प्रदेश में 10 के बाद साफ होगा मौसम, 18 जिलों में अलर्ट जारी

मौसम

बिहार में 18 जिलों में बारिश, आंधी और वज्रपात का यलो अलर्ट जारी है। मौसम विभाग के अनुसार 10 अक्टूबर के बाद मौसम साफ होने के आसार हैं।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार में मानसून की विदाई के बीच मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। राज्य के कई जिलों में बारिश, तेज हवा और वज्रपात की आशंका बनी हुई है। मौसम विभाग ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को 18 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं पटना, नालंदा, गया और नवादा समेत कई जिलों में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 10 अक्टूबर से बारिश और आंधी की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

अक्टूबर में मौसम का यह बदलाव ऐसे समय हो रहा है, जब दक्षिण-पश्चिम मानसून बिहार से धीरे-धीरे वापस लौट रहा है। ऐसे में एक तरफ बारिश का दौर कमजोर पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ कुछ मौसमी प्रणालियों के कारण राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बादल, गरज-चमक और तेज हवा की स्थिति बन रही है।

बिहार में मौसम का अलर्ट, इन जिलों में बारिश की आशंका

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 9 अक्टूबर को बिहार के 18 जिलों में आंधी, बारिश और वज्रपात की आशंका को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रभावित जिलों में सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सीवान, भोजपुर, बक्सर, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर शामिल हैं।

निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: जन सुराज का शक्ति प्रदर्शन:Dr. Rajnish Ranjan के नामांकन में पहुंचे PK, कोसी सीट पर बदला चुनावी गणित

इन जिलों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवा चल सकती है। मौसम में अचानक बदलाव का असर सामान्य जनजीवन और आवागमन पर भी पड़ सकता है। ऐसे में लोगों को मौसम संबंधी ताजा चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।

येलो अलर्ट का मतलब यह नहीं है कि संबंधित जिले के हर इलाके में बारिश होगी। इसका आशय संभावित मौसमी खतरे के प्रति सतर्क रहने से है। बारिश और वज्रपात की गतिविधियां स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर देखने को मिल सकती हैं।

10 अक्टूबर से बिहार के मौसम में राहत के आसार

मौसम विभाग के अनुसार 10 अक्टूबर से राज्य में बारिश और आंधी की गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं। 10 और 11 अक्टूबर के लिए जारी पूर्वानुमान में कोई व्यापक चेतावनी नहीं दी गई है। इससे संकेत मिलता है कि राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम धीरे-धीरे सामान्य हो सकता है।

इसे भी पढ़ें : प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले मौसम का यू-टर्न, 10 जिलों में होगी बारिश, अलर्ट जारी

हालांकि, मौसम साफ होने का अर्थ यह नहीं है कि आसमान हर जगह पूरी तरह बादलमुक्त रहेगा। कुछ इलाकों में बादलों की आवाजाही या छिटपुट बारिश हो सकती है। इसलिए अगले कुछ दिनों तक स्थानीय पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी होगा।

अगले पांच दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में भी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई गई है। राज्य के कई हिस्सों में तापमान 29 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। इससे दिन के समय हल्की गर्मी और कुछ स्थानों पर उमस महसूस हो सकती है।

पटना में कैसा रहेगा मौसम?

राजधानी पटना में बादल छाए रहने और कुछ इलाकों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। हालांकि, बारिश की गतिविधियों में कमी आने के बाद मौसम अपेक्षाकृत शुष्क होने की उम्मीद है।

पटना के अलावा नालंदा, गया, नवादा और शेखपुरा जैसे दक्षिण बिहार के जिलों में भी मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। यहां बारिश की संभावना उत्तर बिहार के कुछ प्रभावित इलाकों की तुलना में कम रह सकती है।

खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े

सुबह और शाम के समय मौसम में हल्का बदलाव महसूस हो सकता है, जबकि दिन में धूप निकलने पर गर्मी बनी रह सकती है। तापमान में किसी बड़े बदलाव का अनुमान नहीं होने के कारण फिलहाल अचानक ठंड बढ़ने के संकेत भी नहीं हैं।

बीते 24 घंटे में इन इलाकों में हुई बारिश

पिछले 24 घंटे के दौरान पटना, बेगूसराय, मधुबनी, अररिया, सुपौल, बगहा और समस्तीपुर समेत कई स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। वहीं, कैमूर में राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। बक्सर में सुबह के समय कोहरा छाए रहने की भी जानकारी सामने आई।

अलग-अलग जिलों में मौसम की इन परिस्थितियों से पता चलता है कि मानसून की वापसी के दौरान भी राज्य में एक जैसा मौसम नहीं है। कहीं बारिश हो रही है, तो कहीं तापमान अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है। कुछ इलाकों में सुबह के समय दृश्यता पर भी असर पड़ सकता है।

बिहार में मानसून की वापसी क्यों हो रही है धीमी?

