15 दिन में छात्र संघ चुनाव कराने का आदेश, फिर भी जामिया में प्रदर्शन जारी

जामिया

15 दिन में चुनाव का आदेश, फिर भी प्रदर्शन जारी

निष्कर्ष भारत, संवाददाता– नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का आदेश दिया है। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान निलंबित किए गए छात्रों के आदेश और जारी किए गए कारण बताओ नोटिस वापस लेने का फैसला भी किया गया है। इसके बावजूद कैंपस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी छात्र चुनाव प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने और मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि प्रशासन के फैसले के बाद भी उनकी कई मांगें पूरी नहीं हुई हैं। ऐसे में जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। इस घटनाक्रम ने जामिया परिसर में छात्र संघ चुनाव और प्रशासन के साथ छात्रों के संबंधों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है।

15 दिन के भीतर चुनाव कराने का आदेश

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलसचिव मोहम्मद महताब आलम रिजवी की ओर से सोमवार को जारी आदेश में कहा गया कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएं। हालांकि, छात्र चाहते हैं कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट कार्यक्रम घोषित किया जाए, ताकि चुनाव में किसी तरह की देरी न हो।

प्रदर्शनकारी छात्र मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति की मांग भी कर रहे हैं। छात्र आसिफ खान के मुताबिक, प्रशासन को चुनाव प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए और इसके लिए तत्काल मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

छात्रों का तर्क है कि छात्र संघ चुनाव से विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखने के लिए एक प्रतिनिधिक मंच मिलेगा। उनका मानना है कि छात्र संघ और प्रशासन के बीच संवाद की व्यवस्था मजबूत होने से कैंपस की समस्याओं को उठाने और उनके समाधान में मदद मिल सकती है।

निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस

छात्रों के आंदोलन के बीच जामिया विश्वविद्यालय प्रशासन ने राहत देते हुए प्रदर्शन की अवधि के दौरान जारी निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस वापस लेने का फैसला किया है। इसके अलावा, विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार की जांच के लिए एक समिति गठित करने का भी प्रावधान किया गया है।

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प्रशासन के ये फैसले भूख हड़ताल कर रहे छात्रों और उनके प्रतिनिधियों की ओर से सौंपे गए मांगपत्र पर विचार करने के बाद लिए गए। इससे प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कुछ राहत मिली है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

आदेश के अनुसार, प्रदर्शनकारी छात्र प्रशासन के खिलाफ आंदोलन के दौरान दिए गए मानहानिकारक बयानों, की गई कार्रवाइयों और सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने पर सहमत हुए हैं। साथ ही, संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट को तुरंत हटाने की बात भी कही गई है।

इस तरह प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया और अन्य मांगों को लेकर मतभेद अब भी कायम हैं।

कैंपस में फिर शुरू हुआ प्रदर्शन

प्रशासन के आदेश के बाद भी छात्रों ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर पूरी तरह अमल नहीं हुआ है। वे ऑनलाइन कक्षाएं बंद करने, कैंटीन और लाइब्रेरी फिर से खोलने, छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने और चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

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छात्रों का आरोप है कि कैंपस में पढ़ाई और छात्र सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी संवाद व्यवस्था की जरूरत है। उनका कहना है कि छात्र संघ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अलग-अलग गेटों से पहुंचीं करीब 100 छात्राएं

इससे पहले सोमवार को करीब 100 छात्राएं अलग-अलग गेटों से विश्वविद्यालय परिसर में दाखिल हुईं। इनमें से कुछ छात्राएं गेट नंबर 7 के बाहर एकत्र हुईं। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की और ‘दिल्ली पुलिस वापस जाओ’ के नारे लगाए।

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प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने कहा कि विश्वविद्यालय में दाखिले, हॉस्टल में सीट मिलने और मेस के खाने जैसी समस्याएं भी विद्यार्थियों के लिए चिंता का विषय हैं। छात्र का कहना था कि विद्यार्थियों और प्रशासन के बीच संवाद के लिए एक छात्र संघ जरूरी है, जो उनकी समस्याओं को उचित मंच पर उठा सके।

जामिया में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया और उसके समय को लेकर है। प्रशासन ने संविधान की मंजूरी के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का आदेश दिया है, लेकिन छात्र मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति और चुनाव कार्यक्रम को लेकर स्पष्टता चाहते हैं।

इसके साथ ही ऑनलाइन कक्षाओं, कैंटीन, लाइब्रेरी और चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे जैसी मांगों पर भी स्थिति स्पष्ट होनी बाकी है। आने वाले दिनों में प्रशासन इन मांगों पर क्या कदम उठाता है, इस पर छात्रों के आंदोलन की दिशा निर्भर करेगी। फिलहाल, चुनाव कराने के आदेश के बावजूद जामिया मिल्लिया इस्लामिया में विरोध प्रदर्शन जारी है।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट