वोट चोरी के मुद्दे पर पटना में जुटेंगे युवा, 13 अक्टूबर को गांधी मैदान से आंदोलन का ऐलान
संदीप सौरभ ने 13 अक्टूबर को गांधी मैदान से वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर मार्च का ऐलान किया
निष्कर्ष भारत संवाददाता- पटना- बिहार की राजधानी पटना में वोट चोरी के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक बार फिर आंदोलन की तैयारी है। भाकपा-माले (CPI-ML) के विधायक संदीप सौरभ ने घोषणा की है कि मंगलवार, 13 अक्टूबर को वामदलों और छात्र संगठनों के आह्वान पर पटना में विरोध मार्च निकाला जाएगा। इसकी शुरुआत ऐतिहासिक गांधी मैदान से करने की योजना है। आंदोलन में युवाओं और छात्रों की भागीदारी बढ़ाने की अपील की गई है।
संदीप सौरभ के मुताबिक, हर युवा दिल्ली जाकर प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सकता। ऐसे में बिहार के छात्रों और युवाओं को अपनी बात रखने के लिए पटना में ही एक बड़ा मंच देने की तैयारी है। यह आंदोलन ऐसे समय में प्रस्तावित है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर बिहार में राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन जारी हैं। हाल ही में पटना में विपक्षी दलों ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च निकाला था।
गांधी मैदान से निकलेगा विरोध मार्च
विधायक संदीप सौरभ ने कहा है कि 13 अक्टूबर को वामदलों और छात्र संगठनों के आह्वान पर युवाओं को आंदोलन के लिए एकजुट किया जाएगा। गांधी मैदान से प्रस्तावित मार्च का प्रमुख मुद्दा कथित वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग होगा।
आयोजकों की ओर से छात्रों और युवाओं से इसमें शामिल होने की अपील की गई है। उनका कहना है कि दिल्ली में होने वाले प्रदर्शनों में हर व्यक्ति के लिए पहुंचना संभव नहीं है, इसलिए पटना में आंदोलन आयोजित किया जा रहा है।
फिलहाल मार्च में शामिल होने वाले संगठनों और प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
दिल्ली में प्रदर्शन और कार्रवाई को लेकर केंद्र पर निशाना
संदीप सौरभ ने दिल्ली में युवाओं के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ दमनकारी व्यवहार किया गया।
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उनका कहना है कि युवा मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। ऐसे में उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
दिल्ली में 10 अक्टूबर को चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें आई थीं। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए, जबकि चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि वोट चोरी विपक्ष की ओर से लगाया जा रहा आरोप है। इस आरोप को साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता। मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग और विरोध कर रहे दलों के पक्ष अलग-अलग हैं।
जीतन राम मांझी के बयान पर संदीप सौरभ की आपत्ति
आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के कथित बयान पर भी विवाद हुआ है। संदीप सौरभ ने प्रदर्शनकारी युवाओं के लिए ‘झींगुर’ और ‘तेलचट्टा’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। संदीप सौरभ ने मांझी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी वफादारी दिखाने का दबाव महसूस करने का आरोप भी लगाया।
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यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन पर बिहार के एनडीए और विपक्षी नेताओं के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी प्रदर्शनकारी युवाओं के लिए अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी।
SIR और वोट चोरी का मुद्दा क्यों गरमाया?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से हटने का खतरा है। इसी मुद्दे को लेकर बिहार में कई विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं।
विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। वहीं, मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके उद्देश्य पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हैं।
पटना में 13 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च को इसी व्यापक विवाद के बीच देखा जा रहा है। वामदल और छात्र संगठन युवाओं को इस मुद्दे पर एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं।
विधान परिषद चुनाव पर भी बोले संदीप सौरभ
विधायक संदीप सौरभ ने बिहार विधान परिषद चुनाव और महागठबंधन की रणनीति पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग दल अपनी सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी पार्टी मजबूत उम्मीदवारों के समर्थन पर भी विचार करेगी।
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उनके मुताबिक, जहां महागठबंधन का उम्मीदवार मजबूत स्थिति में होगा, वहां उनकी पार्टी उसे पूरा समर्थन देगी। उनके बयान से स्पष्ट है कि चुनावी रणनीति के साथ-साथ विपक्षी दलों के बीच आपसी सहयोग भी अहम रहेगा।
अब 13 अक्टूबर के आंदोलन पर नजर
पटना में प्रस्तावित मार्च से पहले राजनीतिक माहौल गर्म है। एक ओर विपक्षी दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि गांधी मैदान से प्रस्तावित मार्च में कितने युवा और छात्र शामिल होते हैं और आंदोलन को लेकर प्रशासन क्या व्यवस्था करता है। इस प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा वोट चोरी के आरोप और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहेगा।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
