बिहार के लोगों को फिर मिलेगा सस्ता बालू, 161 नए घाटों को खनन जल्द, अक्टूबर से शुरू होगा काम
बिहार में जल्द बढ़ेगी बालू की आपूर्ति, 161 नए घाट होंगे चालू
निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। बिहार में सस्ता बालू मिलने की उम्मीद एक बार फिर बढ़ गई है। राज्य में बालू की उपलब्धता बढ़ाने के लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। विभाग के मुताबिक अगले महीने करीब 161 नए बालू घाटों से खनन शुरू होने की संभावना है। इनमें पीला बालू के 107 और उजला बालू के 54 घाट शामिल हैं। इन सभी घाटों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है
नए घाटों से खनन शुरू होने के बाद बाजार में बालू की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। इससे निर्माण कार्य में लगे लोगों को राहत मिल सकती है और मांग के मुकाबले उपलब्धता बढ़ने पर बालू की कीमतों में भी कमी आने की संभावना है।
अक्टूबर से नए घाटों पर बालू खनन की तैयारी
राज्य में हर साल पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों के तहत मानसून अवधि में नदियों से खनन पर रोक लगाई जाती है। इस वर्ष भी 15 जून से 15 अक्टूबर तक नदियों से बालू खनन बंद है। रोक की अवधि समाप्त होने के बाद खनन गतिविधियां दोबारा शुरू होंगी।
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इसी के साथ नए बंदोबस्त किए गए घाटों से प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। विभाग की योजना है कि अक्टूबर से अधिक से अधिक घाटों को खनन के लिए सक्रिय किया जाए, ताकि राज्य के विभिन्न हिस्सों में बालू की आपूर्ति सुचारु हो सके।
किन जिलों में शुरू होगा बालू खनन?
नए 161 घाटों में मुख्य रूप से भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, पटना, गया और जमुई जिले के घाट शामिल हैं। इन जिलों में बंदोबस्त किए गए घाटों से खनन शुरू होने के बाद स्थानीय बाजारों में बालू की उपलब्धता बढ़ सकती है।
निर्माण क्षेत्र के लिए सेंड एक प्रमुख सामग्री है। घर बनाने से लेकर सड़क, पुल और अन्य निर्माण परियोजनाओं तक इसकी लगातार जरूरत होती है। ऐसे में नए घाटों के चालू होने से निर्माण गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बालू के कितने घाट होंगे चालू?
विभागीय आंकड़ों के अनुसार नए घाटों से खनन शुरू होने के बाद राज्य में करीब 311 घाटों से आपूर्ति होने लगेगी। वहीं उजले के करीब 89 घाट भी चालू हो जाएंगे।
वर्तमान में राज्य में पीले बालू के करीब 204 और उजले बालू के करीब 35 घाटों से खनन किया जा रहा है। नए घाट जुड़ने के बाद खनन और आपूर्ति का दायरा बढ़ जाएगा।
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इससे खास तौर पर उन इलाकों में राहत मिलने की उम्मीद है, जहां निर्माण कार्यों के लिए बालू की मांग अधिक रहती है और उपलब्धता कम होने पर कीमतों में बढ़ोतरी देखी जाती है।
466 पीले बालू के घाट चिह्नित
खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य में पीले सेंड के कुल 466 घाटों को चिह्नित किया है। इनमें से कई घाटों की बंदोबस्ती हो चुकी है और वहां खनन शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक घाटों की बंदोबस्ती कर उन्हें खनन व्यवस्था में शामिल करना है। इससे सेंड की आपूर्ति का नेटवर्क बढ़ेगा और निर्माण क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, सभी घाटों से एक साथ खनन शुरू नहीं होगा। जिन घाटों की बंदोबस्ती और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चालू किया जाएगा।
उजले बालू के 541 घाट चिह्नित
राज्य में उजले सेंड के भी बड़ी संख्या में घाट चिह्नित किए गए हैं। विभाग के अनुसार कुल 541 उजले घाटों की पहचान की गई है। इनमें करीब 452 घाटों की अभी नीलामी नहीं हुई है।
इन अनीलामित घाटों की प्रक्रिया पूरी करने के लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है। विभाग की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा घाटों की बंदोबस्ती जल्द पूरी हो, जिससे आने वाले समय में सेंड की उपलब्धता और बढ़ाई जा सके।
बालू की कीमत पर पड़ेगा क्या असर?
नए घाटों से खनन शुरू होने के बाद सेंड की आपूर्ति बढ़ने की संभावना है। सामान्य तौर पर किसी वस्तु की उपलब्धता बढ़ने पर मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बेहतर होता है। ऐसे में बालू की कमी के कारण होने वाली कीमतों में बढ़ोतरी पर अंकुश लग सकता है।
हालांकि, सेंड की अंतिम बाजार कीमत केवल घाटों की संख्या पर निर्भर नहीं करती। परिवहन लागत, दूरी, स्थानीय मांग और अन्य शुल्क भी कीमत को प्रभावित करते हैं। इसलिए नए घाट चालू होने के बाद वास्तविक बाजार कीमत में कितना बदलाव आएगा, यह खनन शुरू होने और आपूर्ति सामान्य होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
निर्माण कार्यों को मिल सकती है रफ्तार
सेंड की नियमित उपलब्धता का सीधा असर निर्माण गतिविधियों पर पड़ता है। घर बनाने वाले लोगों के साथ-साथ ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों के लिए भी इसकी उपलब्धता महत्वपूर्ण है। सेंड की कमी होने पर निर्माण कार्य प्रभावित होने के साथ लागत बढ़ने की आशंका रहती है।
सरकार की ओर से अधिक घाटों को खनन व्यवस्था में शामिल करने की कोशिश का उद्देश्य इसी आपूर्ति को बेहतर करना है। नए घाटों से खनन शुरू होने पर बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ सकती है और निर्माण क्षेत्र को राहत मिल सकती है।
अनीलामित घाटों की नीलामी पर जोर
खान एवं भूतत्व विभाग अब उन घाटों की बंदोबस्ती प्रक्रिया तेज करना चाहता है, जिनकी अभी नीलामी नहीं हुई है। इसके लिए जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।
विभाग की दीर्घकालिक योजना राज्य में उपलब्ध बालू संसाधनों का नियमानुसार इस्तेमाल करते हुए आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना है। इससे एक ओर निर्माण कार्यों के लिए जरूरी बालू उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर खनन गतिविधियों को निर्धारित नियमों के तहत संचालित किया जा सकेगा।
फिलहाल 15 अक्टूबर तक नदी से बालू खनन पर रोक जारी है। रोक की अवधि समाप्त होने के बाद नए बंदोबस्त किए गए घाटों से भी खनन शुरू होने की उम्मीद है। अगर तय योजना के अनुसार नए घाट समय पर सक्रिय होते हैं, तो अक्टूबर से बिहार के बाजार में सेंड की उपलब्धता पहले के मुकाबले बढ़ सकती है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
