बिहार में विकास कार्यों की होगी सीधी निगरानी, CM सम्राट ने लॉन्च किया CMO डैशबोर्ड और समन्वय पोर्टल
बिहार के मुख्यमंत्री ने बेहतर गवर्नेंस के लिए CMO डैशबोर्ड और कोऑर्डिनेशन पोर्टल लॉन्च किया।
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक नई पहल की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को राजधानी पटना में CMO डैशबोर्ड और समन्वय पोर्टल (Samanvay Portal) का शुभारंभ किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में चल रही विकास योजनाओं की निगरानी को मजबूत करना, केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा सरकारी फंड के पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करना है।
नई व्यवस्था के माध्यम से बिहार में विकास कार्यों की प्रगति, सरकारी घोषणाओं के क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर चल रही परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं को लागू करने के दौरान आने वाली समस्याओं और असमंजस को दूर करने पर भी जोर दिया जाएगा। राज्य सरकार की इस पहल को प्रशासनिक कामकाज में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल और जवाबदेही बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
CM सम्राट ने लॉन्च किया पोर्टल, CMO डैशबोर्ड से विकास कार्यों की होगी सीधी निगरानी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा शुरू किए गए CMO डैशबोर्ड का उद्देश्य बिहार में संचालित विकास कार्यों की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाना है। इसके जरिए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की गई है।
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इस डैशबोर्ड के माध्यम से सरकारी घोषणाओं, स्वीकृत परियोजनाओं और जमीन पर चल रहे कार्यों की स्थिति पर नजर रखने में सहायता मिलेगी। इससे प्रशासनिक अधिकारियों के लिए योजनाओं की प्रगति का आकलन करना और आवश्यकतानुसार संबंधित विभागों से जानकारी प्राप्त करना आसान हो सकता है।
अक्सर विकास योजनाओं की घोषणा के बाद उनके क्रियान्वयन में देरी, विभागों के बीच समन्वय की कमी और प्रगति की जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं होने जैसी चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में डिजिटल डैशबोर्ड की मदद से इन समस्याओं की पहचान करने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, डैशबोर्ड पर उपलब्ध आंकड़ों की नियमितता, उनकी सटीकता और विभागों द्वारा समय पर जानकारी अपडेट करने की व्यवस्था इसकी प्रभावशीलता के लिए महत्वपूर्ण होगी।
समन्वय पोर्टल से केंद्र और बिहार सरकार के बीच बेहतर तालमेल
इस पहल का दूसरा प्रमुख हिस्सा समन्वय पोर्टल है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के कार्यान्वयन में बेहतर तालमेल स्थापित करना है।
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केंद्र प्रायोजित योजनाओं को जमीन पर लागू करने के लिए कई बार केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को मिलकर काम करना पड़ता है। अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियों, प्रक्रियाओं और कार्ययोजनाओं के बीच स्पष्टता नहीं होने से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हो सकती है।
समन्वय पोर्टल के माध्यम से ऐसी समस्याओं को कम करने और संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह भी है कि परियोजनाओं के कार्यान्वयन के दौरान किसी तरह का असमंजस नहीं रहे और योजनाओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाया जा सके।
इसके अतिरिक्त, सरकारी फंड के पारदर्शी उपयोग पर भी जोर दिया गया है। योजनाओं के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार हो और परियोजनाओं की प्रगति का उचित आकलन किया जा सके, इसके लिए निगरानी व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
थर्ड-पार्टी एजेंसी करेगी योजनाओं और रैंकिंग की समीक्षा
नई व्यवस्था के तहत योजनाओं के मूल्यांकन को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए स्वतंत्र आकलन पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार के साथ बिहार की रैंकिंग और विभिन्न योजनाओं की समीक्षा अब एक स्वतंत्र थर्ड-पार्टी एजेंसी के माध्यम से की जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य योजनाओं के प्रदर्शन और राज्य की स्थिति का निष्पक्ष आकलन करना है। किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा मूल्यांकन किए जाने से योजनाओं से जुड़े आंकड़ों, प्रगति और उपलब्धियों की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिल सकती है।

सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन केवल रिपोर्ट या विभागीय आंकड़ों के आधार पर करने के बजाय जमीनी स्तर पर उनके प्रभाव को समझना भी जरूरी होता है। स्वतंत्र एजेंसी की समीक्षा से यह पता लगाने में सहायता मिल सकती है कि योजनाओं का क्रियान्वयन तय लक्ष्यों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
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हालांकि, समीक्षा की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि एजेंसी का चयन किस प्रक्रिया से होता है, मूल्यांकन के मानक क्या निर्धारित किए जाते हैं और उसकी रिपोर्ट के आधार पर सुधारात्मक कदम कितनी तेजी से उठाए जाते हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर
बिहार में CMO डैशबोर्ड और समन्वय पोर्टल की शुरुआत ऐसे समय में हुई है, जब सरकारी योजनाओं की प्रभावी निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन प्रशासन की महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल हैं।
डिजिटल माध्यमों से योजनाओं की निगरानी करने से अधिकारियों को परियोजनाओं की स्थिति समझने, समस्याओं की पहचान करने और विभागीय समन्वय बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित हो सकती है।
लेकिन किसी भी डिजिटल व्यवस्था की सफलता केवल उसके शुभारंभ से सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए विभागों के बीच नियमित समन्वय, सही आंकड़ों की उपलब्धता, अधिकारियों की जवाबदेही और समय-समय पर समीक्षा जरूरी है।
बिहार के विकास कार्यों पर क्या पड़ेगा असर?
CMO डैशबोर्ड और समन्वय पोर्टल के जरिए राज्य सरकार विकास योजनाओं की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि इन प्लेटफॉर्म का नियमित और व्यवस्थित इस्तेमाल किया जाता है, तो योजनाओं में होने वाली देरी की पहचान करने, विभागीय बाधाओं को दूर करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिल सकती है।

समन्वय पोर्टल केंद्र और राज्य के बीच तालमेल सुधारने का माध्यम बन सकता है, जबकि CMO डैशबोर्ड राज्य में चल रही परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने में सहायक हो सकता है। स्वतंत्र एजेंसी द्वारा मूल्यांकन की व्यवस्था भी योजनाओं की वास्तविक स्थिति समझने में उपयोगी साबित हो सकती है।
इन व्यवस्थाओं का वास्तविक प्रभाव इनके संचालन, नियमित निगरानी और मूल्यांकन के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई डिजिटल पहल बिहार में विकास परियोजनाओं को कितनी गति देती है और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को किस हद तक मजबूत बनाती है।
राज कुमार की रिपोर्ट
