राजभवन के कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से नाराज हुए राज्यपाल, सीएम को खूब सुनाया, कही बड़ी बात…

राजभवन

बिहार में राजभवन ट्रांसफर-पोस्टिंग पर राज्यपाल का बड़ा निर्देश

निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। बिहार में राज्य सरकार और राजभवन के बीच अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर नया प्रशासनिक मामला सामने आया है। लोकभवन में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले तथा नई नियुक्तियों को लेकर राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने नाराजगी जताई है। राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी कार्यालय आदेश में कहा गया है कि राजभवन में तैनात किसी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला करने या किसी नए अधिकारी-कर्मचारी की वहां पोस्टिंग करने से पहले राज्यपाल को इसकी जानकारी देना जरूरी होगा।

राजभवन के इस निर्देश के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राज्यपाल की आपत्ति किस विशेष अधिकारी या कर्मचारी के तबादले अथवा पोस्टिंग को लेकर है। खास बात यह भी है कि पिछले कुछ महीनों में लोकभवन में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति और तबादले के आदेश जारी हुए हैं।

राजभवन में ट्रांसफर-पोस्टिंग पर राज्यपाल की आपत्ति

राजभवन के कार्यालय आदेश में कहा गया है कि उसके संज्ञान में यह बात आई है कि लोकभवन में पदस्थ कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को दूसरे सरकारी विभागों में स्थानांतरित किया जा रहा है। साथ ही कुछ नए अधिकारियों और कर्मचारियों को लोकभवन में पदस्थ किया जा रहा है। राज्यपाल सचिवालय ने इस प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि लोकभवन में कार्यरत किसी अधिकारी या कर्मचारी को हटाने अथवा किसी नए व्यक्ति को वहां तैनात करने से पहले संबंधित प्रस्ताव उचित माध्यम से राज्यपाल के संज्ञान में लाया जाए।

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राजभवन के इस निर्देश को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे लोकभवन में होने वाली नियुक्तियों और तबादलों की प्रक्रिया में राज्यपाल की पूर्व जानकारी को आवश्यक बनाया गया है।

किस ट्रांसफर पर नाराजगी, राजभवन से अभी तस्वीर साफ नहीं

राजभवन की नाराजगी सामने आने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आखिर कौन-सा तबादला या पोस्टिंग इस आपत्ति की वजह बनी। पिछले कुछ महीनों में लोकभवन में अधिकारियों की तैनाती में कई बदलाव हुए हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि राज्यपाल सचिवालय का नया आदेश किसी हालिया मामले से जुड़ा है या फिर भविष्य में होने वाले सभी तबादलों और नियुक्तियों के लिए व्यापक निर्देश के तौर पर जारी किया गया है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर फिलहाल किसी एक अधिकारी या कर्मचारी के तबादले को राज्यपाल की नाराजगी का कारण बताना उचित नहीं होगा।

जून से अगस्त तक कई अधिकारियों की बदली तैनाती

लोकभवन में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती में बदलाव का सिलसिला पिछले कुछ महीनों में लगातार दिखाई दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जून, जुलाई और अगस्त में कई आदेश जारी किए गए।

3 अगस्त को बिहार सचिवालय आशुलिपिक सेवा के अधिकारी संजय सिंह को लोकभवन में तैनात करने का आदेश जारी किया गया था। इससे पहले जुलाई में भी लोकभवन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती में बदलाव किया गया था।

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8 जुलाई को लोकभवन में तैनात प्रधान आप्त सचिव नीरू पाठक का तबादला किया गया। उन्हें लोकभवन से हटाकर मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय में आप्त सचिव बनाया गया। इसी दिन आशुलिपिक गोपाल कुमार को भी लोकभवन से हटाकर मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय में पदस्थ किया गया।

जून में भी हुआ था राजभवन के अधिकारियों का तबादला

जून में भी लोकभवन के अधिकारियों की तैनाती में महत्वपूर्ण बदलाव हुए थे। 18 जून को आशुलिपिक सेवा की अंजु कुमारी और सत्यप्रकाश कुमार को मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय से स्थानांतरित कर राज्यपाल सचिवालय में पदस्थ किया गया था।

