क्या सिद्धारमैया देंगे इस्तीफा? डीके शिवकुमार बन सकते हैं नए मुख्यमंत्री, कांग्रेस में तेज हुई सत्ता की जंग

सिद्धारमैया

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे की चर्चाओं ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व अब सत्ता परिवर्तन के मूड में है और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर बढ़ती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे की चर्चाओं ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व अब सत्ता परिवर्तन के मूड में है और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

दिल्ली में मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद राहुल गाँधी, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच करीब छह घंटे चली बैठक के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है। हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी बदलाव की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन अंदरखाने में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

दिल्ली बैठक के बाद बढ़ी अटकलें

सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से मुख्यमंत्री पद छोड़ने का आग्रह किया। बदले में उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने और राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव भी दिया गया। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि कर्नाटक में अगले विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और सरकार दोनों में नई ऊर्जा लाई जाए।

बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया ने पहले इस प्रस्ताव पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कथित तौर पर पार्टी नेतृत्व से कहा कि अगर उन्हें हटाया गया तो इससे पार्टी के भीतर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। सूत्रों के अनुसार उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में विधायक उनके समर्थन में हैं और वे डीके शिवकुमार के नेतृत्व में काम नहीं करना चाहते।

हालांकि बाद में कुछ करीबी समर्थकों से बातचीत के बाद सिद्धारमैया ने संकेत दिए कि वे हाईकमान के फैसले का सम्मान करेंगे। गुरुवार सुबह उन्होंने मंत्रियों की ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई है, जिसके बाद उनके इस्तीफे की अटकलें और तेज हो गई हैं।

कांग्रेस नेतृत्व क्यों चाहता है बदलाव?

कांग्रेस की रणनीति सिर्फ वर्तमान सत्ता संतुलन तक सीमित नहीं है। पार्टी 2028 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर लंबी रणनीति पर काम कर रही है।

सिद्धारमैया फिलहाल कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली ओबीसी चेहरों में गिने जाते हैं। उनकी पकड़ संगठन और विधायकों पर मजबूत मानी जाती है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह की बगावत या टूट से बचना चाहता है। इसी वजह से नेतृत्व परिवर्तन को बेहद सावधानी से अंजाम देने की कोशिश की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस चाहती है कि सिद्धारमैया की राजनीतिक प्रतिष्ठा बनी रहे। इसी रणनीति के तहत उन्हें दिल्ली की राजनीति में अहम जिम्मेदारी देने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा उनके बेटे को राज्य सरकार में मंत्री बनाने का फॉर्मूला भी चर्चा में है, ताकि सिद्धारमैया खेमे को संतुष्ट रखा जा सके।

डीके शिवकुमार की बढ़ती दावेदारी

डीके शिवकुमार लंबे समय से मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे हैं। 2023 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच खींचतान देखने को मिली थी।

शिवकुमार समर्थक लगातार दावा करते रहे हैं कि कांग्रेस हाईकमान ने ढाई-ढाई साल का सत्ता साझा करने का फॉर्मूला तय किया था। यानी पहले ढाई साल सिद्धारमैया मुख्यमंत्री रहेंगे और उसके बाद शिवकुमार को मौका मिलेगा। हालांकि सिद्धारमैया समर्थक इस दावे को हमेशा नकारते रहे हैं।

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने नवंबर 2025 में ढाई साल का कार्यकाल पूरा कर लिया था। इसके बाद से ही सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई थीं। कई विधायक दिल्ली पहुंचकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी मिले थे। माना जा रहा था कि यह मुलाकात नेतृत्व परिवर्तन को लेकर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा थी।

पार्टी में दो खेमों की लड़ाई

कर्नाटक कांग्रेस इस समय साफ तौर पर दो बड़े खेमों में बंटी दिखाई देती है। एक तरफ सिद्धारमैया समर्थक विधायक हैं, जबकि दूसरी ओर डीके शिवकुमार के समर्थक सक्रिय हैं।

