कोलकाता भगदड़ के बाद सीएम सम्राट के कार्यक्रम रद्द, नीतीश ने कई मंदिरों में की पूजा

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कोलकाता पूजा पंडाल भगदड़ के बाद सम्राट चौधरी ने कार्यक्रम रद्द किए। नीतीश कुमार ने पटना के मंदिरों में पूजा की, बिहार में महाष्टमी पर उमड़ी भीड़।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना के बाद बिहार में भी सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। हादसे में 19 लोगों की मौत की खबर के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महाष्टमी पर अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए। उन्हें पटना के कई दुर्गा पूजा पंडालों और मंदिरों में जाना था। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने महाष्टमी के अवसर पर पटना के विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना की और माता का आशीर्वाद लिया।

इधर, बिहार के अलग-अलग जिलों में महाष्टमी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। गयाजी में 2100 कन्याओं का सामूहिक पूजन किया गया, जबकि मुंगेर की प्रसिद्ध बड़ी दुर्गा के दरबार में भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं। कोलकाता की घटना को ध्यान में रखते हुए कुछ स्थानों पर भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

सम्राट चौधरी ने क्यों रद्द किए महाष्टमी के कार्यक्रम?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी महाष्टमी के दिन पटना के कई मंदिरों और पूजा पंडालों में जाने वाले थे। हालांकि, कोलकाता के पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना और 19 लोगों की मौत की खबर के बाद उन्होंने अपने दिनभर के कार्यक्रम रद्द कर दिए। इस घटना ने दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में जुटने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

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त्योहार के समय पूजा पंडालों में लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में प्रवेश और निकास के रास्ते खुले रखना, भीड़ को नियंत्रित करना और आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाना प्रशासन के लिए अहम हो जाता है। बिहार में भी पूजा स्थलों पर उमड़ रही भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

नीतीश कुमार ने पटना के शीतला और काली मंदिर में की पूजा

महाष्टमी पर नीतीश कुमार पटना के अगमकुआं स्थित शीतला मंदिर पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने माता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। पूजा के बाद उन्होंने माता को चढ़ाई गई चुनरी भी धारण की। इसके बाद नीतीश कुमार बांसघाट स्थित काली मंदिर पहुंचे और वहां भी पूजा की।

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नवरात्र के आठवें दिन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। भक्त माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना कर रहे हैं। महाष्टमी पर व्रत रखने वाले श्रद्धालु फलाहार करते हैं और विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना करते हैं।

गयाजी में 2100 कन्याओं का सामूहिक पूजन

महाष्टमी के अवसर पर गयाजी में 2100 कन्याओं के सामूहिक पूजन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में नगालैंड के राज्यपाल और बिहार विधानसभा के अध्यक्ष भी शामिल हुए। नवरात्र में कन्या पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और भोजन कराकर आशीर्वाद लिया जाता है।

वहीं, पटना में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की छात्राओं ने चैतन्य देवियों का रूप धारण कर जीवंत देवी दरबार सजाया। छात्राओं की इस प्रस्तुति को देखने के लिए भी लोगों की रुचि बनी रही। धार्मिक आयोजनों के साथ शहर के कई इलाकों में सजे पूजा पंडाल श्रद्धालुओं और दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं।

मुंगेर की बड़ी दुर्गा में उमड़ी भीड़, अलग-अलग कतारें

मुंगेर की प्रसिद्ध बड़ी दुर्गा के दरबार में महाष्टमी पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। कोलकाता की भगदड़ के बाद प्रशासन ने यहां पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की, ताकि दर्शन के दौरान भीड़ एक जगह जमा न हो और लोगों की आवाजाही सुचारु बनी रहे।

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श्रद्धालु कतारों में आगे बढ़कर मां दुर्गा के दर्शन कर रहे हैं। धार्मिक स्थलों पर भीड़ बढ़ने के साथ व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। अलग-अलग कतारें, प्रवेश और निकास के रास्तों का प्रबंधन तथा जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाने जैसे कदम भगदड़ के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

महाष्टमी पर मां महागौरी की पूजा का महत्व

नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की आराधना से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और वैवाहिक जीवन में सुख की कामना की जाती है। भक्त माता से शारीरिक, मानसिक और सांसारिक कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

महाष्टमी पर कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और फलाहार करते हैं। मंदिरों में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और देवी दर्शन का सिलसिला चलता है। नवरात्र के अंतिम दिनों में पूजा पंडालों में भीड़ और बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए श्रद्धालुओं से कतारों में रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील महत्वपूर्ण है।

पटना में भव्य पूजा पंडाल, ट्रैफिक रूट में बदलाव

पटना में बोरिंग रोड, बेली रोड और एतवारपुर समेत कई इलाकों में आकर्षक पूजा पंडाल बनाए गए हैं। एतवारपुर में पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार किया गया है। इसकी ऊंचाई 121 फीट और चौड़ाई 120 फीट बताई गई है। इसे तैयार करने में करीब 80 कारीगरों ने काम किया।

डाकबंगला चौराहे पर खजुराहो मंदिर की थीम पर पंडाल बनाया गया है। वहीं, बोरिंग कैनाल रोड स्थित हिमगिरी चौराहे के पास शिवलिंग के आकार का पंडाल आकर्षण का केंद्र बना है। इसकी ऊंचाई करीब 100 फीट और लंबाई लगभग 150 मीटर बताई गई है।

पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पटना में यातायात मार्गों में बदलाव किया गया है। लोगों को सलाह है कि घर से निकलने से पहले अपने रास्ते की जानकारी लें, निर्धारित मार्गों का उपयोग करें और भीड़ वाले स्थानों पर धैर्य बनाए रखें।

शनिवार को सम्राट चौधरी ने भद्रकाली मंदिर में की थी पूजा

महाष्टमी से एक दिन पहले शनिवार को नवरात्र के सातवें दिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भद्रकाली मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की थी। इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की गई। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी जगदेव पथ पर मां दुर्गा के दर्शन किए थे।

नवरात्र के अंतिम चरण में बिहार के मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है। ऐसे में कोलकाता की घटना के बाद सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन का महत्व और बढ़ गया है। पूजा का उत्साह बना रहे, इसके लिए आयोजकों और प्रशासन के बीच समन्वय तथा श्रद्धालुओं का सतर्क रहना जरूरी है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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