बाढ़ पर बोले सीएम सम्राट, कहा- केंद्र से हुई बात, शिवराज के नेतृत्व में टीम आएगी बिहार, करेगी जमीनी जांच

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सीएम सम्राट बोले- बिहार आएगी केंद्रीय टीम, शिवराज करेंगे बाढ़ जांच

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर सोमवार को बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने बताया कि राज्य में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने और समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अध्ययन के लिए केंद्र सरकार एक विशेष टीम बिहार भेजेगी। इस टीम का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे।

सीएम सम्राट के मुताबिक, बिहार सरकार लगातार केंद्र के संपर्क में थी। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें फोन कर केंद्रीय टीम भेजे जाने की जानकारी दी। टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लेगी और नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी।

सीएम सम्राट ने बताया, नेपाल के पानी से बढ़ती है मुश्किल

सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ के प्रमुख कारणों में नेपाल से आने वाले पानी को बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, नेपाल में भारी बारिश के बाद वहां की नदियों में पानी बढ़ता है और इसका सीधा असर बिहार के सीमावर्ती जिलों पर पड़ता है।

सीएम सम्राट ने कहा की खासकर उत्तर बिहार के जिलों को हर साल इस समस्या का सामना करना पड़ता है। नेपाल से आने वाला पानी सबसे पहले सुपौल जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों को प्रभावित करता है। इसके बाद पानी मधुबनी और आसपास के दूसरे इलाकों तक पहुंचता है।

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स्थिति बिगड़ने के साथ बाढ़ का दायरा बढ़ता जाता है और बड़ी आबादी इसकी चपेट में आ जाती है। यही वजह है कि राज्य सरकार अब केवल तत्काल राहत और बचाव कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहती। बाढ़ के पीछे मौजूद कारणों और उससे होने वाले नुकसान का व्यापक अध्ययन भी कराया जाएगा।

केंद्र के साथ लगातार संपर्क में थी बिहार सरकार

सीएम सम्राट ने बताया कि बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर राज्य सरकार के स्तर पर पिछले कई दिनों से लगातार तैयारी की जा रही थी। संबंधित विभागों के अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों और बाढ़ की स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। सीएम सम्राट ने कहा की प्रधानमंत्री की ओर से बाढ़ की स्थिति के अध्ययन के लिए केंद्रीय स्तर पर टीम बनाने का निर्देश दिया गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने भी इस दिशा में पहल तेज कर दी।

सीएम सम्राट के अनुसार, प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनसे फोन पर बातचीत की। उन्होंने जानकारी दी कि केंद्र सरकार केंद्रीय मंत्री के नेतृत्व में एक टीम बिहार भेज रही है। शिवराज सिंह चौहान इस टीम का नेतृत्व करेंगे।

शिवराज के नेतृत्व में आएगी केंद्रीय टीम

सीएम सम्राट के अनुसार, केंद्रीय टीम के बिहार आने के बाद उसका प्रमुख काम प्रभावित इलाकों का जमीनी निरीक्षण करना होगा। टीम केवल अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर रिपोर्ट तैयार नहीं करेगी, बल्कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर वास्तविक स्थिति को समझेगी।

टीम के दौरे से बिहार सरकार को भी बाढ़ से हुए नुकसान का व्यापक आकलन तैयार करने में मदद मिल सकती है। प्रभावित जिलों में स्थिति देखने के बाद केंद्र के सामने नुकसान की वास्तविक तस्वीर रखी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य को विशेष केंद्रीय सहायता या बाढ़ से निपटने के लिए बड़े स्तर पर योजनाओं की जरूरत का आकलन किया जा सकता है।

बाढ़ में कितना नुकसान, टीम करेगी पड़ताल

केंद्रीय टीम का फोकस सिर्फ खेतों और फसलों तक सीमित नहीं रहेगा। बाढ़ से प्रभावित अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसमें देखा जाएगा कि किन इलाकों में सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं और पुल-पुलिया को कितना नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा लोगों के घरों को हुए नुकसान की भी जानकारी जुटाई जाएगी।

किसानों की फसल और कृषि भूमि पर पड़े असर का आकलन भी किया जाएगा। बाढ़ के कारण किन क्षेत्रों में आवागमन बाधित हुआ और लोगों को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, इसकी जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल की जा सकती है।

