पाकिस्तान से कनेक्शन में बिहार के 2 युवक गिरफ्तार, STF ने दबोचा, जानें पूरा मामला

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बिहार के दो युवक पाकिस्तान कनेक्शन में गिरफ्तार, STF कर रही जांच

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( नई दिल्ली)। बिहार के दो युवकों को पाकिस्तान तक कथित तौर पर संवेदनशील सुरक्षा सूचनाएं पहुंचाने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने यह कार्रवाई गुवाहाटी में की। पुलिस के मुताबिक, दोनों युवक कथित तौर पर पाकिस्तान के एक इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के संपर्क में थे और सुरक्षा बलों से जुड़ी जानकारी साझा किए जाने की आशंका है। मामले की जांच में केंद्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट की भी अहम भूमिका बताई जा रही है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के पूर्वी चंपारण के अभिषेक कुमार सिंह (31) और बेगूसराय के रीतेश सिंह (39) के रूप में हुई है। दोनों गुवाहाटी के सतगांव थाना क्षेत्र के गांधीनगर इलाके में किराये के मकान में रह रहे थे। गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब दोनों से पूछताछ कर कथित नेटवर्क और संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।

बिहार के दो युवकों पर क्या है आरोप?

असम पुलिस की STF के अनुसार, शुरुआती जांच में बिहार के अभिषेक कुमार सिंह के कथित तौर पर एक पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के संपर्क में होने की जानकारी मिली थी। पुलिस को संदेह है कि सुरक्षा बलों से संबंधित कुछ संवेदनशील सूचनाएं साझा की गईं।

हालांकि, जांच एजेंसियां जब्त सामग्री और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। ऐसे में आरोपों से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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पुलिस ने कार्रवाई सेना की खुफिया इकाई यानी मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिले शुरुआती इनपुट के आधार पर किए जाने की बात कही है। इसके बाद STF ने संदिग्ध गतिविधियों को लेकर जानकारी जुटाई और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

बिहार में परिवार और पृष्ठभूमि की भी जांच

दोनों आरोपियों के बिहार से संबंध होने के बाद स्थानीय स्तर पर भी जांच शुरू कर दी गई है। पूर्वी चंपारण के एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि देशविरोधी गतिविधियों के आरोप में एक युवक की गिरफ्तारी की जानकारी मिली है। स्थानीय पुलिस परिवार और उसकी पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी जुटा रही है।

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जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी बिहार से गुवाहाटी कब गए, वहां किस तरह रह रहे थे और उनके संपर्क किन लोगों से थे। साथ ही कथित तौर पर संवेदनशील सूचनाओं के आदान-प्रदान में उनकी भूमिका क्या थी, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

असम STF को कैसे मिला इनपुट?

पुलिस के मुताबिक, इस मामले की शुरुआती जानकारी सेना की मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिली थी। इनपुट में अभिषेक कुमार सिंह के कथित तौर पर पाकिस्तान के एक इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के संपर्क में होने की बात सामने आई थी।

इसके बाद असम STF ने मामले की जांच शुरू की। निगरानी और शुरुआती जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े सुराग मिलने के बाद कार्रवाई की गई। दोनों आरोपियों को गुवाहाटी के सतगांव थाना क्षेत्र से पकड़ा गया।

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पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बिहार के युवक कथित तौर पर किस तरह की जानकारी साझा की गई थी और वह किस माध्यम से भेजी गई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस मामले में इनके अलावा कोई और व्यक्ति शामिल है।

आरोपियों के पास से क्या मिला?

STF ने आरोपियों के कब्जे से एक मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड और कुछ दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, जब्त सामग्री की जांच की जा रही है। मोबाइल फोन और सिम कार्ड की तकनीकी जांच से आरोपियों के संपर्कों और कथित संचार की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद दस्तावेजों में किस तरह की जानकारी है और उनका कथित गतिविधियों से क्या संबंध है। फिलहाल पुलिस ने बरामद सामग्री के आधार पर किसी अंतिम निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है।

बिहार से जुड़े कनेक्शन पर एजेंसियों की नजर

मामले में बिहार के दो युवकों के नाम सामने आने के बाद उनकी स्थानीय पृष्ठभूमि की भी जांच की जा रही है। पूर्वी चंपारण और बेगूसराय में पुलिस स्तर पर संबंधित परिवारों और आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि दोनों युवक गुवाहाटी में किस उद्देश्य से रह रहे थे। पुलिस उनके रोजगार, संपर्कों, यात्रा और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच कर सकती है। इससे कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आने में मदद मिल सकती है।

असम के CM ने क्या कहा?

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने भी मामले को लेकर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को सुरक्षा संबंधी जानकारी मुहैया कराने के आरोप में सेना के एक जवान समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, गिरफ्तार सेना के सेवानिवृत्त जवान को अनुबंध के आधार पर दोबारा नियुक्त किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी केंद्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर की गई।

इस बयान के बाद मामले को सुरक्षा एजेंसियों के स्तर पर गंभीरता से जांचे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

जांच आगे बढ़ने के साथ खुलेंगे कई सवाल

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित तौर पर कौन-सी संवेदनशील जानकारी साझा की गई, किसे भेजी गई और इसके पीछे पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है। पुलिस बरामद मोबाइल, सिम कार्ड और दस्तावेजों की जांच के जरिए इन सवालों के जवाब तलाश रही है। साथ ही जांच एजेंसियों की नजर आरोपियों के संभावित संपर्कों पर भी है। अगर जांच में कोई नया कनेक्शन सामने आता है तो मामले का दायरा बढ़ सकता है।

बिहार से जुड़े दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब स्थानीय पुलिस भी उनके पुराने रिकॉर्ड और संपर्कों की जानकारी जुटा रही है। फिलहाल असम STF की जांच जारी है और बरामद सामग्री की तकनीकी जांच के बाद ही मामले में आगे की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट