बिहार में नए वकीलों को मिलेगा हर महीने 5 हजार का स्टाइपेंड, 3 साल तक मिलेगा लाभ, आदेश जारी
बिहार के नए वकीलों को 3 साल तक हर महीने 5 हजार रुपये का स्टाइपेंड
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार वकील स्टाइपेंड योजना के तहत नए अधिवक्ताओं को अब आर्थिक सहारा मिलने जा रहा है। बिहार सरकार युवा वकीलों को तीन साल तक हर महीने 5 हजार रुपये का स्टाइपेंड देगी। योजना की शुरुआत इसी महीने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कर सकते हैं। बिहार के महाधिवक्ता एसडी संजय ने योजना की जानकारी देते हुए बताया कि 1 जनवरी 2024 या उसके बाद बिहार स्टेट बार काउंसिल में पंजीकृत हुए नए वकील, निर्धारित शर्तें पूरी करने पर इस योजना का लाभ ले सकेंगे।
सरकार के इस फैसले को शुरुआती दौर में वकालत शुरू करने वाले युवाओं के लिए अहम माना जा रहा है। नए अधिवक्ताओं के सामने प्रैक्टिस शुरू करने के दौरान आर्थिक चुनौतियां रहती हैं। ऐसे में तीन साल तक मिलने वाली मासिक सहायता से उन्हें पेशे में टिके रहने और स्वतंत्र रूप से काम शुरू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
वकीलों को तीन साल तक मिलेगा लाभ
महाधिवक्ता के मुताबिक योजना के तहत पात्र वकीलों को हर महीने 5 हजार रुपये दिए जाएंगे। यह सहायता लगातार तीन वर्षों तक मिलेगी। सरकार ने योजना के लिए उम्र सीमा भी तय की है। 22 से 32 वर्ष की आयु वाले वकील इसके दायरे में होंगे।
योजना का लाभ लेने के लिए सिर्फ बिहार स्टेट बार काउंसिल में पंजीकरण पर्याप्त नहीं होगा। आवेदकों को निर्धारित शर्तों को पूरा करना होगा और संबंधित दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा। सरकार ने इसके लिए आवेदन प्रक्रिया और प्रमाणपत्रों से जुड़ी आवश्यकताएं भी तय की हैं।
बिहार वकील योजना में किन्हें मिलेगा फायदा
बताया गया है कि 1 जनवरी 2024 या उसके बाद नामांकित नए अधिवक्ता इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही आवेदक की उम्र 22 से 32 वर्ष के बीच होनी चाहिए। योजना का उद्देश्य नए वकीलों को पेशे की शुरुआती अवधि में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
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महाधिवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नई योजना है। इसलिए इसे लागू करने के शुरुआती चरण में कुछ व्यावहारिक समस्याएं सामने आ सकती हैं। विभाग की ओर से व्यवस्था को आगे बेहतर तरीके से संचालित करने की कोशिश की जाएगी।
आवेदन के लिए देने होंगे ये दस्तावेज
स्टाइपेंड का लाभ लेने के लिए इच्छुक वकीलों को 100 रुपये का आवेदन फॉर्म खरीदकर जमा करना होगा। आवेदन के साथ कई जरूरी दस्तावेज भी लगाने होंगे। इनमें मैट्रिक परीक्षा का प्रमाण पत्र, अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण प्रमाण पत्र और अनुभव एवं सक्रिय प्रैक्टिस प्रमाण पत्र शामिल हैं।

इसके अलावा माता या पिता का आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पैन कार्ड और ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन यानी एआईबीई का प्रमाण पत्र भी देना होगा। आवेदक को आपराधिक मामले में संलिप्त नहीं होने का शपथ पत्र भी देना होगा।
दूसरे कारोबार से जुड़ाव पर भी नियम
सरकार ने यह भी शर्त रखी है कि स्टाइपेंड के लिए आवेदन करने वाला अधिवक्ता वकालत के अलावा किसी अन्य व्यवसाय में संलिप्त नहीं होना चाहिए। इसके लिए भी आवेदक को शपथ पत्र देना होगा। आवेदन के साथ रद्द चेक जमा करना भी जरूरी बताया गया है।
इन दस्तावेजों के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि योजना का लाभ वास्तव में पात्र और सक्रिय रूप से वकालत करने वाले नए अधिवक्ताओं को ही मिले।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का हस्ताक्षर जरूरी
आवेदन प्रक्रिया में अधिवक्ता संघ की भूमिका भी रखी गई है। महाधिवक्ता के अनुसार आवेदन पर संबंधित एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव के हस्ताक्षर जरूरी होंगे। इससे आवेदक की सदस्यता और प्रैक्टिस से संबंधित जानकारी के सत्यापन में मदद मिलेगी।
हालांकि, ट्रस्टी कमेटी के कन्वेनर के पटना में मौजूद नहीं होने के कारण उनके हस्ताक्षर को अनिवार्य नहीं रखा गया है। सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को इसी व्यवस्था के आधार पर आगे बढ़ाने की तैयारी की है।
वकीलों के लिए ई-लाइब्रेरी को भी सहायता
स्टाइपेंड के अलावा सरकार ने अधिवक्ताओं के लिए कई अन्य कल्याणकारी योजनाओं की भी घोषणा की है। अधिवक्ता संघों को ई-लाइब्रेरी विकसित करने के लिए 5 लाख रुपये तक की सहायता देने की योजना है। इससे वकीलों को कानूनी किताबों और डिजिटल संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।

इसके लिए राज्य सरकार बिहार अधिवक्ता कल्याण न्यास समिति को 30 करोड़ रुपये की राशि पहले ही उपलब्ध करा चुकी है। सरकार का फोकस सिर्फ आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिवक्ताओं के लिए कामकाजी सुविधाओं में सुधार पर भी है।
महिला वकीलों की सुविधाओं पर भी जोर
सरकार की योजनाओं में महिला अधिवक्ताओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात भी शामिल है। इसके तहत शौचालयों की सुविधा और चेंबर में सुधार जैसे काम किए जाने हैं। इससे अदालत परिसरों में महिला वकीलों के लिए काम करने का माहौल बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी।
नई व्यवस्था से युवा अधिवक्ताओं को शुरुआती आर्थिक दबाव से राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर उन वकीलों के लिए यह सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है, जिन्हें प्रैक्टिस शुरू करने के बाद नियमित आमदनी बनाने में समय लगता है।
योजना लागू होने के बाद सामने आएगी तस्वीर
फिलहाल सरकार की ओर से योजना को लागू करने की तैयारी चल रही है और मुख्यमंत्री द्वारा इसी महीने इसकी शुरुआत किए जाने की बात कही गई है। आवेदन शुरू होने के बाद पात्र वकीलों की संख्या और भुगतान की प्रक्रिया की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
सरकार की इस पहल से बड़ी संख्या में युवा वकीलों को शुरुआती वर्षों में आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है। हालांकि, योजना को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। आवेदन की जांच, पात्रता का सत्यापन और समय पर स्टाइपेंड का भुगतान इसकी सफलता के प्रमुख आधार होंगे।
बिहार में युवा अधिवक्ताओं के लिए तीन साल तक 5 हजार रुपये मासिक सहायता के साथ ई-लाइब्रेरी और चेंबर जैसी सुविधाओं पर जोर दिया गया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि योजना कब से पूरी तरह लागू होती है और पात्र वकीलों को स्टाइपेंड की पहली राशि कब मिलती है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