सिद्धारमैया समर्थकों का मानना है कि मौजूदा मुख्यमंत्री की लोकप्रियता अभी भी मजबूत है और उन्हें हटाना राजनीतिक जोखिम साबित हो सकता है। दूसरी तरफ शिवकुमार गुट का तर्क है कि अगर तय समझौते के मुताबिक उन्हें मौका नहीं मिला तो इससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया कैबिनेट विस्तार और फेरबदल के पक्ष में हैं। वहीं शिवकुमार चाहते हैं कि पहले मुख्यमंत्री पद पर फैसला हो। पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि अगर हाईकमान सिर्फ कैबिनेट विस्तार करता है और नेतृत्व परिवर्तन नहीं करता, तो इसका मतलब होगा कि सिद्धारमैया पूरे पांच साल मुख्यमंत्री बने रहेंगे।

प्रियंका गांधी भी बदलाव के पक्ष में?

सूत्रों के मुताबिक, प्रियंका गाँधी वाड्रा भी कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में हैं। बताया जा रहा है कि मंगलवार की अहम बैठक में प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं।

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि 2028 तक सिद्धारमैया की उम्र करीब 80 साल हो जाएगी। ऐसे में पार्टी अभी से नया चेहरा स्थापित करना चाहती है ताकि सत्ता विरोधी माहौल को भी कम किया जा सके और भविष्य के नेतृत्व को तैयार किया जा सके।

सार्वजनिक तौर पर क्या बोले नेता?

दिल्ली पहुंचने के बाद सिद्धारमैया ने मीडिया से कहा था कि उन्हें हाईकमान ने बुलाया है और बैठक का एजेंडा उन्हें नहीं पता। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने उन्हें फोन कर बैठक की जानकारी दी थी।

वहीं डीके शिवकुमार ने दिल्ली रवाना होने से पहले कहा था कि कुछ परिस्थितियों में दिल्ली जाना जरूरी हो जाता है। उनके इस बयान को भी राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा गया।

हालांकि बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव K. C. Venugopal ने मीडिया में चल रही अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि बैठक में सिर्फ राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों पर चर्चा हुई और नेतृत्व परिवर्तन जैसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।

पहले भी सामने आ चुकी हैं बयानबाजियां

पिछले कुछ महीनों में दोनों नेताओं के बीच कई बार बयानबाजी देखने को मिली है। नवंबर 2025 में डीके शिवकुमार ने कहा था कि वे हमेशा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नहीं रह सकते और दूसरे नेताओं को भी मौका मिलना चाहिए।

इसके बाद दिसंबर 2025 में सिद्धारमैया ने कहा था कि जब हाईकमान चाहेगा, तब डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बन जाएंगे। उस समय उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों नेताओं के बीच कोई मतभेद नहीं है और सरकार एकजुट होकर काम कर रही है।

हालांकि अंदरूनी राजनीति में लगातार जारी खींचतान ने यह साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री पद का मुद्दा अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।

क्या होगा कांग्रेस का अगला कदम?

अब सबकी नजर गुरुवार पर टिकी हुई है। अगर सिद्धारमैया इस्तीफा देते हैं तो कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर बड़ा सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है। डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते हैं तो यह उनके लंबे राजनीतिक इंतजार का अंत होगा।

लेकिन कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता परिवर्तन के दौरान पार्टी को एकजुट बनाए रखने की होगी। सिद्धारमैया की मजबूत पकड़ और विधायकों में उनका प्रभाव कांग्रेस नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

कर्नाटक सिर्फ एक राज्य नहीं बल्कि दक्षिण भारत में कांग्रेस की सबसे महत्वपूर्ण सरकारों में से एक है। ऐसे में पार्टी कोई भी फैसला बेहद सोच-समझकर लेना चाहती है, ताकि सत्ता संघर्ष का असर 2028 के चुनावों पर न पड़े।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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