राहुल गांधी का पटना दौरा फिलहाल रद्द, छात्र सम्मेलन स्थगित; कांग्रेस ने आचार संहिता बताई वजह, तैयारियों को लेकर भी चर्चा
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का प्रस्तावित पटना दौरा फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
पटना: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का प्रस्तावित पटना दौरा फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। 15 जुलाई को आयोजित होने वाला कांग्रेस का प्रस्तावित छात्र सम्मेलन अब नहीं होगा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस फैसले के पीछे बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के कारण लागू आदर्श आचार संहिता को आधिकारिक वजह बताया है। हालांकि, पार्टी के अंदर कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि चुनावी नियमों का पालन करते हुए यह निर्णय लिया गया है।
पहले बदली गई तारीख, अब कार्यक्रम पूरी तरह स्थगित
राहुल गांधी का छात्र सम्मेलन पहले 11 जुलाई को प्रस्तावित था। बाद में पार्टी ने इसकी तारीख बदलकर 15 जुलाई कर दी थी। अब इसे पूरी तरह स्थगित कर दिया गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया चल रही है और क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता प्रभावी है। ऐसे में इतने बड़े राजनीतिक कार्यक्रम का आयोजन करना उचित नहीं माना गया।
पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग के नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करते हुए कार्यक्रम को फिलहाल टालने का निर्णय लिया गया है।
आचार संहिता का हवाला देकर लिया गया फैसला
कांग्रेस के अनुसार, बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के कारण राजनीतिक गतिविधियों पर चुनाव आयोग की निगरानी बढ़ गई है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के किसी बड़े नेता की सभा या सम्मेलन चुनावी नियमों के उल्लंघन का विषय बन सकता था।
इसी कारण पार्टी नेतृत्व ने राहुल गांधी का दौरा फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी किसी भी तरह के विवाद या चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन से बचना चाहती है।
क्या सिर्फ आचार संहिता ही वजह है?
हालांकि कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर केवल आचार संहिता का हवाला दिया गया है, लेकिन पार्टी के अंदरखाने कुछ और कारणों की भी चर्चा हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सम्मेलन की तैयारियां तय समय के अनुसार पूरी नहीं हो सकीं। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रदेश कांग्रेस संगठन को बड़े स्तर पर छात्रों को जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन निर्धारित समय तक अपेक्षित तैयारी पूरी नहीं हो पाई।
हालांकि इन चर्चाओं की कांग्रेस ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
10 हजार छात्रों का डेटा तैयार करने का था लक्ष्य
पार्टी सूत्रों के अनुसार, छात्र सम्मेलन की तैयारी के तहत प्रदेश कांग्रेस को करीब 10 हजार छात्रों का विस्तृत डेटा तैयार करने का लक्ष्य दिया गया था।
इन छात्रों में विशेष रूप से ऐसे युवाओं को शामिल करने की योजना थी, जो NEET, प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रियाओं या अन्य शैक्षणिक विवादों से प्रभावित रहे हों। पार्टी का उद्देश्य इन छात्रों को सम्मेलन में बुलाकर उनकी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना था।
इसके लिए नाम, मोबाइल नंबर और अन्य संपर्क विवरण जुटाने का अभियान भी चलाया गया था।
डेटा तैयार नहीं होने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, निर्धारित समय तक छात्रों की पूरी सूची और संपर्क विवरण तैयार नहीं हो सके। इससे सम्मेलन की तैयारियों पर असर पड़ा।
बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंच बनाने और उन्हें कार्यक्रम में शामिल करने की योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। इसी वजह से कार्यक्रम को लेकर संगठन के भीतर असमंजस की स्थिति बनी रही।
हालांकि कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पार्टी लगातार यही कह रही है कि कार्यक्रम स्थगित करने का कारण केवल आचार संहिता है।
छात्र राजनीति को लेकर कांग्रेस की रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में कांग्रेस युवाओं और छात्रों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हाल के वर्षों में बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं।
इन्हीं मुद्दों को लेकर राहुल गांधी का छात्र सम्मेलन प्रस्तावित किया गया था, ताकि युवाओं से सीधा संवाद स्थापित किया जा सके और उनकी समस्याओं को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया जा सके।
यदि यह सम्मेलन होता, तो माना जा रहा था कि इसमें शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए जाते।
बांकीपुर उपचुनाव के बीच बढ़ा राजनीतिक महत्व
राहुल गांधी का यह दौरा ऐसे समय प्रस्तावित था जब पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है।
इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने अभिषेक कुमार बंटी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर चुनाव मैदान में हैं और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने रेखा कुमारी गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है।
ऐसे राजनीतिक माहौल में राहुल गांधी का दौरा स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया था। हालांकि कार्यक्रम स्थगित होने के बाद अब चुनाव प्रचार में कांग्रेस की सक्रिय भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
कांग्रेस की अगली रणनीति क्या होगी?
फिलहाल कांग्रेस ने छात्र सम्मेलन की नई तारीख की घोषणा नहीं की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि उपचुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद परिस्थितियों की समीक्षा की जाएगी और उसके बाद कार्यक्रम की नई तिथि तय की जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सम्मेलन बाद में आयोजित होता है, तो कांग्रेस इसे पहले से अधिक बड़े स्तर पर आयोजित करने की कोशिश कर सकती है। खासकर बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए छात्र और युवा वर्ग को जोड़ना पार्टी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक नजरें अगले फैसले पर
राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे के स्थगित होने के बाद अब राजनीतिक दलों और छात्रों की नजर कांग्रेस के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि उपचुनाव के बाद यह सम्मेलन आयोजित होता है, तो यह बिहार में कांग्रेस के राजनीतिक अभियान का अहम हिस्सा बन सकता है।
फिलहाल पार्टी आधिकारिक रूप से यही कह रही है कि चुनावी आचार संहिता के कारण कार्यक्रम को स्थगित किया गया है। वहीं, तैयारियों और छात्र डेटा संग्रह को लेकर चल रही चर्चाओं पर कांग्रेस ने कोई टिप्पणी नहीं की है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि राहुल गांधी का पटना दौरा कब होगा और छात्र सम्मेलन को किस स्वरूप में आयोजित किया जाएगा।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