इसके एक दिन पहले यानी 17 जून को राज्यपाल सचिवालय में अपर सचिव के पद पर तैनात आईएएस अधिकारी नंदलाल आर्या का तबादला किया गया था। उन्हें बक्सर का बंदोबस्त पदाधिकारी बनाया गया। वहीं, 1 जून को आईएएस अधिकारी संजय कुमार को ग्रामीण कार्य विभाग से स्थानांतरित कर लोकभवन में अपर सचिव के पद पर तैनात किया गया था। इन तबादलों और पोस्टिंग को देखते हुए अब राज्यपाल सचिवालय के नए निर्देश को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

कई नियुक्तियां राज्यपाल की अनुमति से हुईं

इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचनाओं के अनुसार, इनमें से अधिकतर अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियां राज्यपाल की अनुमति से ही हुई थीं। यही वजह है कि अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि राज्यपाल की आपत्ति आखिर किन ऐसे तबादलों या पोस्टिंग से जुड़ी है, जिनकी जानकारी उन्हें पहले नहीं दी गई। ऐसे में राज्यपाल सचिवालय का नया आदेश आने वाले समय में लोकभवन से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। इसका सीधा असर इस बात पर पड़ सकता है कि लोकभवन में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले तथा नई नियुक्तियों की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।

बिहार में राज्य सरकार और राजभवन के बीच क्या बदलेगा?

राज्यपाल सचिवालय के आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब राज्य सरकार और सामान्य प्रशासन विभाग लोकभवन में अधिकारियों की तैनाती और तबादले को लेकर किस प्रक्रिया का पालन करेंगे। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला करना है तो प्रस्ताव पहले राज्यपाल के संज्ञान में लाने की व्यवस्था लागू होने से प्रक्रिया का एक अतिरिक्त चरण जुड़ जाएगा। इसी तरह किसी नए अधिकारी या कर्मचारी को लोकभवन में तैनात करने से पहले भी राज्यपाल को जानकारी देना जरूरी होगा। इसका उद्देश्य लोकभवन में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती को लेकर राज्यपाल सचिवालय और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना माना जा सकता है।

राज्यपाल सैयद अता हसनैन कौन हैं?

सैयद अता हसनैन ने 14 मार्च 2026 को बिहार के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। बिहार लोक भवन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं। वह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल हैं और सेना में लंबे समय तक विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी नियुक्ति संबंधी आधिकारिक जानकारी में भी उन्हें बिहार का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की पुष्टि की गई थी।

बिहार लोक भवन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं और उनका सचिवालय संवैधानिक, औपचारिक तथा अन्य जिम्मेदारियों के निर्वहन में उन्हें सचिवीय सहायता देता है।

राजभवन की व्यवस्था को लेकर बढ़ी चर्चा

राजभवन में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति सीधे तौर पर राज्यपाल सचिवालय के कामकाज से जुड़ी होती है। ऐसे में वहां तैनात कर्मचारियों के ट्रांसफर और नई पोस्टिंग को लेकर जारी निर्देश को प्रशासनिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी आदेश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सामान्य प्रशासन विभाग और राज्य सरकार आगे लोकभवन से जुड़े तबादलों तथा नियुक्तियों के लिए किस प्रक्रिया का पालन करते हैं।

फिलहाल किसी खास अधिकारी के तबादले को लेकर राज्यपाल की नाराजगी का कारण सामने नहीं आया है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को किसी व्यक्तिगत मामले से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। उपलब्ध जानकारी यही बताती है कि राज्यपाल सचिवालय ने लोकभवन में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति तथा तबादले से पहले राज्यपाल को जानकारी देने की व्यवस्था पर जोर दिया है।

आगे क्या होगा?, क्या झुकेगी सरकार

अब नजर राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर है। यदि सरकार इस निर्देश के अनुरूप प्रक्रिया में बदलाव करती है तो लोकभवन में होने वाली ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए राज्यपाल सचिवालय की पूर्व जानकारी महत्वपूर्ण हो जाएगी।

दूसरी ओर, प्रशासनिक स्तर पर यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि नया निर्देश किन परिस्थितियों में और किस दायरे में लागू किया जाएगा। चूंकि हाल के महीनों में लोकभवन में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती बदली गई है, इसलिए आने वाले दिनों में पुराने आदेशों की भी समीक्षा की संभावना पर नजर रहेगी।

बिहार में राजभवन के अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर राज्यपाल सचिवालय का यह निर्देश प्रशासनिक दृष्टि से अहम है। इससे राज्य सरकार और राजभवन के बीच अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर समन्वय का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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