अशोकधाम मंदिर भगदड़ के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय अलर्ट, डीएम-एसपी को सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश

अशोकधाम

सात श्रद्धालुओं की मौत के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय अलर्ट

निष्कर्ष भारत-संवाददाता-लखीसराय: लखीसराय स्थित प्रसिद्ध श्रीइंद्रमनेश्वर महादेव मंदिर, अशोकधाम में सावन की सोमवारी के दौरान हुई भगदड़ में श्रद्धालुओं की मौत के मामले को बिहार पुलिस मुख्यालय ने गंभीरता से लिया है। घटना के बाद पुलिस मुख्यालय की विशेष शाखा ने लखीसराय प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। विशेष शाखा के पुलिस अधीक्षक (जी) की ओर से लखीसराय के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में पर्याप्त प्रशासनिक सतर्कता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

पुलिस मुख्यालय के इस पत्र की प्रतिलिपि मुंगेर के प्रमंडलीय आयुक्त और पुलिस उप-महानिरीक्षक को भी भेजी गई है। इसके अलावा पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था), जिला विशेष शाखा के पदाधिकारी और संबंधित शाखा को भी पत्र की प्रति भेजी गई है। इससे साफ है कि पुलिस मुख्यालय ने अशोकधाम की घटना को केवल स्थानीय स्तर की घटना नहीं मानते हुए इसे संवेदनशील कानून-व्यवस्था के मामले के रूप में लिया है।

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अशोकधाम में भगदड़ से सात श्रद्धालुओं की मौत

पुलिस मुख्यालय की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि श्रावण की सोमवारी के अवसर पर अशोकधाम मंदिर में श्रद्धालुओं के बीच भगदड़ की घटना होने की सूचना मिली है। इस हादसे में सात श्रद्धालुओं की मृत्यु होने का उल्लेख पत्र में किया गया है। सावन के महीने में अशोकधाम मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। सोमवारी के दिन भीड़ और बढ़ जाती है।

ऐसे में भगदड़ की घटना के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ को नियंत्रित करना और मंदिर परिसर के आसपास यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। पुलिस मुख्यालय ने इसी को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन को आगे विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया है।

धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला, कानून-व्यवस्था को लेकर सतर्कता

विशेष शाखा ने अपने पत्र में इस घटना की संवेदनशीलता पर भी जोर दिया है। पत्र में कहा गया है कि मामला धार्मिक आस्था से जुड़ा होने के कारण घटना के बाद विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में पुलिस और प्रशासन को किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयार रहने की जरूरत है।

मुख्यालय ने जिला प्रशासन को क्षेत्र में पर्याप्त प्रशासनिक सतर्कता बनाए रखने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने को कहा है। पुलिस बल की पर्याप्त संख्या में प्रतिनियुक्ति, लगातार निगरानी और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती के निर्देश

अशोकधाम मंदिर में सावन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल तैनात करने पर जोर दिया है। भीड़ के दबाव वाले स्थानों की पहचान कर वहां पुलिसकर्मियों की तैनाती, श्रद्धालुओं की आवाजाही पर निगरानी और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

प्रशासन से यह भी अपेक्षा की गई है कि मंदिर परिसर, प्रवेश और निकास मार्गों तथा आसपास के प्रमुख स्थानों पर भीड़ प्रबंधन के प्रभावी इंतजाम किए जाएं। श्रद्धालुओं की भीड़ एक जगह अधिक जमा न हो, इसके लिए आवश्यकता के अनुसार प्रवेश और निकास व्यवस्था को नियंत्रित करने की जरूरत पर भी ध्यान दिया जा सकता है।

ट्रैफिक व्यवस्था पर भी विशेष फोकस

पुलिस मुख्यालय ने सुरक्षा के साथ यातायात प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी है। सावन की सोमवारी जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में निजी वाहन, बस और अन्य वाहन मंदिर क्षेत्र में पहुंचते हैं। इससे आसपास के रास्तों पर जाम की स्थिति पैदा होने की संभावना रहती है।

इसी को देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन को ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और जरूरत के अनुसार यातायात मार्ग में बदलाव जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। मुख्यालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालुओं की भीड़ और वाहनों की आवाजाही एक-दूसरे के लिए परेशानी का कारण न बने।

डीएम-एसपी से यथोचित कार्रवाई की अपेक्षा

पुलिस मुख्यालय ने पत्र के माध्यम से लखीसराय के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। प्रशासन को पूरे मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा की गई है।

वहीं, मुंगेर प्रमंडल के आयुक्त और डीआईजी को पत्र की प्रति भेजे जाने से यह भी स्पष्ट है कि उच्च स्तर के अधिकारी इस मामले की स्थिति पर नजर रखेंगे। जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे सुरक्षा इंतजामों और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।

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आगे धार्मिक आयोजनों में बढ़ेगी सतर्कता

अशोकधाम मंदिर की घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की तैयारियों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। सावन के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में भीड़ के दबाव, प्रवेश-निकास व्यवस्था, बैरिकेडिंग, पार्किंग, यातायात और आपातकालीन सेवाओं की तैयारी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद अब लखीसराय प्रशासन के सामने चुनौती यह होगी कि आने वाले धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाएं और ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। खासकर भीड़ वाले दिनों में प्रशासन और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय, पर्याप्त बल की तैनाती और लगातार निगरानी को अहम माना जा रहा है।

Nishakrsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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