बिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 15 IAS और 61 DSP का तबादला, शिक्षा से लेकर पुलिसिंग तक कई विभागों में बदलाव
बिहार में एक बार फिर बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को 15 IAS अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना की अधिसूचना जारी की।
बिहार में एक बार फिर बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने शुक्रवार को 15 IAS अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना की अधिसूचना जारी की। इसके साथ ही गृह विभाग ने 61 DSP अधिकारियों का भी ट्रांसफर किया है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
इस फेरबदल में शिक्षा, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, जल संसाधन, ऊर्जा, खान एवं भू-तत्व, श्रम संसाधन और पुलिसिंग जैसे अहम विभागों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कई अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
शिक्षा विभाग को मिला नया सचिव
सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल को शिक्षा विभाग का नया सचिव बनाया है। उन्हें निर्वाचन विभाग के साथ-साथ खेल विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इसके साथ ही डॉ. बी. राजेन्दर को शिक्षा और खेल विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।

विनोद सिंह गुंजियाल लंबे समय से बिहार प्रशासनिक व्यवस्था में सक्रिय रहे हैं और उनकी पहचान सख्त प्रशासनिक अधिकारी के रूप में रही है। बक्सर के जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की थी। जनता दरबार में देरी से पहुंचने वाले अधिकारियों से जवाब-तलब करने के कारण वे अक्सर चर्चा में रहे।
विनोद सिंह गुंजियाल से जुड़े विवाद भी रहे चर्चा में
विनोद सिंह गुंजियाल का नाम कई बार विवादों में भी आया। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान जब वे मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) थे, तब विपक्षी दलों विशेषकर RJD ने मतदान प्रतिशत और मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। हालांकि गुंजियाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताया था।
इसके अलावा 2020 में पशुपालन निदेशक रहते हुए पटना हाईकोर्ट परिसर के पास बर्ड फ्लू की आशंका के बाद दुकानों को बंद कराने के फैसले पर भी विवाद हुआ था। स्थानीय दुकानदारों ने इस आदेश का विरोध किया था।
पथ निर्माण और PHED विभाग में बदलाव
सरकार ने पंकज कुमार पाल को पथ निर्माण विभाग का सचिव नियुक्त किया है। वहीं राजेश कुमार को कोसी प्रमंडल आयुक्त पद से हटाकर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) का प्रधान सचिव बनाया गया है।

अवनीश कुमार सिंह को भागलपुर प्रमंडल आयुक्त पद से हटाकर खान एवं भू-तत्व विभाग का सचिव-सह-खान आयुक्त बनाया गया है। उन्हें बिहार राज्य खनिज विकास निगम और बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
श्रम संसाधन और IT विभाग में नई जिम्मेदारियां
के. सेंथिल कुमार को गन्ना उद्योग विभाग से हटाकर श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। उन्हें पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
अभय कुमार सिंह को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से हटाकर सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही वे BELTRON के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे।
हिमांशु शर्मा और प्रमंडलीय आयुक्तों को अतिरिक्त जिम्मेदारी
हिमांशु शर्मा को जीविका मिशन से स्थानांतरित कर विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का प्रभारी सचिव बनाया गया है। हालांकि वे जीविका और आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त प्रभार में बने रहेंगे।
प्रेम सिंह मीणा को भागलपुर प्रमंडल और हिमांशु कुमार राय को कोसी प्रमंडल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
मुख्यमंत्री सचिवालय में नई एंट्री
सरकार ने श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर और गुंजन सिंह को संयुक्त सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय बनाया है। वहीं स्वास्थ्य सचिव लोकेश सिंह को भी मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। उनके पास पर्यटन और विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी।
सीएम सचिवालय के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह को जल संसाधन विभाग भेजा गया है। हालांकि उनके पास सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) का प्रभार बना रहेगा।
स्वास्थ्य विभाग में कुमार रवि की तैनाती
हाल ही में सम्राट कैबिनेट विस्तार के बाद नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है। इसके बाद सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी कुमार रवि को स्वास्थ्य विभाग में सचिव के पद पर तैनात किया है। कुमार रवि को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विश्वसनीय अधिकारी माना जाता है।
ऊर्जा, भवन निर्माण और समाज कल्याण विभाग में बदलाव
मद्य निषेध एवं निबंधन विभाग के सचिव अजय यादव को ऊर्जा विभाग का सचिव बनाया गया है। कला संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार को भवन निर्माण विभाग का सचिव बनाया गया है। वे भवन निर्माण निगम का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे।

पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के ACS एचआर श्रीनिवास को समाज कल्याण विभाग भेजा गया है। उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार को बिहार भवन के स्थानीय आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
61 DSP अधिकारियों का भी ट्रांसफर
गृह विभाग ने 61 DSP अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। डीएसपी निहार भूषण को CID से ट्रांसफर कर बगहा का SDPO बनाया गया है। वहीं ओम प्रकाश को भभुआ का SDPO बनाया गया है।
दोनों अधिकारी इससे पहले पटना में विभिन्न थानों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और राजधानी की पुलिसिंग में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।
इससे पहले 16 IPS और 12 IAS का भी हुआ था तबादला
चार दिन पहले ही बिहार सरकार ने 16 IPS और 12 IAS अधिकारियों का तबादला किया था। उस फेरबदल में कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध, तकनीकी सेवाएं और आर्थिक अपराध इकाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों में बदलाव किए गए थे।
1994 बैच के IPS डॉ. परेश सक्सेना को महानिदेशक-सह-आयुक्त, असैनिक सुरक्षा बनाया गया था। वहीं प्रमांशु कुमार को अपर पुलिस महानिदेशक, विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई थी।
अमित कुमार जैन को आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में नई जिम्मेदारी दी गई। 1998 बैच के चर्चित IPS अधिकारी अमित लोढ़ा को तकनीकी सेवाएं एवं संचार विभाग भेजा गया।
विकास वैभव की पुलिसिंग में वापसी
चर्चित IPS अधिकारी Vikas Vaibhav को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। वे पहले बिहार राज्य योजना परिषद में सलाहकार थे, लेकिन अब उन्हें फिर से पुलिसिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विकास वैभव 2023 में तत्कालीन डीजी शोभा अहोटकर के साथ विवाद को लेकर काफी चर्चा में रहे थे। विवाद के बाद उन्हें लंबे समय तक वेटिंग में रखा गया था।
प्रशासनिक मजबूती पर सरकार का फोकस
लगातार हो रहे प्रशासनिक फेरबदल को सरकार आगामी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों की तैयारी के रूप में देख रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, तकनीकी शिक्षा, पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था जैसे अहम विभागों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती से सरकार प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे तबादलों से सरकार अपने प्रशासनिक ढांचे को अधिक चुस्त और जवाबदेह बनाना चाहती है, खासकर ऐसे समय में जब बिहार में विकास परियोजनाओं, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर दबाव बढ़ रहा है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
