बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई रफ्तार, 783 तकनीकी कर्मियों की हुई पोस्टिंग

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बिहार में स्वास्थ्य विभाग ने 683 ओटी असिस्टेंट और 100 ईसीजी टेक्निशियन समेत 783 तकनीकी कर्मियों की सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पोस्टिंग की।

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना: बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) की अनुशंसा पर चयनित 783 तकनीकी कर्मियों की विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पदस्थापना कर दी गई है। इनमें 683 ओटी असिस्टेंट और 100 ईसीजी टेक्निशियन शामिल हैं। इन कर्मियों की नियुक्ति से सरकारी अस्पतालों में तकनीकी मानव संसाधन की कमी दूर होने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई इस पोस्टिंग के बाद मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों से लेकर जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और रेफरल अस्पतालों तक तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे ऑपरेशन थिएटर और ईसीजी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की संभावना है।

683 ओटी असिस्टेंट की हुई पदस्थापना

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कुल 683 ओटी असिस्टेंट को राज्य के अलग-अलग सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात किया गया है। इनमें 124 महिला और 559 पुरुष अभ्यर्थी शामिल हैं।

ओटी असिस्टेंट की जिम्मेदारी अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर से जुड़ी विभिन्न तकनीकी और सहायक व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इनकी नियुक्ति से सरकारी अस्पतालों में सर्जरी से संबंधित सेवाओं को सुचारु रूप से संचालित करने में मदद मिल सकती है।

प्रमुख संस्थानों की बात करें तो पीएमसीएच में 16, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 12, डीएमसीएच में 11 और जेएलएनएमसीएच भागलपुर में 20 ओटी असिस्टेंट की पदस्थापना की गई है।

100 ईसीजी टेक्निशियन को भी मिली पोस्टिंग

इसी तरह राज्य के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 100 ईसीजी टेक्निशियन की भी पदस्थापना की गई है। इनमें 42 महिला और 58 पुरुष अभ्यर्थी शामिल हैं।

ईसीजी टेक्निशियन अस्पतालों में हृदय संबंधी जांच और ईसीजी जांच की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके आने से मरीजों को समय पर जांच की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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ईसीजी टेक्निशियन में इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान, पटना में 15, पीएमसीएच में 6, एसकेएमसीएच में 4 और डीएमसीएच में 4 कर्मियों की पदस्थापना की गई है।

मेडिकल कॉलेज से लेकर सीएचसी तक तैनाती

783 तकनीकी कर्मियों को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित नहीं रखा गया है। उनकी पदस्थापना राज्य के विभिन्न स्तर के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में की गई है।

इनमें मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थान शामिल हैं।

इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में संचालित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में भी तकनीकी सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग का यह कदम मरीजों को उनके नजदीकी सरकारी संस्थानों में बेहतर जांच और उपचार संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

एनआईसी सॉफ्टवेयर से हुई पोस्टिंग

स्वास्थ्य विभाग ने नवपदस्थापित कर्मियों की पोस्टिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एनआईसी सॉफ्टवेयर के माध्यम से रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया अपनाई। विभाग के अनुसार, पोस्टिंग को मेरिट आधारित रखने के साथ-साथ विभिन्न वर्गों के अभ्यर्थियों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया।

दिव्यांग अभ्यर्थियों को यथासंभव उनके गृह जिले में पोस्टिंग देने का प्रयास किया गया है। वहीं महिला और पुरुष अभ्यर्थियों को उनकी मेरिट के अनुरूप नजदीकी जिलों में पदस्थापित करने की कोशिश की गई है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य पोस्टिंग को पारदर्शी बनाने के साथ-साथ अभ्यर्थियों को उचित संस्थान उपलब्ध कराना है।

एक महीने के भीतर करना होगा योगदान

नवपदस्थापित सभी तकनीकी कर्मियों को एक महीने के भीतर संबंधित स्वास्थ्य संस्थान में योगदान देना होगा। योगदान के समय उन्हें अपने मूल प्रमाण-पत्र भी प्रस्तुत करने होंगे।

संबंधित संस्थान के स्तर पर अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। विभाग ने संस्थानों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों की जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।

प्रमाण-पत्रों का सत्यापन पूरा होने के बाद संबंधित संस्थानों को तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजनी होगी। इससे नियुक्ति प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी स्टाफ की कमी होगी दूर

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के साथ-साथ तकनीकी कर्मियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ओटी असिस्टेंट और ईसीजी टेक्निशियन जैसे पदों पर पर्याप्त कर्मियों की उपलब्धता होने से अस्पतालों की रोजमर्रा की तकनीकी सेवाओं को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकता है।

विशेष रूप से ऑपरेशन थिएटर और हृदय संबंधी जांच से जुड़ी सेवाओं में तकनीकी कर्मियों की भूमिका अहम होती है। ऐसे में 783 कर्मियों की पोस्टिंग से अस्पतालों की कार्यक्षमता बढ़ने और मरीजों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने दी बधाई

स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने नवपदस्थापित तकनीकी कर्मियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इन कर्मियों की भूमिका राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण होगी।

मंत्री ने उम्मीद जताई कि सभी नवपदस्थापित कर्मी पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में काम करने वाले कर्मियों का सीधा जुड़ाव मरीजों से होता है, इसलिए उन्हें गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देना होगा।

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगा फायदा

कुल मिलाकर, 683 ओटी असिस्टेंट और 100 ईसीजी टेक्निशियन समेत 783 तकनीकी कर्मियों की पोस्टिंग बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम है। इन कर्मियों की तैनाती से अस्पतालों में तकनीकी मानव संसाधन मजबूत होगा और मरीजों को जांच एवं उपचार से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि नवपदस्थापित कर्मी निर्धारित समय के भीतर अपने-अपने संस्थानों में योगदान करते हैं और प्रमाण-पत्र सत्यापन की प्रक्रिया समय पर पूरी होती है या नहीं। यदि नई नियुक्तियां प्रभावी तरीके से जमीन पर लागू होती हैं, तो इसका सीधा लाभ सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों को मिल सकता है।

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Nishkarsh Bharat

पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट

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