बिना परमिट वाहन चलाने पर बिहार में नया नियम, 30 की जगह अब 7 दिन का जुर्माना, जानें नया अपडेट
बिहार में बिना परमिट वाहन चलाने पर जुर्माने की अवधि 30 से घटाकर 7 दिन हुई। जानें DTO के निर्देश और लंबित परमिट जारी कराने की प्रक्रिया।
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार में बिना वैध परमिट के वाहन चलाने वाले वाहन मालिकों को राहत मिली है। राज्य परिवहन प्राधिकार ने अवैध परिचालन के लिए जुर्माना लगाने की अधिकतम अवधि 30 दिनों से घटाकर सात दिन कर दी है। राज्य परिवहन आयुक्त कार्यालय, पटना की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, अब संबंधित वाहनों से अधिकतम सात दिनों की अवधि के आधार पर ही अर्थदंड वसूला जाएगा। इससे उन वाहन मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके खिलाफ बिना परमिट वाहन चलाने के मामले में पहले लंबी अवधि का जुर्माना निर्धारित किया गया था।
इस फैसले के बाद परिवहन विभाग ने सभी जिला परिवहन पदाधिकारियों (DTO) को नए निर्देश का पालन करने को कहा है। जिन वाहनों पर पहले सात दिनों से अधिक अवधि के लिए जुर्माना लगाने का निर्देश दिया गया था, उनके मामलों में भी अब अधिकतम सात दिनों के हिसाब से वसूली की जाएगी। हालांकि, इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि बिना परमिट वाहन चलाने की अनुमति मिल गई है। वाहन मालिकों को संबंधित नियमों के अनुसार वैध परमिट लेना होगा और परिवहन कानूनों का पालन करना होगा।
बिहार में वाहन परमिट नियम में क्या बदला?
बिहार में पहले बिना वैध परमिट चलने वाले वाहनों के पिछले 30 दिनों के परिचालन की जांच कर जुर्माना लगाने की व्यवस्था के तहत कार्रवाई की जा रही थी। संबंधित अधिकारियों को यह देखने का निर्देश दिया गया था कि वाहन कितने समय से बिना आवश्यक परमिट के परिचालित हो रहा है। इसी आधार पर अवैध परिचालन की अवधि के लिए अर्थदंड वसूलने की प्रक्रिया अपनाई जा रही थी।
हालांकि, वाहन मालिकों ने इस व्यवस्था के तहत लगने वाले जुर्माने को लेकर राहत देने का अनुरोध किया था। इसके बाद राज्य परिवहन प्राधिकार ने मामले पर विचार किया और जुर्माना निर्धारित करने की अधिकतम अवधि 30 दिनों से घटाकर सात दिन कर दी।
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नए निर्देश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पहले से सात दिनों से अधिक अवधि के लिए जुर्माना निर्धारित किए गए मामलों में भी वसूली अधिकतम सात दिनों के हिसाब से की जाएगी। इस तरह बदलाव का लाभ केवल नए मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि पहले से कार्रवाई का सामना कर रहे संबंधित वाहन मालिकों को भी मिल सकता है।
वाहन मालिकों को कैसे मिलेगी राहत?
इस फैसले से उन वाहन मालिकों को राहत मिलने की संभावना है, जिनके वाहनों के खिलाफ बिना परमिट परिचालन को लेकर लंबी अवधि का जुर्माना लगाया गया था। पहले 30 दिनों तक की अवधि के आधार पर कार्रवाई होने से कुछ मामलों में देय राशि अधिक हो सकती थी। अब गणना की अधिकतम अवधि सात दिन निर्धारित होने से संबंधित मामलों में वसूली सीमित रहेगी।
हालांकि, प्रत्येक वाहन पर लागू होने वाली वास्तविक राशि उसके मामले, संबंधित नियमों और जारी आदेश के अनुसार निर्धारित होगी। इसलिए सभी वाहन मालिकों के लिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि जुर्माना एक निश्चित समान रकम ही होगा। उन्हें अपने वाहन से संबंधित आदेश और परिवहन कार्यालय के रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए।
परिवहन विभाग के इस कदम को वाहन मालिकों की ओर से मांगी गई राहत के बाद लिया गया फैसला बताया गया है। इसका उद्देश्य जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया में निर्धारित अवधि को सीमित करना है। इसके बावजूद बिना परमिट वाहन चलाने के मामले में विभाग की कार्रवाई समाप्त नहीं हुई है।
बिना परमिट वाहन चलाने पर कानून क्या कहता है?
मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 192A बिना आवश्यक परमिट वाहन चलाने से संबंधित है। इस प्रावधान के तहत परमिट के बिना या परमिट की शर्तों के उल्लंघन में वाहन का इस्तेमाल करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। बिहार में जुर्माना अवधि घटाने का नया निर्देश इस कानूनी व्यवस्था के तहत होने वाली कार्रवाई के संदर्भ में समझना चाहिए।
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यहां वाहन मालिकों के लिए एक बात समझना जरूरी है। जुर्माना लगाने की अधिकतम अवधि घटने और कानून के तहत निर्धारित शास्ति की राशि में बदलाव होने के बीच अंतर है। बिहार के नए आदेश की खबरों में मुख्य बदलाव 30 दिनों के बजाय सात दिनों के आधार पर वसूली तक सीमित बताया गया है। इसलिए केवल इस आदेश के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि बिना परमिट वाहन चलाने पर लागू कानूनी शास्ति भी कम कर दी गई है।
कानून के तहत लागू राशि और अपराध की श्रेणी की पुष्टि संबंधित परिवहन कार्यालय से करना उचित होगा। खासकर दोबारा उल्लंघन के मामलों में वाहन मालिकों को नवीनतम कानूनी प्रावधानों की जानकारी लेनी चाहिए।
बिहार परिवहन विभाग ने DTO को क्या निर्देश दिया?
राज्य परिवहन आयुक्त कार्यालय ने सभी जिला परिवहन पदाधिकारियों को नए निर्देश के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। जिन वाहनों के खिलाफ सात दिनों से अधिक अवधि का जुर्माना वसूलने का निर्देश पहले जारी किया गया था, उनसे अधिकतम सात दिनों के हिसाब से ही अर्थदंड वसूलने की व्यवस्था लागू करनी है।
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इसका मतलब है कि संबंधित जिला परिवहन कार्यालयों को पुराने निर्देशों के तहत लंबित मामलों की समीक्षा करते समय नए आदेश को ध्यान में रखना होगा। वाहन मालिक अपने वाहन से संबंधित जुर्माने की स्थिति और देय राशि के बारे में संबंधित DTO या निबंधन प्राधिकार के कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

वाहन मालिकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि केवल जुर्माने की अवधि में राहत मिलने से परमिट अपने आप जारी नहीं हो जाता। इसके लिए विभाग की ओर से निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी और जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।
जुर्माना जमा करने के बाद परमिट जारी करने की प्रक्रिया
निर्देश के अनुसार, संबंधित वाहन मालिकों को जुर्माने की राशि संबंधित निबंधन प्राधिकार के कार्यालय में जमा करनी होगी। इसके बाद भुगतान का प्रमाण राज्य परिवहन प्राधिकार, बिहार के कार्यालय में भी जमा करना होगा। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद लंबित परमिट जारी करने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकेगी।
इसलिए जिन वाहन मालिकों के परमिट लंबित हैं, उन्हें भुगतान की रसीद और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। राशि जमा करने से पहले संबंधित कार्यालय से यह स्पष्ट कर लेना उपयोगी होगा कि उनके मामले में कितनी राशि देय है और परमिट जारी कराने के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी।
यदि किसी वाहन पर पहले से सात दिनों से अधिक अवधि के लिए जुर्माना लगाया गया है, तो वाहन मालिक नए आदेश के तहत लागू राशि की समीक्षा कराने के संबंध में संबंधित परिवहन अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
वाहन मालिक इन बातों का रखें ध्यान
बिहार में जुर्माने की अवधि कम होने से राहत जरूर मिली है, लेकिन वाहन मालिकों को वैध परमिट के बिना परिचालन जारी नहीं रखना चाहिए। परमिट वाहन के प्रकार, उपयोग और निर्धारित मार्ग या क्षेत्र के अनुसार आवश्यक हो सकता है। इसलिए वाहन का व्यावसायिक या परिवहन संबंधी इस्तेमाल करने से पहले उसकी वैधता की जांच करना जरूरी है।
वाहन मालिकों को परमिट की अवधि समाप्त होने से पहले नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। परमिट से संबंधित आवेदन लंबित होने पर भी संबंधित कार्यालय से यह पता कर लेना चाहिए कि वाहन को परिचालित करने की अनुमति है या नहीं। केवल आवेदन जमा कर देना हर स्थिति में वैध परमिट का विकल्प नहीं माना जा सकता।
नए निर्देश के बाद अब जिला परिवहन कार्यालयों में सात दिनों की अधिकतम अवधि के आधार पर जुर्माने की वसूली की जानी है। इससे प्रभावित वाहन मालिकों को अपने मामले की स्थिति स्पष्ट कराने और लंबित परमिट जारी कराने की प्रक्रिया पूरी करने में मदद मिल सकती है।
बिहार सरकार के परिवहन तंत्र की ओर से उठाए गए इस कदम में वाहन मालिकों को जुर्माने की अवधि के मामले में राहत दी गई है। लेकिन बिना परमिट वाहन चलाने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान बना हुआ है। इसलिए वाहन मालिकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे संबंधित आदेश के अनुसार देय राशि जमा करें, भुगतान का प्रमाण सुरक्षित रखें और वैध परमिट प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी करें।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