दक्षिण-पश्चिम मानसून बिहार से चरणबद्ध तरीके से वापस लौट रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 8 अक्टूबर को महाराष्ट्र के शेष हिस्सों के साथ गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के कुछ हिस्सों तथा झारखंड और छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों से मानसून की वापसी दर्ज की गई।

मानसून की वापसी रेखा सुपौल, रांची, सुंदरगढ़, बरगढ़, बीजापुर, हैदराबाद, बेलगावी और पणजी से होकर गुजर रही थी। यह स्थिति बताती है कि मानसून की वापसी की प्रक्रिया पूर्वी भारत के आसपास के क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही है।

हालांकि, मानसून की वापसी के दौरान स्थानीय स्तर पर बारिश होना असामान्य नहीं है। वातावरण में मौजूद नमी और अलग-अलग ऊंचाइयों पर सक्रिय मौसमी प्रणालियां कुछ क्षेत्रों में बादल और बारिश की स्थिति पैदा कर सकती हैं।

साइक्लोनिक सर्कुलेशन से बदल रहा मौसम

मौसम में उतार-चढ़ाव के पीछे कई मौसमी प्रणालियां सक्रिय हैं। पूर्वोत्तर बिहार और आसपास के क्षेत्रों में समुद्र तल से लगभग 3.1 से 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके प्रभाव से झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ होते हुए तेलंगाना तक एक ट्रफ फैली हुई है।

इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर लगभग 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय बताया गया है। इन प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से बिहार के कुछ हिस्सों में नमी और बादलों की स्थिति बन रही है।

इसी वजह से मानसून की विदाई के दौर में भी बारिश, तेज हवा और वज्रपात की गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। इन प्रणालियों का प्रभाव कमजोर पड़ने पर मौसम अधिक शुष्क होने की संभावना है।

लगातार पांचवें साल सामान्य से कम बारिश

बिहार में बारिश के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राज्य में लगातार पांचवें साल सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इससे पहले वर्ष 2021 में सामान्य से लगभग 25 प्रतिशत अधिक बारिश हुई थी।

इस साल मानसून के दौरान करीब 36 दिन ही बारिश दर्ज होने की बात सामने आई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में लगभग 45 से 52 बरसात वाले दिन हो सकते हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मानकों के अनुसार किसी स्थान पर 24 घंटे के दौरान 2.5 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश होने पर उस दिन को आधिकारिक तौर पर बरसात वाला दिन माना जाता है। इस मानक के आधार पर बरसात वाले दिनों की संख्या बारिश की मौसमी स्थिति समझने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

कम बारिश का असर खेती, भूजल और जल उपलब्धता पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए जिलेवार वर्षा के आंकड़ों और कृषि परिस्थितियों को भी देखना जरूरी है।

बारिश और वज्रपात के दौरान बरतें सावधानी

मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। गरज-चमक शुरू होने पर खुले मैदान, खेत या ऊंचे स्थानों पर खड़े रहने से बचें। पेड़ के नीचे शरण लेना भी सुरक्षित विकल्प नहीं है। बिजली चमकने के दौरान सुरक्षित पक्के भवन या बंद वाहन के भीतर रहना बेहतर है।

तेज हवा और बारिश की स्थिति में कमजोर पेड़ों, बिजली के खंभों और लटकते तारों से दूरी बनाए रखें। किसानों और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले लोगों को स्थानीय मौसम चेतावनी के अनुसार अपनी गतिविधियां तय करनी चाहिए।

बिहार में मानसून की विदाई के साथ मौसम बदलने का दौर जारी है। 9 अक्टूबर को कई जिलों में बारिश और वज्रपात का खतरा बना हुआ है, जबकि 10 अक्टूबर से मौसम में राहत मिलने के आसार हैं। आने वाले दिनों में तापमान में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर बादल और छिटपुट बारिश की स्थिति बनी रह सकती है।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

You may have missed