ग्वालियर में भीषण हादसा, ट्रक की चपेट में आने से 15 श्रद्धालुओं की मौत, ड्राइवर और मालिक गिरफ्तार
ग्वालियर हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत, ट्रक चालक-मालिक गिरफ्तार
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( ग्वालियर)। ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास शनिवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। चीनौर रोड पर ढलान से बेकाबू होकर उतरे धान से भरे ट्रक ने दर्शन के लिए सड़क किनारे कतार में खड़े श्रद्धालुओं को कुचल दिया। हादसे में 15 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। घायलों में दो पुलिसकर्मी भी शामिल बताए गए हैं। दुर्घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, वहीं मृतकों के परिजन अस्पताल और पोस्टमॉर्टम केंद्र के बाहर जुट गए।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ट्रक चालक मोबाइल पर गूगल मैप की मदद से रास्ता खोज रहा था। ढलान पर पहुंचने के बाद ट्रक के ब्रेक फेल होने की बात सामने आई है। हालांकि, हादसे के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर जांच जरूरी है। पुलिस ने ट्रक चालक और मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं।
ग्वालियर में कैसे हुआ भीषण हादसा?
जानकारी के अनुसार, हादसा रात करीब 1:30 बजे चीनौर रोड पर शीतला माता मंदिर के पास हुआ। श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए सड़क किनारे कतार में खड़े थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर अनियंत्रित हो गया। बताया जा रहा है कि ढलान काफी तीखा था और ट्रक के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया।
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बेकाबू ट्रक पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ता हुआ श्रद्धालुओं की भीड़ में घुस गया और मंदिर की बाहरी दीवार तथा गेट से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मंदिर की दीवार ढह गई। कई लोग मलबे में दब गए, जबकि आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।
ग्वालियर हादसे में गूगल मैप और रास्ते को लेकर सवाल
प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि ट्रक चालक मोबाइल पर गूगल मैप चलाकर रास्ते पर आगे बढ़ रहा था। ट्रक में धान लदा था और बताया गया है कि वाहन पंजाब की ओर जा रहे थे। आरोप है कि नेविगेशन के निर्देशों के आधार पर ट्रक मंदिर के पीछे वाले रास्ते पर पहुंच गया।
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स्थानीय जानकारी के अनुसार, शीतला माता मंदिर में नौ दिनों तक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहता है। ऐसे में इस मार्ग पर भारी वाहन कैसे पहुंचे और उन्हें रोकने के लिए क्या इंतजाम थे, यह जांच का अहम विषय है। हालांकि, केवल गूगल मैप को हादसे का कारण मानना अभी जल्दबाजी होगी। ट्रक की तकनीकी स्थिति, ब्रेक फेल होने की वजह, वाहन के वजन और प्रतिबंधित रास्ते पर प्रवेश सहित सभी पहलुओं की जांच जरूरी है।
ग्वालियर में घायल ने बताया, ट्रक घसीटते हुए ले गया
हादसे में घायल थाटीपुर निवासी अभिषेक का पैर टूट गया। उसने बताया कि वह हाथ-पैर धो रहा था, तभी सामने से ट्रक आया और उसे घसीटते हुए ले गया। अभिषेक के मुताबिक, एक व्यक्ति ने उसे ढूंढकर बाहर निकाला, जिससे उसकी जान बच सकी।
हादसे के बाद कई घायलों और उनके परिजनों ने भयावह मंजर का जिक्र किया। एक घायल के परिजन गजेंद्र प्रजापति ने बताया कि उनका साला मंदिर पर दुकान लगाता है और अस्पताल में भर्ती है। उनके मुताबिक, घायल ने बताया कि दुर्घटना के वक्त कुछ समझ नहीं आया और चारों तरफ धुआं दिखाई दे रहा था।
ग्वालियर हादसे के बाद अस्पताल में हंगामा
दुर्घटना के बाद घायलों को जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतकों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए। मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉक्टरों के अनुसार, कई शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल लोगों का इलाज जारी था। अधिकारियों की ओर से घायलों की संख्या और मृतकों के आंकड़े अलग-अलग समय पर बताए गए, इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़े की पुष्टि जरूरी है।
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पोस्टमॉर्टम केंद्र के बाहर बड़ी संख्या में परिजन जमा हो गए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के पहुंचने पर कुछ लोगों ने नाराजगी जताई और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। परिजनों का सवाल था कि जिस रास्ते पर साइकिल ले जाना भी मुश्किल बताया जा रहा है, वहां भारी ट्रक कैसे पहुंच गया। घटना के बाद रास्ते पर निगरानी और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।
एक महिला ने आरोप लगाया कि उसके 19 वर्षीय बेटे गौरव की सांसें चल रही थीं, लेकिन उसे पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने को कहा गया। महिला का दावा है कि वह बेटे को निजी अस्पताल ले जाना चाहती थी, लेकिन एंबुलेंस को वहां से जाने के लिए मजबूर किया गया, जिससे इलाज में देरी हुई। यह परिजन का आरोप है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
ग्वालियर हादसे पर प्रशासनिक कार्रवाई
हादसे में लापरवाही के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को हटाने के निर्देश दिए। इसके अलावा आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। इनमें झांसी रोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव, आंतरी थाना प्रभारी गीतेश शर्मा, झांसी रोड ट्रैफिक थाना प्रभारी अभिषेक रघुवंशी, निरीक्षक यातायात राघवेंद्र जादौन, प्रधान आरक्षक सुशील द्विवेदी और आरक्षक किशन खन्ना, अनिल जैतपुरिया तथा पवन सेंगर शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने मृतकों की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों के साथ है और घायलों का इलाज निशुल्क कराया जाएगा। प्रशासन की ओर से घायलों के उपचार की व्यवस्था की गई है। अब हादसे की जांच के साथ यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रतिबंधित मार्ग पर ट्रक कैसे पहुंचा और दुर्घटना से पहले सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।
राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जताया दुख
ग्वालियर हादसे पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दुख जताया। सिंधिया ने श्रद्धालुओं की मौत पर शोक व्यक्त किया और घटना को पीड़ादायक बताया। राहुल गांधी ने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
इस हादसे ने धार्मिक स्थलों के आसपास भारी वाहनों की आवाजाही, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच में यदि सुरक्षा या निगरानी संबंधी लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल, प्रभावित परिवारों के लिए सबसे बड़ी जरूरत घायलों का बेहतर इलाज और हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
