टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में कौन-कौन गिरफ्तार? अबतक 10 पकड़े गए, ताबड़तोड़ छापेमारी जारी
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में 10 गिरफ्तार, जानें सभी आरोपियों के नाम
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (मुंबई)। मुंबई में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इस सनसनीखेज घटना की जांच में अब तक कुल 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें तीन कथित शूटर, हथियार उपलब्ध कराने के आरोपी, दो महिलाएं और अन्य संदिग्ध शामिल हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हथियार कहां से आए, आरोपियों ने घटना को अंजाम देने की योजना कैसे बनाई और इसके पीछे कौन लोग थे।
टाइगर श्रॉफ मामले में हाल ही में समीर और जतिन की गिरफ्तारी के बाद आरोपियों की कुल संख्या 10 पहुंच गई है। पुलिस के अनुसार, इन दोनों पर कथित तौर पर हथियारों की व्यवस्था करने और अन्य आरोपियों की मदद करने से जुड़ी भूमिका की जांच की जा रही है। इससे पहले तीन कथित शूटरों को राजस्थान के कोटा से पकड़ा गया था। वहीं, हथियारों की आपूर्ति और परिवहन से जुड़े अन्य संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में गिरफ्तार 10 आरोपी कौन हैं?
पुलिस जांच मामले में अब तक सामने आए नामों में ऋतिक कुमार उर्फ रोशन, रेहान, फूल सिंह, कुणाल, सुमित, राधा, बबीता, अंकित उर्फ राजेश, जतिन और समीर शामिल हैं। पुलिस इन सभी की भूमिका अलग-अलग पहलुओं से जांच रही है। हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोपों को अदालत में साबित होना अभी बाकी है।
ऋतिक कुमार उर्फ रोशन, रेहान और फूल सिंह
टाइगर श्रॉफ मामले में तीन कथित शूटरों की गिरफ्तारी सबसे अहम मानी जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, ऋतिक कुमार उर्फ रोशन का संबंध बिहार के बेगूसराय से बताया गया है, जबकि रेहान और फूल सिंह हरियाणा के सोनीपत से जुड़े बताए जा रहे हैं।
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इन तीनों को राजस्थान के कोटा में ट्रेन से पकड़े जाने के बाद मुंबई पुलिस की हिरासत में सौंपा गया। पुलिस ने अदालत में आरोपियों से पूछताछ, हथियारों की बरामदगी और कथित साजिश की जांच के लिए हिरासत मांगी थी। अदालत ने तीनों को 31 अक्टूबर 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजा।
कुणाल और सुमित पर हथियार जुटाने का आरोप
टाइगर श्रॉफ मामले की जांच के दौरान कुणाल और सुमित के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों पर कथित तौर पर अमृतसर से हथियार और गोलियां हासिल करने का आरोप है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हथियार किससे लिए गए और उन्हें मुंबई तक पहुंचाने की व्यवस्था किसने की।
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पुलिस को संदेह है कि हथियारों की खरीद और परिवहन की प्रक्रिया में कई लोगों ने अलग-अलग स्तर पर भूमिका निभाई। ऐसे में कुणाल और सुमित से पूछताछ के जरिए हथियारों की आपूर्ति से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है।
राधा और बबीता की भूमिका की जांच
टाइगर श्रॉफ मामले में राधा और बबीता नाम की दो महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने हथियारों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हथियारों को किस तरीके से मुंबई लाया गया और आरोपियों के बीच संपर्क कैसे स्थापित हुआ। पुलिस कथित परिवहन व्यवस्था, भुगतान और अन्य लोगों के साथ उनके संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।
हालांकि, दोनों महिलाओं की भूमिका और उन पर लगाए गए आरोपों के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
अंकित उर्फ राजेश पर भी पुलिस की नजर
टाइगर श्रॉफ मामले में अंकित उर्फ राजेश का नाम भी सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, वह हरियाणा के सोनीपत से जुड़ा है। पुलिस उसकी कथित गतिविधियों और अन्य आरोपियों के साथ संपर्क की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या उसने घटना से पहले मुंबई में रहकर किसी तरह की रेकी की थी और क्या उसे घटना से संबंधित जानकारी थी। इन पहलुओं की पुष्टि के लिए पुलिस संबंधित साक्ष्यों और संपर्कों की पड़ताल कर रही है।
जतिन और समीर की गिरफ्तारी से क्या खुलासा होगा?
हाल में गिरफ्तार किए गए जतिन और समीर से पुलिस को हथियारों की व्यवस्था और कथित नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
जतिन पर आरोप है कि वह कुणाल और सुमित के साथ अमृतसर गया था, जहां से कथित तौर पर हथियार हासिल किए गए। वहीं, समीर पर आरोपियों के साथ संपर्क बनाए रखने और कथित शूटरों की मदद करने की भूमिका की जांच हो रही है।
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पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तीनों कथित शूटर मुंबई में कहां ठहरे थे, उनके रहने की व्यवस्था किसने की और क्या उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए ठिकाने बदले थे। इन सवालों के जवाब से घटना की योजना और उसके पीछे मौजूद लोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
टाइगर श्रॉफ पर कब और कहां हुई थी फायरिंग?
यह घटना 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, टाइगर श्रॉफ फुटबॉल खेलने के बाद वहां से अपनी कार से निकल रहे थे। इसी दौरान बाइक सवार हमलावरों ने उनकी कार पर गोलियां चलाईं।
फायरिंग में अभिनेता टाइगर श्रॉफ सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आसपास के सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों की मदद से आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की।

घटना के कुछ समय बाद तीन कथित शूटरों को राजस्थान के कोटा में पकड़ा गया। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और हथियारों की आपूर्ति से जुड़े अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी भी हुई।
हथियार कहां से आए, किसने बनाई पूरी योजना?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल हथियारों की आपूर्ति और कथित साजिश को लेकर है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार किसने उपलब्ध कराए, उन्हें मुंबई तक पहुंचाने में किन लोगों ने मदद की और हमलावरों को निर्देश कौन दे रहा था।
जांच एजेंसियां आरोपियों के बीच संपर्क, संभावित वित्तीय लेन-देन और घटना से पहले उनकी गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं। इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फायरिंग के पीछे वास्तविक मकसद क्या था और क्या इस घटना में अन्य लोग भी शामिल थे।
अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी जांच में महत्वपूर्ण प्रगति है, लेकिन केवल गिरफ्तारियों के आधार पर पूरे मामले का खुलासा मान लेना जल्दबाजी होगी। हथियारों की बरामदगी, डिजिटल साक्ष्य और आरोपियों से पूछताछ के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में आगे क्या होगा?
मुंबई पुलिस की जांच अब कथित शूटरों से आगे बढ़कर हथियारों की आपूर्ति, आरोपियों के संपर्कों और घटना के पीछे की योजना पर केंद्रित है। पुलिस को यह भी स्पष्ट करना होगा कि प्रत्येक आरोपी की वास्तविक भूमिका क्या थी और क्या सभी के बीच कोई संगठित संपर्क था।
फिलहाल इस मामले में 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच जारी है। आने वाले दिनों में पुलिस की पूछताछ, संभावित बरामदगी और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस केवल हमलावरों और हथियार पहुंचाने वालों तक पहुंचेगी, या इस कथित नेटवर्क के पीछे मौजूद अन्य लोगों की पहचान भी सामने आएगी। जांच पूरी होने और अदालत में आरोप साबित होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
