बिहार में AI से स्मार्ट होंगी स्वास्थ्य सेवाएं, 3 बड़े अस्पतालों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए निर्देश
बिहार के 4 बड़े अस्पतालों में AI स्वास्थ्य सेवाओं का पायलट प्रोजेक्ट
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार में स्वास्थ्य सेवाएं अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और आधुनिक तकनीक से स्मार्ट बनाने की तैयारी है। राज्य में मरीजों को समय पर बेहतर इलाज, एंबुलेंस की सुविधा और अस्पतालों में उपलब्ध बेड की सही जानकारी उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई तकनीकी व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत की अध्यक्षता में पटना स्थित राज्य स्वास्थ्य समिति के सभागार में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पेशेंट रेफरल सिस्टम, स्मार्ट एंबुलेंस, टेलीमेडिसिन और AI आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विस्तृत रणनीति पर चर्चा हुई।
चार बड़े संस्थानों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
तकनीकी व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए पहले चरण में राज्य के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत PMCH, AIIMS पटना, NMCH और IGIMS को शामिल किया गया है।
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इन अस्पतालों को तकनीकी नेटवर्क से जोड़कर मरीजों के रेफरल, एंबुलेंस और बेड प्रबंधन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की तैयारी है। पायलट प्रोजेक्ट से मिलने वाले अनुभव के आधार पर इस व्यवस्था को आगे राज्य के दूसरे सरकारी अस्पतालों तक विस्तार दिया जा सकता है।
स्वास्थ्य सेवाएं होंगी तकनीक आधारित
बैठक में पेशेंट रेफरल सिस्टम को सॉफ्टवेयर के साथ इंटीग्रेट करने पर विशेष जोर दिया गया। इसका उद्देश्य मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजने की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है। खासकर गंभीर मरीजों के मामले में अस्पताल चुनने में लगने वाला समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। प्रस्तावित सिस्टम में मरीज की स्थिति और अस्पताल में उपलब्ध बेड की जानकारी को एक साथ जोड़ने की तैयारी है, ताकि रेफरल के दौरान अनावश्यक देरी से बचा जा सके।
स्मार्ट एंबुलेंस में मिलेंगे मरीज के वाइटल्स
नई व्यवस्था के तहत 102 और 108 एंबुलेंस सेवाओं को एकीकृत करने की योजना है। इमरजेंसी रेफरल के दौरान एंबुलेंस में मौजूद मरीज के वाइटल्स यानी स्वास्थ्य संबंधी जरूरी आंकड़े प्राप्त किए जाएंगे।

इन जानकारियों को डैशबोर्ड के माध्यम से सीधे कंट्रोल सेंटर तक भेजने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे अस्पताल पहुंचने से पहले ही चिकित्सकीय टीम को मरीज की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
मरीज के लिए अस्पताल चुनना होगा आसान
प्रस्तावित इमरजेंसी नेटवर्क में एंबुलेंस सेवाओं को अस्पतालों से जोड़ने की योजना है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि संबंधित अस्पतालों में खाली बेड की रियल टाइम जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
यदि किसी मरीज को तत्काल अस्पताल की जरूरत है, तो उसकी गंभीर स्थिति और उपलब्ध बेड के आधार पर उपयुक्त अस्पताल का चयन किया जा सकेगा। इससे मरीज को ऐसे अस्पताल ले जाने की स्थिति से बचा जा सकता है जहां पहुंचने के बाद बेड उपलब्ध नहीं हो।
बेड प्रबंधन के लिए QR कोड व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग में एकीकृत कमांड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने का रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है। इसके साथ QR कोड आधारित बेड प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है। सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध बेड की स्थिति को रियल टाइम अपडेट करने पर जोर दिया गया है। एंबुलेंस में लगाए जाने वाले कियोस्क के जरिए मरीज की वर्तमान लोकेशन और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध बेड की जानकारी संबंधित अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे अस्पतालों और एंबुलेंस के बीच सूचना का आदान-प्रदान तेज होने की उम्मीद है।
AI से स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी की उम्मीद
स्वास्थ्य विभाग की नई योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। AI की मदद से मरीजों से जुड़े डेटा का विश्लेषण करने और जरूरत के अनुसार तेजी से निर्णय लेने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत के अनुसार, AI के इस्तेमाल से मरीजों के डेटा का प्रभावी विश्लेषण संभव होगा और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं तक मरीजों की पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

पोषण की जानकारी भी स्वास्थ्य डेटा का हिस्सा
बैठक में मरीजों के पोषण और खान-पान से संबंधित जानकारी को भी स्वास्थ्य डेटा में शामिल करने का फैसला लिया गया। इसके लिए ANM, आशा कार्यकर्ताओं और जीविका दीदियों के माध्यम से जमीनी स्तर से जानकारी एकत्र करने की योजना है।
इससे मरीज की चिकित्सा स्थिति के साथ उसके पोषण और खान-पान से जुड़ी परिस्थितियों को भी समझने में मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग इस जानकारी को व्यापक स्वास्थ्य नेटवर्क का हिस्सा बनाने की दिशा में काम करेगा।
आयुष दवाओं की जानकारी भी नेटवर्क में होगी शामिल
बैठक में आयुष चिकित्सकों द्वारा अनुशंसित प्रभावी दवाओं से जुड़ी जानकारी को भी संकलित कर स्वास्थ्य नेटवर्क में शामिल करने की योजना पर चर्चा हुई। उद्देश्य मरीजों को अधिक समग्र और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। विभिन्न स्रोतों से प्राप्त स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को एकीकृत करने से मरीज की स्थिति का बेहतर आकलन करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
104 सेवा और ई-संजीवनी को जोड़ने की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग ने 104 कॉल सेंटर को लेकर भी कई निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने 104 सेवा के व्यापक प्रचार-प्रसार और कॉल फॉलो-अप पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही 104 सेवा को ई-संजीवनी पोर्टल से जोड़ने की संभावनाओं का अध्ययन करने का निर्देश दिया गया है। यदि दोनों सेवाओं को प्रभावी तरीके से जोड़ा जाता है, तो मरीजों को दूर बैठे चिकित्सा सलाह और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
तकनीक से बदल सकती है मरीजों की राह
स्वास्थ्य विभाग की प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मरीज को सही समय पर सही चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना है। खासकर इमरजेंसी के दौरान एंबुलेंस, अस्पताल और कंट्रोल सेंटर के बीच बेहतर समन्वय से इलाज की प्रक्रिया को तेज करने की उम्मीद है। PMCH, AIIMS पटना, NMCH और IGIMS में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। इस परियोजना के जरिए तकनीकी व्यवस्था की प्रभावशीलता का आकलन किया जाएगा। इसके बाद सफल परिणाम मिलने पर इसे राज्य के अन्य अस्पतालों तक ले जाने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।
बिहार स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के इस इस्तेमाल से रेफरल सिस्टम, एंबुलेंस संचालन, बेड प्रबंधन, टेलीमेडिसिन और मरीजों के डेटा विश्लेषण में बदलाव आने की उम्मीद है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि पायलट प्रोजेक्ट को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है और इसका लाभ आम मरीजों तक कितनी तेजी से पहुंचता है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