तटबंधों और बाढ़ से सुरक्षा देने वाली दूसरी संरचनाओं की स्थिति का भी निरीक्षण किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मौजूदा बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था कहां मजबूत है और किन स्थानों पर सुधार की जरूरत है।

सीएम सम्राट बोले, स्थायी समाधान पर भी हो काम

बिहार में बाढ़ हर साल आने वाली समस्या है। उत्तर बिहार के कई जिले मानसून के दौरान बाढ़ की चपेट में आते हैं। इसका असर लोगों के घरों, खेती, सड़क संपर्क और रोजगार तक पर पड़ता है।

कई बार बाढ़ की वजह से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। किसानों की खड़ी फसल बर्बाद होती है और ग्रामीण इलाकों का संपर्क प्रभावित होता है। ऐसे में केवल एक साल के नुकसान का मुआवजा या राहत व्यवस्था पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ के स्थायी समाधान की है। नेपाल से आने वाले पानी और बिहार की नदियों की स्थिति को देखते हुए इसके लिए राज्य और केंद्र के बीच समन्वय जरूरी माना जा रहा है।

नेपाल से आने वाले पानी पर भी नजर

बिहार की बाढ़ समस्या में नेपाल की भूमिका लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश होने पर वहां से आने वाली नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है। इसका असर बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों पर पड़ता है। सुपौल, मधुबनी समेत उत्तर बिहार के कई इलाकों में ऐसी स्थिति बार-बार देखने को मिलती है। पानी का प्रवाह बढ़ने के साथ बाढ़ दूसरे क्षेत्रों तक फैल सकती है।

ऐसे में बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए केवल बिहार के भीतर की व्यवस्था को मजबूत करना ही पर्याप्त नहीं होगा। नेपाल से आने वाले पानी, नदियों के प्रवाह और सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति को भी व्यापक योजना में शामिल करना होगा।

सीएम सम्राट के सामने राहत के साथ बड़ी चुनौती

सीएम सम्राट ने कहा की राज्य सरकार के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत और सहायता पहुंचाना है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य में बाढ़ के नुकसान को कम करने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करनी है।

केंद्रीय टीम का दौरा इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि टीम की रिपोर्ट में बिहार के लिए बड़े स्तर पर बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं, तटबंधों के सुधार, जलनिकासी और दूसरी आधारभूत संरचनाओं की जरूरत सामने आती है, तो केंद्र से अतिरिक्त सहायता की मांग मजबूत हो सकती है। बिहार सरकार की कोशिश होगी कि जमीनी नुकसान की वास्तविक तस्वीर केंद्र के सामने रखी जाए, ताकि राहत के साथ स्थायी समाधान की दिशा में भी काम आगे बढ़ सके।

रिपोर्ट से तय होगी आगे की दिशा

केंद्रीय टीम के निरीक्षण के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट पर अब सबकी नजर रहेगी। रिपोर्ट में बाढ़ से हुए नुकसान और प्रभावित लोगों की स्थिति के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण की जरूरतों का भी उल्लेख होने की उम्मीद है। अगर केंद्र सरकार रिपोर्ट के आधार पर विशेष सहायता उपलब्ध कराती है या दीर्घकालिक बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को मंजूरी मिलती है, तो बिहार के लिए यह महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

हर साल बाढ़ से प्रभावित होने वाले लाखों लोगों के लिए स्थायी समाधान लंबे समय से बड़ी जरूरत रहा है। इसलिए केंद्रीय टीम का दौरा सिर्फ नुकसान का आकलन करने तक सीमित रहता है या इससे कोई बड़ी योजना निकलती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

बिहार को अब स्थायी समाधान का इंतजार

सीएम सम्राट चौधरी के बयान के बाद बिहार में बाढ़ को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय की तस्वीर सामने आई है। प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में केंद्रीय टीम के बिहार आने की जानकारी दी गई है। टीम प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी और बाढ़ से हुए नुकसान का जमीनी आकलन करेगी। सीएम सम्राट के अनुसार, रिपोर्ट के आधार पर आगे की सहायता और योजनाओं की दिशा तय हो सकती है।

बिहार में हर साल बाढ़ से होने वाली तबाही को देखते हुए अब उम्मीद इस बात पर टिकी है कि केंद्रीय टीम का यह दौरा केवल नुकसान का आंकड़ा तैयार करने तक सीमित न रहे, बल्कि नेपाल से आने वाले पानी और नदियों की बाढ़ से निपटने के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी समाधान की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएं।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट