नालंदा में शराब तस्करों ने सिपाही को मारी गोली, मौत से इलाके में मची सनसनी

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नालंदा में शराब तस्करों की फायरिंग, ड्यूटी पर तैनात सिपाही अजीत कुमार की मौत

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( नालंदा)। बिहार के नालंदा जिले में शराब तस्करों का पीछा कर रही उत्पाद विभाग की टीम पर फायरिंग का मामला सामने आया है। इस घटना में ड्यूटी पर तैनात सिपाही अजीत कुमार (30) की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि शराब तस्करों को पकड़ने के लिए चल रही कार्रवाई के दौरान पावापुरी-गिरियक इलाके में हाईवे पर गोलीबारी हुई।

नालंदा में इस दौरान सिपाही के सिर में गोली लग गई। गंभीर रूप से घायल अजीत कुमार को पहले नालंदा पावापुरी स्थित भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया, जहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) रेफर किया गया। इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना के बाद उत्पाद विभाग और जिला पुलिस की टीमों ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी है। ड्यूटी के दौरान सिपाही की मौत से पुलिस महकमे में शोक है, वहीं इलाके में सनसनी फैल गई है।

नालंदा में शराब तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान फायरिंग

नालंदा उत्पाद विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पटना मुख्यालय की एक्साइज इंटेलिजेंस ब्यूरो (ईआईबी) को गुप्त सूचना मिली थी कि झारखंड से शराब की बड़ी खेप बिहार लाई जा रही है। सूचना के मुताबिक, शराब से लदा एक वाहन नवादा जिले के खराट मोड़ की ओर से आगे बढ़ रहा था। इसके बाद पटना से आई ईआईबी टीम ने राजगीर उत्पाद विभाग के सब-इंस्पेक्टर और स्थानीय टीम के साथ मिलकर तस्करों को पकड़ने की योजना बनाई।

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नालंदा टीम ने संदिग्ध वाहन को रोकने के लिए पीछा शुरू किया। अधिकारियों के मुताबिक, वाहन को रोकने की कोशिश के दौरान तस्कर निर्धारित रास्ते से आगे बढ़ने के बजाय फ्लाईओवर के नीचे वाली सड़क से निकलने लगे। इसी बीच एक काले रंग की स्कॉर्पियो तेजी से भागती दिखाई दी। पुलिस टीम ने उसका पीछा शुरू किया।

इसी दौरान पीछे की ओर से आ रहे हमलावरों ने अचानक फायरिंग कर दी। गोली नालंदा उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत कुमार के सिर में लगी। अचानक हुई गोलीबारी से टीम में अफरातफरी मच गई। साथी पुलिसकर्मियों ने घायल सिपाही को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।

पावापुरी से पीएमसीएच रेफर, इलाज के दौरान मौत

गोली लगने के बाद अजीत कुमार को पावापुरी स्थित भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उनका प्राथमिक उपचार किया, लेकिन सिर में गोली लगने के कारण उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई थी। बेहतर इलाज के लिए उन्हें तत्काल पटना के पीएमसीएच रेफर किया गया।

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परिजनों और विभागीय अधिकारियों के लिए उम्मीद उस समय टूट गई, जब इलाज के दौरान सिपाही ने दम तोड़ दिया। नालंदा घटना के बाद शव का पोस्टमॉर्टम पटना में कराए जाने की जानकारी सामने आई है।

अजीत कुमार की मौत की खबर से उनके परिवार में मातम छा गया। वह महज 30 वर्ष के थे और कुछ साल पहले ही मद्य निषेध विभाग में सिपाही के पद पर बहाल हुए थे। ड्यूटी के दौरान इस तरह उनकी जान चले जाने से सहकर्मियों और परिचितों में शोक है।

नालंदा के रहने वाले थे अजीत कुमार, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक सिपाही अजीत कुमार नालंदा जिले के हिलसा क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनका संबंध नगरनौसा प्रखंड के नगमा गांव से भी बताया गया है। उनके पिता मदन कुमार झारखंड पुलिस में दारोगा के पद पर कार्यरत थे और वर्ष 2025 में सेवानिवृत्त हुए थे।

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अजीत कुमार तीन भाइयों में मंझले थे। करीब चार वर्ष पहले उनकी नियुक्ति मद्य निषेध विभाग में सिपाही के पद पर हुई थी। नौकरी में आने के बाद वह शराबबंदी कानून के पालन और अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने से जुड़ी कार्रवाई में अपनी भूमिका निभा रहे थे।

परिवार के लिए यह घटना बेहद दुखद है। जिस बेटे से परिवार को भविष्य की उम्मीदें थीं, उसकी ड्यूटी के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों के बीच शोक का माहौल है।

झारखंड से लाई जा रही थी शराब की खेप, ईआईबी को मिली थी सूचना

उत्पाद अधीक्षक संजय कुमार चौधरी के अनुसार, विभाग को सूचना मिली थी कि झारखंड की ओर से एक पिकअप वाहन में शराब की खेप लाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर टीम ने संभावित रास्तों पर निगरानी बढ़ाई और संदिग्ध वाहन को रोकने का प्रयास किया।

उत्पाद थानाध्यक्ष नीतीश कुमार ने बताया कि कार्रवाई पटना से आई विशेष ईआईबी टीम के नेतृत्व में की जा रही थी। इसमें राजगीर उत्पाद विभाग और स्थानीय टीम के अधिकारी तथा जवान शामिल थे।

हालांकि, घटना के दौरान अलग-अलग वाहनों और उनके पीछा करने के क्रम को लेकर सामने आई जानकारियों का विस्तृत मिलान जांच में किया जाना जरूरी है। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि गोली किस वाहन से चलाई गई, उसमें कितने लोग सवार थे और हमलावरों का शराब तस्करी के नेटवर्क से क्या संबंध है। जांच में संदिग्ध वाहनों की पहचान, घटनास्थल के आसपास उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अहम हो सकते हैं।

हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी, हाईवे पर नाकेबंदी

सिपाही की मौत के बाद उत्पाद विभाग और स्थानीय जिला पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई तेज कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। हाईवे और आसपास के रास्तों पर नाकेबंदी कर संदिग्ध वाहनों की जांच की जा रही है।

पुलिस के सामने अब दोहरी चुनौती है। पहली, सिपाही पर गोली चलाने वाले अपराधियों को गिरफ्तार करना और दूसरी, शराब की खेप के स्रोत तथा तस्करी में शामिल लोगों का पता लगाना। यदि मामले में संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है, तो उसके नेटवर्क की भी जांच की जा सकती है।

घटना ने शराबबंदी कानून लागू कराने वाली टीमों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। तस्करों को पकड़ने के दौरान पुलिस और उत्पाद विभाग के जवानों को कई बार जोखिम उठाना पड़ता है। ऐसे अभियानों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, समन्वय और संदिग्ध वाहनों को रोकने की रणनीति महत्वपूर्ण होती है।

बिहार में शराब तस्करी पर कार्रवाई के बीच बड़ी चुनौती

बिहार में शराबबंदी कानून लागू है और अवैध शराब की बिक्री, परिवहन तथा भंडारण के खिलाफ उत्पाद विभाग लगातार कार्रवाई करता है। इसके बावजूद दूसरे राज्यों से शराब लाने की कोशिशें कानून लागू कराने वाली एजेंसियों के लिए चुनौती बनी रहती हैं।

नालंदा की घटना में सिपाही की मौत ने इस चुनौती को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब जांच के जरिए यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि तस्करी में कौन लोग शामिल थे और गोलीबारी की घटना किस परिस्थिति में हुई।

फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है। अजीत कुमार की मौत से उनके परिवार और विभाग में शोक का माहौल है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि पुलिस कितनी जल्दी हमलावरों को गिरफ्तार करती है और शराब तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा कर पाती है।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट

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