बिहार में चोरी के मोबाइल से 5 साल में 380 करोड़ की ठगी, पटना में 29 करोड़ रुपये की चपत
Bihar Mobile Theft Cyber Fraud
निष्कर्ष भारत संवाददाता- बिहार में मोबाइल चोरी की घटनाएं अब सिर्फ फोन गंवाने तक सीमित नहीं रह गई हैं। चोरी किए गए मोबाइल का इस्तेमाल बैंक खातों, यूपीआई और डिजिटल वॉलेट तक पहुंच बनाने के लिए किए जाने की आशंका साइबर अपराध की गंभीर तस्वीर पेश करती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच चोरी हुए मोबाइल से जुड़े बैंक खातों से करीब 380 करोड़ रुपये की निकासी हुई। इसमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि 2021 में जहां ऐसी निकासी 10 करोड़ रुपये बताई गई थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 147 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
मोबाइल चोरी और साइबर ठगी के इस गठजोड़ में पटना भी प्रभावित जिलों में शामिल है। वर्ष 2025 में राजधानी में चोरी हुए मोबाइल के जरिए साइबर ठगी से 29 करोड़ रुपये की निकासी का आंकड़ा सामने आया। वहीं, बिहार में मोबाइल चोरी के दर्ज मामलों की संख्या भी पांच वर्षों में बढ़कर 52,500 तक पहुंचने की बात कही गई है। ये आंकड़े मोबाइल की सुरक्षा और साइबर अपराध की रोकथाम को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
पांच साल में 14 गुना से ज्यादा बढ़ी रकम
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में चोरी हुए मोबाइल से जुड़े बैंक खातों से कथित निकासी की राशि हर साल बढ़ी है।
| वर्ष | अनुमानित निकासी |
|---|---|
| 2021 | 10 करोड़ रुपये |
| 2022 | 13 करोड़ रुपये |
| 2023 | 87 करोड़ रुपये |
| 2024 | 123 करोड़ रुपये |
| 2025 | 147 करोड़ रुपये |
इन आंकड़ों के अनुसार, 2021 के मुकाबले 2025 में रकम करीब 14.7 गुना हो गई। हालांकि, इन आंकड़ों को मोबाइल चोरी से सीधे जुड़े मामलों के अनुमान के रूप में ही समझना चाहिए। इनके संकलन की पद्धति और आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट होना जरूरी है।
बिहार में मोबाइल चोरी के मामले भी लगातार बढ़े
साइबर ठगी के साथ मोबाइल चोरी की घटनाओं में भी बढ़ोतरी दर्ज होने का दावा किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 में बिहार में मोबाइल चोरी के 28,400 मामले सामने आए थे। 2022 में यह संख्या 33,900, 2023 में 38,200 और 2024 में 46,700 हो गई। वर्ष 2025 में 52,500 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
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इस तरह पांच वर्षों में दर्ज मामलों की संख्या में करीब 85 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई है। वर्ष 2024 के मुकाबले 2025 में 5,800 अधिक मामले सामने आए। हालांकि, दर्ज मामलों की संख्या और वास्तविक घटनाओं की संख्या अलग हो सकती है, क्योंकि हर पीड़ित पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराता।
पटना में एक साल में 29 करोड़ रुपये की निकासी
राजधानी पटना में भी चोरी हुए मोबाइल से जुड़े साइबर फ्रॉड की रकम में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में इस तरह की निकासी 21 करोड़ रुपये थी। 2024 में यह बढ़कर 23 करोड़ रुपये और 2025 में 29 करोड़ रुपये हो गई।
यानी दो साल में निकासी की राशि में करीब 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2024 में पटना में मोबाइल चोरी के 7,450 मामले दर्ज होने का आंकड़ा दिया गया है, जो सूची में शामिल जिलों में सबसे अधिक है। इसके बाद गया में 3,980, मुजफ्फरपुर में 3,620 और भागलपुर में 3,210 मामले बताए गए हैं।
चोरी के मोबाइल का इस्तेमाल किन अपराधों में होता है?
उपलब्ध आंकड़ों में चोरी हुए मोबाइल के इस्तेमाल से जुड़े साइबर अपराधों की अलग-अलग श्रेणियां भी बताई गई हैं। इनमें यूपीआई और बैंकिंग फ्रॉड की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत, सोशल मीडिया हैकिंग की 22 प्रतिशत, लोन ऐप से जुड़ी ठगी की 18 प्रतिशत और फर्जी केवाईसी से संबंधित अपराधों की 15 प्रतिशत बताई गई है।
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एक अन्य अनुमान के अनुसार, चोरी हुआ मोबाइल कई अलग-अलग ठगी की घटनाओं में इस्तेमाल हो सकता है। कुछ मामलों में एक फोन से एक से पांच फ्रॉड, तो कुछ में छह से 20 या उससे अधिक घटनाएं किए जाने का दावा किया गया है।
हालांकि, इन प्रतिशतों और श्रेणियों का आधार स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन्हें आधिकारिक रूप से प्रमाणित राज्यव्यापी आंकड़ों के बजाय उपलब्ध रिपोर्ट में दिए गए अनुमान के तौर पर देखना चाहिए।
चोरी के फोन से साइबर अपराध तक कैसे पहुंचता है नेटवर्क?
मोबाइल चोरी से लेकर संभावित साइबर ठगी तक का नेटवर्क कई चरणों में काम कर सकता है। सबसे पहले भीड़भाड़ वाले बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में फोन चोरी किए जाते हैं। इसके बाद चोरी के फोन कम कीमत पर खरीदारों को बेचे जा सकते हैं या उनके पुर्जे अलग कर दिए जाते हैं।
कुछ मामलों में अपराधी फोन का लॉक तोड़ने, उसमें मौजूद जानकारी तक पहुंचने या डिवाइस की पहचान छिपाने की कोशिश कर सकते हैं। यदि फोन में बैंकिंग ऐप खुले हों, ईमेल या अन्य खातों का एक्सेस उपलब्ध हो अथवा स्क्रीन लॉक कमजोर हो, तो आर्थिक नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है।
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हालांकि, हर चोरी हुआ मोबाइल साइबर ठगी में इस्तेमाल नहीं होता। किसी विशेष फोन से ठगी हुई है या नहीं, इसका पता जांच और डिजिटल साक्ष्यों से ही लगाया जा सकता है।
मोबाइल ट्रैकिंग और रिकवरी में चुनौती
उपलब्ध आंकड़ों में बिहार में मोबाइल रिकवरी दर 2023 में 11 प्रतिशत, 2024 में 10.9 प्रतिशत और 2025 में 10.6 प्रतिशत बताई गई है। यदि ये आंकड़े संबंधित मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल खाते हैं, तो यह चोरी हुए फोन की बरामदगी में चुनौती की ओर संकेत करते हैं।
चोरी के बाद फोन बंद कर देना, दूसरे राज्यों में भेज देना और पहचान से जुड़ी जानकारी में छेड़छाड़ की कोशिश करना जांच को कठिन बना सकता है। ऐसे मामलों में पुलिस और साइबर सेल के बीच समन्वय, तकनीकी संसाधन और समय पर शिकायत अहम होते हैं।
मोबाइल चोरी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
मोबाइल चोरी होने पर सबसे पहले अपने टेलीकॉम ऑपरेटर से संपर्क करके सिम बंद करवाएं। बैंकिंग ऐप, ईमेल और सोशल मीडिया खातों के पासवर्ड बदलें तथा बैंक को सूचित कर संदिग्ध लेनदेन पर नजर रखें।
भारत सरकार के संचार साथी पोर्टल पर चोरी या खोए मोबाइल को ब्लॉक कराने की सुविधा उपलब्ध है। पुलिस में शिकायत दर्ज कर मोबाइल का IMEI नंबर और खरीद से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें। यदि खाते से पैसे निकल गए हों, तो तुरंत 1930 पर साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत करें और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी जानकारी दें।
बिहार में मोबाइल चोरी और साइबर अपराध के बीच संभावित संबंध को रोकने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ आम लोगों की सतर्कता भी जरूरी है। फोन में मजबूत स्क्रीन लॉक रखें, बैंकिंग ऐप और ईमेल को सुरक्षित करें और OTP, UPI PIN या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। मोबाइल चोरी होने के बाद जितनी जल्दी कार्रवाई होगी, नुकसान सीमित करने और जांच में मदद मिलने की संभावना उतनी बेहतर होगी।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
