बिहार विधानसभा मानसून सत्र 2026: नीतीश और तेजस्वी की गैरमौजूदगी के बीच सम्राट चौधरी युग की शुरुआत, निशांत कुमार का मंत्री के रूप में पहला दिन
बिहार विधानसभा के पांच दिवसीय मानसून सत्र की शुरुआत कई राजनीतिक बदलावों के साथ हुई। पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने कार्यवाही का नेतृत्व किया, जबकि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव दोनों पहले दिन सदन में मौजूद नहीं रहे।
बिहार विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र इस बार केवल विधायी कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक तस्वीर के कारण भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोमवार को शुरू हुए सत्र के पहले ही दिन कई ऐसे घटनाक्रम देखने को मिले, जिन्होंने बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दिया। करीब दो दशकों तक राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहली बार विधानसभा की कार्यवाही में नजर नहीं आए। वहीं सत्ता पक्ष की कमान अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हाथों में दिखाई दी।
दूसरी ओर विपक्ष भी पूरी ताकत के साथ सदन में मौजूद नहीं रहा। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव विदेश दौरे पर होने के कारण पहले दिन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए। ऐसे में लंबे समय बाद बिहार विधानसभा में ऐसा दृश्य देखने को मिला, जब सत्ता और विपक्ष दोनों के सबसे बड़े चेहरे सदन से अनुपस्थित रहे।
सम्राट चौधरी सरकार का पहला मानसून सत्र
यह मानसून सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी पहली बार विधानसभा की कार्यवाही का नेतृत्व कर रहे हैं। इससे पहले तक लगातार नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के रूप में सदन में सरकार का पक्ष रखते रहे थे।
हालांकि सरकार का ढांचा काफी हद तक पहले जैसा ही दिखाई दिया। नीतीश कुमार के कार्यकाल में उनके साथ बैठने वाले दोनों उपमुख्यमंत्री अब भी अपनी जिम्मेदारियों के साथ सदन में मौजूद रहे। लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सम्राट चौधरी का बैठना बिहार की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में सरकार की कार्यशैली और प्राथमिकताओं की झलक भी पेश करेगा।
21 वर्षों बाद सदन से बाहर रहे नीतीश कुमार
बिहार की राजनीति में यह पहली बार हुआ जब लगभग 21 वर्षों तक सत्ता और विधानसभा की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार किसी भी सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने पिछले बजट सत्र तक विधानसभा की कार्यवाही का नेतृत्व किया था, लेकिन इस बार उनकी भूमिका पूरी तरह बदल चुकी है।
जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार सोमवार शाम दिल्ली रवाना होने वाले हैं, जहां वे पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे। इस बदलाव के साथ उनका सक्रिय विधानसभा कार्यकाल समाप्त हो गया है और अब उनकी राजनीतिक भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देगी।
बिहार की राजनीति में लंबे समय तक निर्णायक भूमिका निभाने वाले नेता का विधानसभा से बाहर होना अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक परिवर्तन माना जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री के रूप में निशांत कुमार की नई शुरुआत
मानसून सत्र का एक और महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पहली विधानसभा उपस्थिति रही। मंत्री बनने के बाद यह उनका पहला विधानसभा सत्र है और संयोग से उन्होंने अपने जन्मदिन के दिन ही सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया।
सदन को संबोधित करते हुए निशांत कुमार ने लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों को लोकतंत्र की भावना के अनुरूप एक टीम की तरह काम करना चाहिए ताकि जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरा जा सके।
उन्होंने पहली बार निर्वाचित होकर आए विधायकों को भी विशेष संदेश दिया। निशांत कुमार ने कहा कि विधानसभा में प्रवेश केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जिम्मेदारियों का प्रतीक है। उन्होंने सभी नए विधायकों से सदन की गरिमा, परंपराओं और समृद्ध विरासत का सम्मान करने की अपील की।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 20 वर्षों के शासनकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि “न्याय के साथ विकास” की जिस सोच के साथ उनके पिता ने बिहार में काम किया, उसी विकास यात्रा को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पूरी निष्ठा और मजबूती के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
विपक्ष की रणनीति पर भी नजर
सिर्फ सत्ता पक्ष ही नहीं, विपक्ष भी पहले दिन पूरी तरह सक्रिय नहीं दिखाई दिया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव विदेश दौरे पर होने के कारण विधानसभा नहीं पहुंचे। उनकी अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।
फिलहाल विपक्ष की रणनीति तय करने की जिम्मेदारी मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत संभाल रहे हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तेजस्वी यादव मानसून सत्र के आगामी दिनों में शामिल होंगे या नहीं।
हालांकि विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि सरकार को विभिन्न जनहित और राज्य से जुड़े मुद्दों पर घेरने की तैयारी जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सदन के भीतर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
पांच दिवसीय मानसून सत्र के दौरान सरकार कई विधेयक और अन्य विधायी कार्य सदन में पेश कर सकती है। इसके अलावा विपक्ष राज्य में बाढ़ की स्थिति, कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार, शिक्षा और विकास योजनाओं सहित कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन के बाद यह पहला बड़ा विधानसभा सत्र होने के कारण सरकार के कामकाज पर सभी की नजर रहेगी। वहीं विपक्ष भी अपनी राजनीतिक भूमिका को मजबूत करने की कोशिश करेगा।
बिहार की राजनीति में नए दौर का संकेत
बिहार विधानसभा का मानसून सत्र 2026 केवल एक नियमित विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में बदलते नेतृत्व और नई राजनीतिक परिस्थितियों का प्रतीक बन गया है। एक ओर सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली बड़ी संसदीय परीक्षा दे रहे हैं, तो दूसरी ओर नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ चुके हैं।
विपक्ष में तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी और सत्ता पक्ष में नए नेतृत्व की मौजूदगी ने पहले ही दिन यह स्पष्ट कर दिया कि बिहार की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों की सदन की कार्यवाही न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगी, बल्कि राज्य की भविष्य की दिशा तय करने के लिहाज से भी काफी अहम मानी जा रही है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
