‘मैं प्रशांत किशोर…’ से विधानसभा तक: विधायक बनते ही PK ने ली संविधान की शपथ

प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर शपथ लेते हुए

निष्कर्ष भारत-संवाददाता-पटना: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर अब औपचारिक रूप से बिहार विधानसभा के सदस्य बन गए हैं। सोमवार को उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के कार्यालय कक्ष में विधायक पद की शपथ ली। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के मजबूत गढ़ में जीत दर्ज करने के बाद प्रशांत किशोर की सक्रिय राजनीतिक पारी अब विधानसभा के भीतर भी शुरू हो गई है।

सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे प्रशांत किशोर विधानसभा पहुंचे। गेट पर पहुंचते ही उन्होंने वहां मौजूद लोगों का अभिवादन किया। इसके बाद जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती समेत पार्टी के अन्य नेताओं के साथ विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय कक्ष में पहुंचे, जहां उन्होंने विधायक पद की शपथ ली।

शपथ के दौरान प्रशांत किशोर ने भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखने तथा विधायक के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन करने की शपथ ली। इसके साथ ही बांकीपुर उपचुनाव में मिली जीत के बाद उनके विधायक बनने की संवैधानिक प्रक्रिया भी पूरी हो गई।

देखिये खबर हमारे यूट्यूब चैनल पर: प्रशांत ने मीडिया से कहा मै सौभाग्यशाली हूं, जिस सदन विभूतियां बैठी उस सदन का मैं सदस्य हूं।

बांकीपुर में भाजपा के गढ़ को भेदकर हासिल की जीत

प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की जीत कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब तीन दशक से भाजपा के प्रभाव वाली इस सीट पर उन्होंने पार्टी के प्रत्याशी को हराकर राजनीतिक समीकरण बदलने का संकेत दिया।

3 अगस्त को हुई मतगणना में प्रशांत किशोर ने भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को 19,246 मतों के अंतर से पराजित किया। प्रशांत किशोर को कुल 64,117 वोट मिले, जो कुल मतदान का करीब 49.23 प्रतिशत था। वहीं भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को 44,794 वोट मिले और उनका वोट शेयर करीब 34.4 प्रतिशत रहा।

राजद प्रत्याशी रेखा गुप्ता 14,263 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। उन्हें करीब 10.95 प्रतिशत मत मिले। खास बात यह है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में रेखा गुप्ता इसी सीट पर दूसरे स्थान पर रही थीं, लेकिन उपचुनाव में उन्हें तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।

तीन दशक से भाजपा के प्रभाव में रही बांकीपुर सीट

बांकीपुर विधानसभा सीट पर प्रशांत किशोर की जीत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत आधार मानी जाती रही है। नवीन किशोर सिन्हा के बाद उनके पुत्र नितिन नवीन यहां से लगातार विधायक चुने जाते रहे।

नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने और भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा दिया था। इसके बाद खाली हुई सीट पर उपचुनाव कराया गया। भाजपा ने अपनी परंपरागत सीट बचाने के लिए नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया, लेकिन परिणाम पार्टी के पक्ष में नहीं गया।

उपचुनाव में मतदान प्रतिशत भी अपेक्षाकृत कम रहा था। कम मतदान को लेकर चुनावी विश्लेषकों के बीच कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। परिणाम सामने आने के बाद बांकीपुर के राजनीतिक समीकरण में बदलाव साफ नजर आया।

विधायक बनते ही रोजगार पर फोकस

विधायक पद की शपथ लेने के बाद प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के युवाओं के लिए रोजगार को अपने प्रमुख एजेंडे में शामिल करने की बात कही है। उन्होंने क्षेत्र के कम से कम 10 हजार युवाओं को अगले एक-दो वर्षों में रोजगार के अवसरों से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के युवाओं से अपना सीवी और बायोडाटा उनके कार्यालय में जमा करने की अपील की है। उनका कहना है कि जो युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश कर रहे हैं, वे अपना विवरण उपलब्ध कराएं, ताकि उन्हें उपलब्ध रोजगार अवसरों से जोड़ा जा सके।

हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य सरकारी नौकरी देने की गारंटी देना नहीं है। इसके बजाय देशभर में मौजूद अपने संपर्कों और नेटवर्क के माध्यम से युवाओं को निजी कंपनियों तथा रोजगार के अवसरों से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

बिहार से बाहर नौकरी के अवसर भी तलाशेंगे

प्रशांत किशोर ने रोजगार के मुद्दे पर अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए संकेत दिया कि युवाओं को जरूरत पड़ने पर बिहार से बाहर भी रोजगार के लिए जाना पड़ सकता है। उनका फोकस सरकारी नौकरी के बजाय निजी क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों तक युवाओं की पहुंच बढ़ाने पर है।

उन्होंने युवाओं से अपनी शैक्षणिक योग्यता और अनुभव से जुड़ी जानकारी साझा करने की अपील की है, ताकि उनकी प्रोफाइल के अनुरूप रोजगार के विकल्प तलाशे जा सकें। अब देखना होगा कि विधायक के रूप में प्रशांत किशोर का यह रोजगार मॉडल जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है।

भाजपा के खिलाफ मुखर रहे हैं प्रशांत किशोर

राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद से प्रशांत किशोर लगातार भाजपा और उसके शीर्ष नेताओं पर निशाना साधते रहे हैं। बिहार की राजनीति से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर उनके बयान अक्सर चर्चा में रहे हैं।

बांकीपुर जैसी भाजपा की मजबूत सीट पर जीत ने उनकी राजनीतिक स्थिति को और मजबूती दी है। अब विधानसभा के सदस्य के तौर पर उन्हें सदन के भीतर अपनी भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। ऐसे में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जन सुराज विधानसभा में किन मुद्दों को प्राथमिकता देता है और सरकार तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस में प्रशांत किशोर किस तरह की भूमिका निभाते हैं।

शपथ के बाद बढ़ी राजनीतिक जिम्मेदारी

प्रशांत किशोर के लिए विधायक पद की शपथ केवल संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने तक सीमित नहीं है। बांकीपुर की जीत के बाद अब उनके सामने अपने चुनावी वादों और क्षेत्र की जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती भी है।

एक ओर उन्होंने रोजगार को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है, तो दूसरी ओर विधानसभा के भीतर क्षेत्र की समस्याओं को उठाना उनकी नई जिम्मेदारी होगी। बांकीपुर की जनता ने उपचुनाव में उन्हें स्पष्ट जनादेश दिया है। अब उनकी कार्यशैली और विधानसभा में प्रदर्शन पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।

बांकीपुर उपचुनाव में मिली जीत और विधायक पद की शपथ के साथ प्रशांत किशोर की बिहार की सक्रिय राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। आने वाले समय में उनकी विधानसभा के भीतर भूमिका और युवाओं के लिए रोजगार से जुड़े उनके प्रयास यह तय करने में अहम होंगे कि जन सुराज की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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