ज्ञानेश कुमार पर PK का हमला, पूर्व CEC राजीव कुमार को भी घेरा, कही बड़ी बात
PK ने ज्ञानेश कुमार पर उठाए सवाल, चुनाव आयोग में सुधार की मांग
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर (PK) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग में व्यापक सुधार की मांग की है। उन्होंने पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के कार्यकाल पर भी टिप्पणी की और उनके रिटायरमेंट के बाद एचडीएफसी बैंक में चेयरमैन पद मिलने का जिक्र किया। प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का सवाल किसी एक व्यक्ति या घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले सात-आठ वर्षों के कामकाज से जुड़ा है।
8 अक्टूबर को दरभंगा में दिए गए बयान में PK ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है। ऐसे में चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
PK ने राजीव कुमार के कार्यकाल पर भी उठाए सवाल
PK ने कहा कि ज्ञानेश कुमार से पहले राजीव कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे और उनके कार्यकाल में भी चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर ऐसी ही स्थिति थी। उन्होंने राजीव कुमार की सेवानिवृत्ति के बाद एचडीएफसी बैंक में चेयरमैन पद पर नियुक्ति का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि चुनाव आयोग के प्रमुख पद पर रहने वाले अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के बाद निजी क्षेत्र में नियुक्तियों को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए।
PK का तर्क है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि मतदाताओं के मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा होता है, तो इससे पूरी व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
हालांकि, राजीव कुमार की नियुक्ति का उल्लेख करते हुए प्रशांत किशोर ने जो सवाल उठाए, वे उनकी राजनीतिक टिप्पणी हैं। इससे अपने आप किसी अधिकारी के कार्यकाल में पक्षपात या अनियमितता साबित नहीं होती।
चुनाव आयोग पर PK के गंभीर आरोप
PK ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची तैयार करने, चुनाव की तारीखें निर्धारित करने, आदर्श आचार संहिता लागू कराने और मतगणना जैसे विभिन्न चरणों में चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने बिहार में मतदाताओं को 10-10 हजार रुपये दिए जाने के आरोपों का भी जिक्र किया और दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया में सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचने की आशंका बनी हुई है।
निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: जन सुराज का शक्ति प्रदर्शन:Dr. Rajnish Ranjan के नामांकन में पहुंचे PK, कोसी सीट पर बदला चुनावी गणित
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव केवल मतदान कराने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मतदाताओं को यह भरोसा भी होना चाहिए कि उनके वोट की गिनती निष्पक्ष तरीके से होगी और सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिलेगा।
इसे भी पढ़ें : प्रशांत किशोर का जदयू को चैलेंज, कहा- नीतीश प्रचार करेंगे तो….वापस लेंगे नामांकन
इन आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। किसी चुनाव में अनियमितता या पक्षपात का निष्कर्ष संबंधित शिकायतों, दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है। प्रशांत किशोर के बयान को फिलहाल चुनाव आयोग के कामकाज पर उनकी राजनीतिक आलोचना के रूप में देखा जाना चाहिए।
PK ने रखीं चुनाव आयोग में सुधार की मांगें
PK ने केवल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तक अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और मतगणना व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई।
उनकी प्रमुख मांगों में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार, मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और मतगणना से पहले फॉर्म 17 को सार्वजनिक करना शामिल है। उन्होंने कहा कि चुनाव से जुड़े दस्तावेज और आंकड़े समय पर सार्वजनिक होने चाहिए, ताकि उम्मीदवारों और मतदाताओं को प्रक्रिया पर भरोसा रहे।

फॉर्म 17 चुनाव प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण दस्तावेजों से जुड़ा है। मतदान केंद्रों पर डाले गए मतों का लेखा-जोखा और उससे संबंधित रिकॉर्ड चुनावी पारदर्शिता के लिए अहम होते हैं। हालांकि, फॉर्म 17 के अलग-अलग हिस्सों का उद्देश्य अलग है। इसलिए किसी दस्तावेज को सार्वजनिक करने की मांग पर विचार करते समय निर्वाचन नियमों, मतदाताओं की गोपनीयता और चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
SIR विवाद पर क्यों बढ़ा राजनीतिक टकराव?
विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच विवाद तेज हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।
खबरें हमारे फेसबुक पर भी, लगातार खबरों के लिए फेसबुक से जुड़े
अक्टूबर के पहले सप्ताह में दिल्ली में INDIA गठबंधन के सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोका और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए गए आरोपों और उसके जवाबों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
INDIA गठबंधन की मांग क्या है?
INDIA गठबंधन के नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग उठाई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल किए हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी उठाई है।
विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची से जुड़े विवादों और शिकायतों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। वहीं, इस मुद्दे पर आगे की स्थिति चुनाव आयोग की कार्रवाई, न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित पक्षों के तर्कों पर निर्भर करेगी।
8 अक्टूबर को रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन और तेज हुए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ने भी 10 अक्टूबर से दिल्ली में प्रदर्शन की योजना बनाई है।
बिहार MLC चुनाव के बीच PK का बयान क्यों अहम?
बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना प्रस्तावित है। इनमें चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। जन सुराज पार्टी सभी आठ सीटों पर उम्मीदवार उतार रही है।

PK पहले ही दावा कर चुके हैं कि उनकी पार्टी पटना स्नातक और पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल करेगी। उन्होंने स्नातक मतदाताओं से रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की अपील भी की है। ऐसे में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उनका बयान बिहार के चुनावी माहौल में अतिरिक्त राजनीतिक महत्व रखता है।
PK का कहना है कि स्नातक और शिक्षक मतदाताओं को जाति और धर्म के बजाय उम्मीदवारों के काम तथा मुद्दों के आधार पर मतदान करना चाहिए। जन सुराज ने इन चुनावों में रोजगार और शिक्षकों से जुड़े सवालों को अपने अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाया है।
आगे क्या होगा?
PK के बयान ने चुनाव आयोग की भूमिका, अधिकारियों की नियुक्ति और मतदाता सूची में पारदर्शिता को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ विपक्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ बिहार में विधान परिषद चुनाव की तैयारियां जारी हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर क्या कदम उठाता है तथा विपक्ष अपनी मांगों को लेकर आगे क्या रणनीति अपनाता है। बिहार MLC चुनाव के दौरान भी ये मुद्दे राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने रह सकते हैं।
प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग में सुधार की मांग को अपने बयान का केंद्रीय विषय बनाया है। उनके आरोपों और विपक्ष की मांगों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित तथ्यों, आधिकारिक जवाबों और जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
राज कुमार की रिपोर्ट
