बाढ़ के खतरे के बीच एक्शन में बिहार सरकार, 5 मंत्रियों ने बुलाई समीक्षा बैठक

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बाढ़ के खतरे के बीच पांच विभागों ने मिलकर बनाई रणनीति

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। बिहार में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। गंगा नदी का जलस्तर कई इलाकों में ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। बक्सर से भागलपुर तक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण निचले इलाकों और रिहायशी क्षेत्रों में पानी फैलने की स्थिति बनी हुई है। खेतों में खड़ी फसलों पर भी पानी का असर पड़ा है। कई स्थानों पर ग्रामीणों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है और राहत शिविर शुरू किए गए हैं। इस बीच शनिवार को बिहार सरकार के पांच विभागों ने एक साथ बैठक कर बाढ़ की स्थिति, राहत कार्य और आगे की तैयारियों की समीक्षा की।

बाढ़ को लेकर बैठक में उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, लोक निर्माण विभाग मंत्री संजय सिंह, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव और नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा शामिल हुए। पांचों विभागों के बीच समन्वय के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने और संभावित स्थिति से निपटने की तैयारियों पर चर्चा हुई।

गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता

जल संसाधन विभाग के अनुसार शनिवार सुबह नौ बजे पटना के गांधीघाट गेज स्थल पर गंगा का जलस्तर 50.51 मीटर दर्ज किया गया। यह निर्धारित खतरे के निशान से 1.91 मीटर ऊपर बताया गया है। विभाग के मुताबिक जलस्तर की प्रवृत्ति बढ़ने की है और नदी इस स्थान पर अपने उच्चतम जलस्तर 50.52 मीटर के बेहद करीब बह रही है।

जलस्तर के इस स्तर तक पहुंचने से नदी के आसपास के इलाकों में दबाव बढ़ने की आशंका है। खासकर दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए स्थिति अधिक संवेदनशील बताई जा रही है। विभाग ने संबंधित क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

नया HFL बनने की जताई गई संभावना

जल संसाधन विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार गांधीघाट गेज स्थल पर नया उच्चतम बाढ़ स्तर यानी HFL बनने की संभावना जताई गई है। यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है तो नदी के प्रवाह क्षेत्र में दबाव बढ़ सकता है। इसका सीधा असर नदी किनारे बसे निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों पर पड़ने की आशंका है।

इसी संभावना को देखते हुए विभाग ने बाढ़ आपदा से जुड़े सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाने को कहा है। तटबंध के नदी भाग में रहने वाले लोगों को संभावित खतरे की जानकारी देने और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में बढ़ सकती है परेशानी

गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी का असर केवल नदी के आसपास के क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। पानी बढ़ने के साथ निचले इलाकों में आवागमन, पेयजल, पशुओं की सुरक्षा और खेती से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। पहले से जलमग्न खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है।

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता घर और जरूरी सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना है। कई जगहों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।

बाढ़ पर पांच विभागों के बीच समन्वय

बिहार सरकार की शनिवार को हुई बैठक का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा। बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में केवल जल संसाधन विभाग की भूमिका नहीं होती। राहत, सड़क, ग्रामीण क्षेत्र, शहरी इलाकों और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने के लिए कई विभागों को एक साथ काम करना पड़ता है।

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बैठक में चल रहे राहत कार्यों की स्थिति का जायजा लिया गया और संभावित रूप से प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों और संबंधित विभागों को स्थानीय स्तर पर स्थिति पर नजर रखने तथा जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने की दिशा में काम करने को कहा गया।

जिलास्तर पर लगातार गश्ती के निर्देश

बाढ़ आपदा को देखते हुए जिलास्तर पर गठित टीमों को लगातार क्षेत्र में गश्ती करने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर नजर बनाए रखना है। नदी के किनारे बसे इलाकों में किसी भी तरह की आपात स्थिति सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके, इसके लिए निगरानी बढ़ाने को कहा गया है।

तटबंध के आसपास रहने वाले लोगों को भी संभावित खतरे की जानकारी देने पर जोर दिया गया है। प्रशासन की कोशिश है कि स्थिति बिगड़ने से पहले संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

दियारा इलाकों पर विशेष नजर

गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच दियारा क्षेत्र सबसे संवेदनशील इलाकों में माना जा रहा है। यहां बड़ी संख्या में लोग खेती और पशुपालन पर निर्भर रहते हैं। नदी का पानी बढ़ने पर खेतों, कच्चे घरों और संपर्क मार्गों पर इसका असर तेजी से दिखाई देता है।

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विभाग की ओर से दियारा क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। स्थानीय स्तर पर जलस्तर की निगरानी, लोगों को सूचना देने और जरूरत के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार के सामने राहत और बचाव की चुनौती

फिलहाल बिहार में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन और सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ नदी अपने उच्चतम स्तर के करीब है, तो दूसरी तरफ नया HFL बनने की संभावना ने चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में आने वाले समय में जलस्तर की दिशा पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।

पांच विभागों की संयुक्त बैठक को इसी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को गति दी जाए और संभावित रूप से गंभीर स्थिति वाले क्षेत्रों में पहले से तैयारी रखी जाए। प्रशासन की निगरानी और राहत-बचाव की तैयारियां आने वाले दिनों में अहम रहेंगी।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट