दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों को तोहफा, 78 दिन का बोनस मंजूर, जानें 3 बड़े फैसले

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रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस, अधिकतम ₹17,951; पेंशन में भी बदलाव

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( नई दिल्ली)। दिवाली और त्योहारों से पहले केंद्र सरकार ने रेलवे कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 में रेलवे कर्मचारियों के प्रदर्शन को देखते हुए 78 दिन के प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (पीएलबी) को मंजूरी दी है। इस फैसले से करीब 11.40 लाख पात्र गैर-राजपत्रित रेलवे कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। बोनस भुगतान पर सरकार के लगभग 2,009.61 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रत्येक पात्र कर्मचारी को अधिकतम 17,951 रुपये मिल सकते हैं।

रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाला यह बोनस उनकी उत्पादकता और कामकाज में योगदान के आधार पर दिया जाता है। सरकार का कहना है कि इस प्रोत्साहन से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और रेलवे की परिचालन क्षमता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं में भी बदलावों को मंजूरी दी है। इनमें दिव्यांग पेंशन की पात्रता में संशोधन और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को पांच साल तक जारी रखना शामिल है।

कर्मचारियों को कितना मिलेगा बोनस? समझें पूरा हिसाब

रेलवे कर्मचारियों के लिए घोषित बोनस की अधिकतम राशि 17,951 रुपये निर्धारित है। इसकी गणना के लिए अधिकतम मासिक वेतन सीमा 7,000 रुपये मानी जाती है। इसी आधार पर 78 दिन के बोनस की रकम निकाली जाती है।

गणना के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सूत्र है:

7,000 × 12 × 78 ÷ 365 = लगभग 17,951 रुपये।

यह अधिकतम देय राशि है। प्रत्येक कर्मचारी को इतनी ही रकम मिले, यह जरूरी नहीं है। वास्तविक भुगतान कर्मचारी की पात्रता और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

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इस बोनस के दायरे में ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, स्टेशन मास्टर, तकनीशियन, तकनीशियन हेल्पर, पॉइंट्समैन, पर्यवेक्षक और अन्य पात्र ग्रुप सी कर्मचारी शामिल हैं। रेलवे की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, इस साल करीब 11.40 लाख कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।

कर्मचारियों के बोनस के पीछे रेलवे का रिकॉर्ड प्रदर्शन

सरकार ने बोनस को रेलवे कर्मचारियों की बेहतर कार्यक्षमता और प्रदर्शन से जोड़कर देखा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रेलवे ने 1,670 मिलियन टन माल की ढुलाई की, जो उस वर्ष का रिकॉर्ड रहा। इस दौरान रेलवे से लगभग 7.41 अरब यात्रियों ने सफर किया।

रेलवे देश में यात्री परिवहन के साथ-साथ माल ढुलाई का भी प्रमुख साधन है। कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न और दूसरे जरूरी सामान की ढुलाई में इसकी अहम भूमिका रहती है। ऐसे में परिचालन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।

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सरकार का मानना है कि बोनस से कर्मचारियों को बेहतर काम करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। त्योहारों से पहले मिलने वाली यह अतिरिक्त राशि कर्मचारियों के घरेलू खर्च और खरीदारी में भी मददगार हो सकती है।

दिव्यांग पेंशन में बदलाव, जन्म से मिल सकेगा लाभ

कैबिनेट के दूसरे महत्वपूर्ण फैसले में दिव्यांग पेंशन योजना की पात्रता में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत बेंचमार्क दिव्यांगता की सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। इसके अलावा, पेंशन के लिए न्यूनतम आयु की शर्त को जन्म से पात्रता के रूप में बदलने की मंजूरी दी गई है। इससे पात्रता की शर्तें पूरी करने वाले अधिक दिव्यांग लोगों को योजना में शामिल करने का रास्ता खुलेगा।

नई व्यवस्था के अनुसार, 0 से 79 वर्ष की आयु के पात्र लाभार्थियों को 375 रुपये प्रतिमाह और 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लाभार्थियों को 625 रुपये प्रतिमाह सहायता दी जाएगी।

यह बदलाव दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में निर्धारित बेंचमार्क दिव्यांगता की अवधारणा के अनुरूप है। हालांकि, पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता राशि लागू करने से संबंधित विस्तृत दिशानिर्देश सरकार की ओर से जारी किए जाने हैं। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, इन्हें तीन महीने के भीतर जारी कर लागू करने की योजना है।

इस फैसले का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाना है, ताकि पात्र दिव्यांग लोगों को आर्थिक सहायता मिल सके। लाभ पाने के लिए संबंधित नियमों और दस्तावेजों की शर्तें पूरी करना जरूरी होगा।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम पांच साल तक जारी रहेगा

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम यानी एनएसएपी को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इस अवधि में योजना पर कुल 53,428 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को इससे लाभ मिलेगा।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत पात्र बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग लोगों को पेंशन सहायता दी जाती है। इसके अलावा, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार में मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर पात्र परिवार को राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना के तहत आर्थिक सहायता दी जाती है। अन्नपूर्णा योजना के माध्यम से पात्र ऐसे बुजुर्गों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने का प्रावधान भी है, जिन्हें वृद्धावस्था पेंशन का लाभ नहीं मिलता।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी। इसका उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को बुनियादी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। यह संविधान के अनुच्छेद 41 में वर्णित नीति-निर्देशक सिद्धांतों से जुड़ा है और कार्यक्रम के लिए वित्तीय सहायता केंद्र सरकार उपलब्ध कराती है।

इंदिरा गांधी के नाम वाली पेंशन योजनाओं के नाम बदलेंगे

कैबिनेट ने सामाजिक सहायता कार्यक्रम और इससे जुड़ी योजनाओं के नाम बदलने को भी मंजूरी दी है। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना किया जाएगा। इसी तरह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना होगा।

राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना को प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना के नाम से जाना जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बुजुर्गों और विधवाओं की पेंशन योजनाएं तथा परिवार लाभ योजना मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी।

तीन फैसलों का आम लोगों पर क्या होगा असर?

कैबिनेट के इन फैसलों का असर अलग-अलग वर्गों पर पड़ेगा। रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन के बोनस से त्योहारों के समय अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी। वहीं, दिव्यांग पेंशन की पात्रता सीमा घटने और न्यूनतम आयु की शर्त में बदलाव से अधिक लोगों को योजना के दायरे में लाने की संभावना है।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को पांच साल तक जारी रखने से बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांग लोगों और पात्र जरूरतमंद परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का मौजूदा ढांचा बना रहेगा।

हालांकि, दिव्यांग पेंशन में संशोधित नियमों का वास्तविक लाभ पात्रता संबंधी दिशानिर्देश लागू होने के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल रेलवे बोनस की मंजूरी और सामाजिक सहायता योजनाओं में बदलाव केंद्र सरकार के तीन प्रमुख फैसलों के रूप में सामने आए हैं।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

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