहा कि राज्य को देश के आगे बढ़ते राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए केवल आर्थिक विकास के आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं।

उनके मुताबिक, बिहार में बेहतर स्कूल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षकों के लिए सम्मानजनक व्यवस्था तैयार करनी होगी। तभी राज्य के बच्चों को दूसरे राज्यों के बच्चों के बराबर अवसर मिल सकेंगे।

पीके ने GDP के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल

प्रशांत किशोर ने बिहार की आर्थिक स्थिति और GDP से जुड़े आंकड़ों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि किसी राज्य की प्रगति का आकलन केवल GDP या आर्थिक आंकड़ों से नहीं किया जा सकता। अगर स्कूलों की स्थिति खराब है, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही है और शिक्षकों की समस्याएं बनी हुई हैं, तो विकास की तस्वीर अधूरी मानी जाएगी।

शिक्षा सुधार को बताया बिहार के भविष्य की कुंजी

प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में शिक्षा को बिहार के भविष्य से सीधे जोड़ते हुए कहा कि राज्य को आगे बढ़ाने के लिए स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुधार जरूरी है। उनका कहना था कि शिक्षा की कमजोरी का असर केवल वर्तमान पीढ़ी पर नहीं पड़ेगा, बल्कि इसका प्रभाव लंबे समय तक दिखाई देगा।

उन्होंने शिक्षकों से भी अपनी भूमिका को लेकर सजग रहने और बच्चों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की अपील की। पीके के अनुसार, बिहार की दिशा बदलने के लिए शिक्षा को केंद्र में रखना होगा। बेहतर शिक्षा व्यवस्था तैयार होने पर ही राज्य के बच्चों को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिल सकते हैं।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

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