बिहार में पूजा पंडालों पर सख्ती, 20 हजार पंडालों की होगी जांच, गड़बड़ी करने वालों की खैर नहीं
बिहार में दुर्गा पूजा से पहले 20 हजार पंडालों की जांच होगी। अग्नि सुरक्षा में कमी मिलने पर कार्रवाई और लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी दी गई है।
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार में दुर्गा पूजा के दौरान आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए अग्निशमन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की तैयारी की है। राज्य में इस बार करीब 20 हजार पूजा पंडाल बनाए गए हैं। इनमें लगभग 1500 बड़े पंडाल शामिल हैं। अग्निशमन विभाग शुक्रवार से पंडालों का निरीक्षण शुरू करेगा। इस दौरान आग से बचाव के इंतजाम, सुरक्षा मानकों और जरूरी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। नियमों में कमी मिलने पर संबंधित पंडाल के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर अनियमितता पाए जाने पर लाइसेंस रद्द करने तक का कदम उठाया जा सकता है।
त्योहार के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा पंडालों में पहुंचते हैं। ऐसे में बिजली की वायरिंग, सजावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, निकासी के रास्ते और आग बुझाने के उपकरणों की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग का उद्देश्य पूजा के दौरान किसी भी संभावित हादसे को रोकना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
बिहार में 20 हजार पूजा पंडालों की होगी जांच
अग्निशमन विभाग ने दुर्गा पूजा को देखते हुए राज्यभर में सुरक्षा तैयारियां तेज कर दी हैं। फायर डीआईजी मनोज कुमार नट के मुताबिक, जिलों को पूजा पंडालों की सुरक्षा के संबंध में एडवाइजरी भेजी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे तय मानकों के पालन की जांच करें और किसी भी कमी को नजरअंदाज न करें।
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राज्य में करीब 20 हजार पंडाल बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें लगभग 1500 बड़े पंडाल हैं, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक जुटने की संभावना रहती है। ऐसे पंडालों में सुरक्षा इंतजामों की जांच विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी।
निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि पंडालों में अग्नि सुरक्षा के जरूरी उपाय किए गए हैं या नहीं। जहां कमियां मिलेंगी, वहां नियमानुसार सुधार कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
पटना में पंडालों की सुरक्षा पर विशेष नजर
राजधानी पटना में भी अग्निशमन विभाग ने सुरक्षा को लेकर तैयारी की है। फायर डीआईजी मनोज कुमार नट के अनुसार, शहर में करीब 1500 पंडालों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है। इनमें लगभग 100 बड़े स्तर के पंडाल शामिल हैं।
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पटना में दुर्गा पूजा के दौरान अलग-अलग इलाकों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई पंडाल प्रमुख सड़कों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बनाए जाते हैं। ऐसे में आग लगने की स्थिति में दमकल वाहनों का मौके तक पहुंचना और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए शहर को चार जोन में बांटकर सुरक्षा की तैयारी की गई है। रणनीतिक स्थानों पर अग्निशमन की गाड़ियां तैनात रहेंगी, ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
चार जोन में होगी निगरानी, बनेगी अलग रेस्क्यू टीम
पटना में आग से बचाव और आपातकालीन प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए चार जोन के आधार पर व्यवस्था तैयार की गई है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात टीमों के बीच तालमेल बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर दमकल वाहनों को तेजी से भेजने में मदद मिल सकती है।
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फायर डीआईजी ने बताया कि इस बार अलग से रेस्क्यू टीम बनाई गई है। यह टीम विशेष रूप से बचाव कार्यों पर ध्यान देगी। आग लगने या किसी अन्य आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालना, फंसे हुए श्रद्धालुओं तक पहुंचना और राहत कार्य में सहयोग करना इसकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
भीड़भाड़ वाले पंडालों में किसी घटना के बाद भगदड़ जैसी स्थिति बनने का जोखिम भी रहता है। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था में आग बुझाने के साथ लोगों की सुरक्षित निकासी की तैयारी भी जरूरी है।
पंडालों में इन सुरक्षा इंतजामों की होगी जांच
निरीक्षण के दौरान अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पंडालों में बिजली के तारों की व्यवस्था, अस्थायी कनेक्शन, सजावट के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री और आग बुझाने के साधनों की उपलब्धता सुरक्षा के लिहाज से अहम हैं।

पंडाल के अंदर और बाहर आने-जाने के रास्ते खुले रहना भी जरूरी है। रास्तों में अवरोध होने से आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकालने में परेशानी हो सकती है। इसी तरह दमकल वाहनों के पहुंचने के लिए पर्याप्त जगह होना भी महत्वपूर्ण है।
हालांकि, निरीक्षण में किन-किन मानकों की जांच की जाएगी, इसका विस्तृत ब्योरा संबंधित विभागीय निर्देशों से स्पष्ट होगा। पंडाल समितियों को विभाग की एडवाइजरी और लागू नियमों के अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
जिलों से लगातार संपर्क में रहेगा कंट्रोल रूम
दुर्गा पूजा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल रूम बनाया गया है। इसके माध्यम से जिलों से लगातार संपर्क बनाए रखने और जरूरत के अनुसार सूचनाओं का आदान-प्रदान करने की योजना है। आवश्यकता पड़ने पर अस्थायी कंट्रोल रूम भी बनाए जा रहे हैं।
फायर डीआईजी के अनुसार, जिला स्तर पर तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। जिला अग्निशमन पदाधिकारियों यानी डीएफओ के साथ वर्चुअल बैठक कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया जा रहा है। राज्य स्तर से सभी जिलों को एडवाइजरी भेजी गई है।
पूजा के दौरान भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि किसी समस्या की जानकारी मिलने पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
सुरक्षा मानकों में कमी मिली तो हो सकती है कार्रवाई
अग्निशमन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पंडालों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा। निरीक्षण के दौरान गड़बड़ी मिलने पर संबंधित समिति को आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। नियमों के उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर लाइसेंस रद्द करने का कदम भी उठाया जा सकता है।
ऐसे में पूजा समितियों के लिए जरूरी है कि वे निरीक्षण से पहले सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर लें। केवल पंडाल की सजावट और रोशनी पर ध्यान देने के बजाय आग से बचाव और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था को भी प्राथमिकता दें।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी तैयारी
दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं समेत बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसलिए आयोजकों और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल मिले। लोगों को भी पंडालों में बिजली के खुले तारों, भीड़भाड़ वाले रास्तों और आग के संभावित स्रोतों के प्रति सतर्क रहना चाहिए।
बिहार में करीब 20 हजार पूजा पंडालों के निरीक्षण की तैयारी के बीच अब निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान रहेगा। पटना में चार जोन, दमकल वाहनों की तैनाती, अलग रेस्क्यू टीम और कंट्रोल रूम की व्यवस्था इसी तैयारी का हिस्सा हैं। निरीक्षण में सामने आने वाली कमियों पर कार्रवाई और समय रहते सुधार से त्योहार के दौरान जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
राज कुमार की रिपोर्ट
