सम्राट चौधरी सरकार बैकफुट पर? गांव में होल्डिंग टैक्स विवाद से लेकर टोल और सैटेलाइट टाउनशिप तक, जानिए 4 फैसले जिन पर बदला रुख

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

बिहार में होल्डिंग टैक्स विवाद के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि गरीबों पर कोई नया टैक्स नहीं लगेगा। जानिए सरकार के चार बड़े फैसले जिन पर रुख बदला और राजस्व बढ़ाने के लिए उठाए गए पांच कदम।

पटना। बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों में होल्डिंग टैक्स लगाए जाने को लेकर छिड़े विवाद के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा परिषद में सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की गरीबों पर कोई नया टैक्स लगाने की मंशा नहीं है और न ही ऐसा कोई प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि फिलहाल चर्चा केवल गांवों में लगाए जाने वाले विज्ञापन होर्डिंग पर शुल्क को लेकर है, जबकि नल-जल और कचरा प्रबंधन जैसी सेवाओं के लिए पहले से ही नाममात्र का शुल्क लिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री का यह बयान उस समय आया जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधान परिषद सदस्य सुनील कुमार सिंह ने ग्रामीण इलाकों में होल्डिंग टैक्स लगाए जाने का मुद्दा सदन में उठाया और सरकार से इस पर चर्चा की मांग की।

सदन में क्या बोले मुख्यमंत्री?

राजद सदस्य सुनील कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों और दुकानों पर टैक्स लगाकर आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना चाहती है। उन्होंने कहा कि गांवों में 5,000 रुपये तक होल्डिंग टैक्स वसूले जाने की तैयारी की जा रही है, जो ग्रामीणों के हित में नहीं है।

इस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य गरीबों से टैक्स वसूलना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्डिंग और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े कुछ प्रावधानों पर चर्चा चल रही है और समय के अनुसार नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

क्या है बिहार ग्राम पंचायत (कर, दर एवं शुल्क) नियमावली-2026?

15 जुलाई 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने ‘बिहार ग्राम पंचायत (कर, दर एवं शुल्क) नियमावली-2026’ को मंजूरी दी थी। सरकार का तर्क है कि पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय विकास कार्यों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह नियमावली लाई गई है।

प्रस्तावित नियमों के अनुसार पंचायतों को विभिन्न स्थानीय सेवाओं और व्यावसायिक गतिविधियों पर शुल्क लगाने का अधिकार मिलेगा। इनमें आवासीय और व्यावसायिक भवनों पर होल्डिंग टैक्स, बाजार एवं हाट शुल्क, जलापूर्ति और स्वच्छता शुल्क, विज्ञापन शुल्क, ईंट-भट्ठा, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, लघु उद्योग, मैरिज हॉल और बस-ऑटो स्टैंड जैसे प्रतिष्ठानों पर निर्धारित शुल्क शामिल हैं।

हालांकि सरकार का कहना है कि अंतिम नियम लागू करने से पहले कई बिंदुओं पर पुनर्विचार किया जाएगा।

पहली बार नहीं, पहले भी बदला है सरकार का रुख

ग्रामीण टैक्स विवाद ऐसा पहला मामला नहीं है, जब सम्राट चौधरी सरकार को अपने फैसले पर सफाई देनी पड़ी हो। पिछले कुछ महीनों में कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर सरकार ने संशोधित रुख अपनाया है।

1. स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स

जुलाई 2026 में नई टोल नीति जारी होने के बाद यह आशंका जताई गई कि निजी वाहनों से भी स्टेट हाईवे पर टोल लिया जाएगा। विरोध बढ़ने पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल व्यावसायिक वाहनों से ही टोल वसूला जाएगा और निजी कारों व अन्य निजी वाहनों को इससे बाहर रखा जाएगा।

2. सैटेलाइट टाउनशिप में जमीन की खरीद-बिक्री

सरकार ने राज्य के कई शहरों के आसपास प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी थी। किसानों और स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया क्योंकि जरूरत पड़ने पर वे अपनी जमीन नहीं बेच पा रहे थे।

