योगी सरकार का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार कल, सपा के बागियों समेत कई नए चेहरों को मिल सकती है जगह

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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार रविवार को अपने दूसरे कार्यकाल का बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार करने जा रही है।

यूपी कैबिनेट विस्तार में जातीय और राजनीतिक संतुलन पर फोकस, ब्राह्मण-दलित-OBC समीकरण साधने की तैयारी

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार रविवार को अपने दूसरे कार्यकाल का बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार करने जा रही है। राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति के तहत इस बार 5 से 6 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। वहीं, कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी होने की भी चर्चा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से राजभवन में मुलाकात करेंगे, जिसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। भाजपा संगठन और सरकार के बीच कई दौर की बैठकों के बाद संभावित नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है।

इस विस्तार को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा जातीय समीकरण, महिला प्रतिनिधित्व और नाराज वर्गों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।

सपा के बागियों को मिल सकता है इनाम

योगी मंत्रिमंडल विस्तार की सबसे बड़ी चर्चा समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले नेताओं को लेकर है। सूत्रों के मुताबिक, सपा से निकाले गए विधायक मनोज पांडेय और पूजा पाल का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।

मनोज पांडेय पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में ब्राह्मण समाज के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। भाजपा का मानना है कि उन्हें मंत्री बनाने से ब्राह्मण मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा। हाल के दिनों में कई मुद्दों को लेकर ब्राह्मण समाज की नाराजगी की चर्चा रही है, ऐसे में पार्टी इस वर्ग को साधने की कोशिश में जुटी है।

वहीं, कौशांबी की विधायक पूजा पाल को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। पूजा पाल लंबे समय से अपराध और माफिया राजनीति के खिलाफ मुखर रही हैं। उनके पति और भाई की हत्या को लेकर उनका संघर्ष राजनीतिक रूप से भी चर्चित रहा है। भाजपा उन्हें महिला और पिछड़ा वर्ग दोनों के प्रतिनिधित्व के रूप में देख रही है।

ब्राह्मण नाराजगी दूर करने की तैयारी

उत्तर प्रदेश भाजपा के सामने इस समय ब्राह्मण समाज की नाराजगी बड़ी चुनौती मानी जा रही है। शंकराचार्य विवाद, UGC नियमों को लेकर बहस और पुलिस भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द से जुड़े विवाद ने इस मुद्दे को और बढ़ाया है।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और संघ की समन्वय बैठक में भी इस विषय पर चर्चा हुई थी। ऐसे में पार्टी मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए ब्राह्मण समाज को बड़ा संदेश देना चाहती है।

फिलहाल योगी सरकार में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत कुल 7 ब्राह्मण मंत्री हैं। लेकिन जितिन प्रसाद के केंद्र में जाने के बाद एक सीट खाली मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस बार दो ब्राह्मण चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है।

पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा और भाजपा के प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला के नाम भी मंत्री पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं।

दलित वोट बैंक पर भी भाजपा की नजर

भाजपा इस विस्तार में दलित वर्ग को भी बड़ा प्रतिनिधित्व दे सकती है। योगी सरकार में फिलहाल बेबीरानी मौर्य समेत कुल 8 दलित मंत्री हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा में 86 सीटें आरक्षित हैं, जिनमें 84 SC और 2 ST के लिए सुरक्षित हैं।

भाजपा के पास 67 दलित विधायक हैं और पार्टी नहीं चाहती कि विपक्ष दलित असंतोष को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाए। यही वजह है कि अंबेडकर जयंती पर भाजपा ने राज्यभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए थे।

सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर मूर्ति विकास योजना भी शुरू की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार में दलित वर्ग से एक या दो नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।

महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की तैयारी

योगी सरकार महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। यूपी विधानसभा में इस समय 51 महिला विधायक हैं। इनमें भाजपा की 30, अपना दल (एस) की 4 और रालोद की 1 विधायक शामिल हैं।

फिलहाल योगी कैबिनेट में सिर्फ 5 महिला मंत्री हैं। भाजपा महिला वोट बैंक को मजबूत करने के लिए महिला मंत्रियों की संख्या बढ़ा सकती है।

महिला आरक्षण कानून को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में बहस के बीच भाजपा महिलाओं के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कर रही है। ऐसे में पूजा पाल समेत कुछ महिला नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना बढ़ गई है।

पिछड़ा वर्ग भी रहेगा फोकस में

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़ा वर्ग हमेशा निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। भाजपा इस वर्ग में अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार में OBC नेताओं को भी जगह दे सकती है।

फिलहाल डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह, धर्मपाल सिंह, दारा सिंह चौहान और ओमप्रकाश राजभर जैसे कई बड़े OBC चेहरे सरकार में मौजूद हैं। इसके बावजूद पार्टी नए सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है।

जाट समाज से आने वाले पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का नाम इस बार सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल है। उन्हें 2022 में कैबिनेट मंत्री पद से हटाकर संगठन की जिम्मेदारी दी गई थी। अब उन्हें फिर सरकार में शामिल किए जाने की चर्चा तेज है।

इसके अलावा नाई समाज से MLC रामचंद्र प्रधान और विश्वकर्मा समाज से हंसराज विश्वकर्मा को भी मंत्री बनाया जा सकता है।

कुछ मंत्रियों का हो सकता है प्रमोशन

मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान सिर्फ नए चेहरे ही नहीं, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों का प्रमोशन भी संभव माना जा रहा है।

समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण और परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। दोनों नेताओं को संगठन और सरकार में सक्रिय चेहरों के रूप में देखा जाता है।

इसके अलावा जेपीएस राठौर, गुलाब देवी और दिनेश प्रताप सिंह के नाम भी प्रमोशन की सूची में बताए जा रहे हैं।

राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में भाजपा

इस मंत्रिमंडल विस्तार को भाजपा सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति के रूप में देख रही है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा हर वर्ग और क्षेत्र में मजबूत संदेश देना चाहती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा जातीय संतुलन, महिला प्रतिनिधित्व और विपक्ष से आए नेताओं को साथ लेकर व्यापक सामाजिक समीकरण तैयार कर रही है।

साथ ही, पार्टी यह भी दिखाना चाहती है कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर नए चेहरों को अवसर दिया जा रहा है। यही वजह है कि इस विस्तार को योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का सबसे अहम राजनीतिक कदम माना जा रहा है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर किन चेहरों को मंत्री पद मिलता है और भाजपा किस सामाजिक समीकरण के जरिए आगामी चुनावी रणनीति को मजबूत करने की कोशिश करती है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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