दुनिया के टॉप 10 म्यूजियम में बिहार म्यूजियम, एशिया में नंबर-1
Bihar Museum Ranking 2026: दुनिया में 9वां, एशिया में नंबर-1
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। राजधानी पटना स्थित बिहार म्यूजियम ने वैश्विक रैंकिंग में शानदार उपलब्धि हासिल की है। साल 2026 की जारी रैंकिंग में बिहार म्यूजियम को दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों में नौवां स्थान मिला है। वहीं, एशिया के संग्रहालयों में इसे पहला स्थान दिया गया है। इस उपलब्धि से बिहार के पर्यटन और सांस्कृतिक क्षेत्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
यह रैंकिंग जर्मनी के म्यूनिख से संपादित होने वाली अंतरराष्ट्रीय यात्रा मार्गदर्शिका और पत्रिका ‘वर्थ अ जर्नी’ की ओर से प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, रैंकिंग तैयार करने के लिए 140 से अधिक देशों के 3,700 से ज्यादा पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद अलग-अलग श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ स्थलों की सूची तैयार की गई। संग्रहालय श्रेणी में बिहार म्यूजियम का नौवां स्थान हासिल करना राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
Bihar Museum को क्यों मिली वैश्विक पहचान?
पटना स्थित बिहार म्यूजियम को उसकी आधुनिक वास्तुकला, ऐतिहासिक संग्रह और विशिष्ट कलाकृतियों के लिए पहचान मिली है। यह संग्रहालय बिहार के अतीत, कला और सांस्कृतिक विकास को एक ही परिसर में समझने का अवसर देता है। यहां प्राचीन मूर्तियों, सिक्कों, पांडुलिपियों और लोक कलाओं के जरिए राज्य की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया गया है।
संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए इसे गौरवपूर्ण बताया। वैश्विक रैंकिंग में बेहतर स्थान मिलने से बिहार म्यूजियम की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ने और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का आकर्षण बढ़ने की उम्मीद है।
बिहार ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण राज्य रहा है। प्राचीन सभ्यताओं, शिक्षा के केंद्रों, धार्मिक परंपराओं और कला-संस्कृति की विरासत को देखते हुए यहां पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। ऐसे में बिहार म्यूजियम को मिली यह पहचान राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
पाषाण काल से आधुनिक युग तक की विरासत
बिहार म्यूजियम की खासियत यह है कि यहां राज्य के इतिहास और सांस्कृतिक विकास को विभिन्न दीर्घाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। पर्यटक यहां पाषाण काल से लेकर आधुनिक दौर तक की ऐतिहासिक यात्रा को समझ सकते हैं। प्राचीन मूर्तियां, ऐतिहासिक सिक्के, पांडुलिपियां और पारंपरिक कलाकृतियां बिहार के अतीत की झलक दिखाती हैं।
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इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोगों के साथ विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए भी यह संग्रहालय महत्वपूर्ण है। यहां प्रदर्शित वस्तुओं के जरिए बिहार की कला, सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में जानकारी मिलती है।
संग्रहालय का उद्देश्य केवल पुरानी वस्तुओं को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराना भी है। यही वजह है कि यह स्थान शैक्षणिक भ्रमण और पारिवारिक पर्यटन के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
आधुनिक वास्तुकला और चिल्ड्रेंस गैलरी भी खास
बिहार म्यूजियम को उसकी आधुनिक वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। विशाल परिसर, खुले आंगन और अलग-अलग विषयों पर आधारित दीर्घाएं इसे अन्य संग्रहालयों से अलग पहचान देती हैं। यहां मौजूद चिल्ड्रेंस गैलरी बच्चों को इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का माध्यम है। वहीं, क्षेत्रीय लोक कला गैलरी के जरिए बिहार की पारंपरिक कला और स्थानीय सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को समझने का अवसर मिलता है।
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संग्रहालय में लघु ऐतिहासिक फिल्मों के माध्यम से भी बिहार की विरासत से परिचित कराया जाता है। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ऐतिहासिक संग्रह का यह संयोजन पर्यटकों के अनुभव को अधिक रोचक बनाता है।
घूमने जाने से पहले जान लें जरूरी बातें
बिहार म्यूजियम की सभी दीर्घाओं और कलाकृतियों को आराम से देखने के लिए करीब चार से पांच घंटे का समय रखना उपयोगी हो सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सामान्य प्रवेश टिकट की कीमत 100 रुपये बताई गई है। पहचान पत्र प्रस्तुत करने पर विद्यार्थियों को आधे शुल्क में प्रवेश मिलने की जानकारी भी दी गई है।
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संग्रहालय सोमवार को आम लोगों और पर्यटकों के लिए बंद रहता है। हालांकि, प्रवेश शुल्क, विद्यार्थियों के लिए छूट और खुलने-बंद होने के समय में बदलाव संभव है। इसलिए यहां जाने से पहले संग्रहालय की आधिकारिक जानकारी से इन विवरणों की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
बिहार पर्यटन को मिल सकता है बढ़ावा
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों की सूची में नौवां स्थान और एशिया में पहला स्थान मिलना बिहार म्यूजियम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे पटना को सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में बढ़ावा मिलने की संभावना है। साथ ही, बिहार आने वाले पर्यटक राज्य की ऐतिहासिक विरासत को करीब से जानने के लिए संग्रहालय को अपने यात्रा कार्यक्रम में शामिल कर सकते हैं।
यह उपलब्धि बिहार की पहचान को केवल प्राचीन इतिहास तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ जोड़ती है। आने वाले समय में बेहतर प्रचार और पर्यटन सुविधाओं के जरिए बिहार म्यूजियम देश-विदेश के अधिक पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