विरोध बढ़ने के बाद सरकार ने नियमों में संशोधन किया और गंभीर बीमारी, शादी या अन्य आपात परिस्थितियों में बिहार राज्य आवास बोर्ड के माध्यम से जमीन बेचने की अनुमति दे दी। साथ ही किसानों को बाजार दर से अधिक मुआवजा देने का प्रावधान भी किया गया।

3. मुख्यमंत्री आवास से जुड़ा विवाद

सरकार ने 5 देशरत्न मार्ग स्थित बंगले को मुख्यमंत्री आवास परिसर का हिस्सा बनाने का फैसला लिया था। विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक निर्णय बताया। विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने यह निर्णय वापस लेते हुए बंगले को मुख्यमंत्री आवास से अलग कर दिया।

राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार के बड़े फैसले

एक ओर सरकार विवादित फैसलों पर सफाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कई वित्तीय निर्णय भी लिए गए हैं।

वाहनों पर बढ़ा टैक्स

सरकार ने वाहनों पर लगने वाले ट्रेड टैक्स को चार गुना तक बढ़ा दिया है। साथ ही दोपहिया वाहनों के पंजीकरण शुल्क में भी एक प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इससे नई बाइक, स्कूटी, कार और अन्य वाहनों की ऑन-रोड कीमतों पर असर पड़ने की संभावना है।

डीलरशिप शुल्क में वृद्धि

वाहन डीलरों से लिए जाने वाले व्यापारिक शुल्क में भी चार गुना तक बढ़ोतरी की गई है। सरकार का अनुमान है कि इससे हर वर्ष सैकड़ों करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।

जमीन का सर्किल रेट बढ़ाया

सरकार ने जमीन के न्यूनतम मूल्य (एमवीआर) में भी वृद्धि की है। इसके कारण स्टांप शुल्क और रजिस्ट्री की लागत बढ़ी है। हालांकि इसके साथ डिजिटल और पेपरलेस रजिस्ट्री जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं।

म्यूटेशन अब मुफ्त नहीं

अब बिहार में जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए 200 रुपये का शुल्क देना होगा। पहले यह प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क थी। सरकार का कहना है कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और राजस्व में बढ़ोतरी होगी।

गलत मूल्य बताने पर 100% जुर्माना

नए स्टाम्प संशोधन के तहत यदि कोई व्यक्ति जमीन या मकान की रजिस्ट्री के दौरान वास्तविक बाजार मूल्य छिपाता है, तो उस पर कम स्टांप शुल्क की राशि के बराबर 100 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार का दावा है कि इससे राजस्व चोरी पर रोक लगेगी।

विपक्ष का हमला, सरकार की सफाई

विपक्ष का आरोप है कि सरकार लगातार नए कर लगाकर आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। वहीं सरकार का कहना है कि पंचायतों को मजबूत बनाना, स्थानीय विकास के लिए संसाधन जुटाना और कर व्यवस्था में पारदर्शिता लाना उसका उद्देश्य है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि गरीब परिवारों पर किसी प्रकार का नया कर लगाने की कोई योजना नहीं है। सरकार नियमों में आवश्यक संशोधन कर सभी हितधारकों की चिंताओं को ध्यान में रखेगी।

ग्रामीण होल्डिंग टैक्स को लेकर उठे विवाद ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। हालांकि मुख्यमंत्री के बयान के बाद सरकार ने यह संकेत दिया है कि अंतिम नियम लागू करने से पहले कई प्रावधानों में बदलाव संभव है। आने वाले दिनों में पंचायती राज विभाग द्वारा जारी होने वाले विस्तृत नियमों से यह साफ होगा कि किन वर्गों पर शुल्क लागू होगा और किन्हें राहत मिलेगी। फिलहाल विपक्ष इस मुद्दे को जनता से जोड़कर सरकार को घेरने में जुटा है, जबकि सरकार इसे पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में जरूरी सुधार बता रही है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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