राहुल गांधी की संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट में हंगामा, CJI ने वकील को लगाई फटकार

राहुल गांधी

1. राहुल गांधी पर संपत्ति के आरोप, सुप्रीम कोर्ट में वकील की दलील पर CJI ने जताई नाराजगी

निष्कर्ष भारत, संवाददाता–दिल्ली– कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से जुड़े कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अहम घटनाक्रम सामने आया। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने की मांग कर रहे एक वकील की दलीलों पर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या वकील ने इस मुद्दे को उठाने से पहले किसी न्यूज चैनल से सलाह ली है। सीजेआई ने कहा कि इस मुद्दे को उठाने के पीछे कोई स्पष्ट आधार नजर नहीं आता।

यह मामला राहुल गांधी की संपत्ति की जांच से जुड़ा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को आरोपों की जांच से संबंधित कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। शीर्ष अदालत ने जांच एजेंसियों को हाई कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करने से भी रोक दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

मंगलवार को सुनवाई के दौरान एक वकील ने राहुल गांधी से जुड़े संपत्ति मामले का उल्लेख करते हुए इसे तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की। वकील ने दावा किया कि राहुल गांधी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि वह ED और CBI के करीब 200 अधिकारियों के संपर्क में हैं। इसी दावे का हवाला देकर वकील ने सुप्रीम कोर्ट से मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया।

इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने वकील की दलील पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या इस मुद्दे को उठाने के लिए किसी न्यूज चैनल से सलाह ली गई है। सीजेआई की टिप्पणी का आशय था कि अदालत में किसी मामले को उठाने के पीछे ठोस कानूनी आधार होना चाहिए, न कि मीडिया में सुर्खियां बटोरने की मंशा।

सीजेआई ने मामले को उठाने के आधार पर भी सवाल खड़े किए। सुनवाई के दौरान उनकी टिप्पणी से स्पष्ट हुआ कि अदालत किसी मामले को सूचीबद्ध करने की मांग पर विचार करते समय उसके कानूनी आधार और प्रासंगिकता को महत्व देती है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक

राहुल गांधी की संपत्ति से जुड़ा मामला इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में पहुंचा था। मई 2026 में हाई कोर्ट ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के संबंध में CBI और ED को निर्देश दिए थे। इसके बाद राहुल गांधी ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

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17 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट को आगे की कार्यवाही स्थगित रखने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने CBI और ED को भी हाई कोर्ट के समक्ष जांच से संबंधित रिपोर्ट दाखिल नहीं करने को कहा। अदालत ने शिकायतकर्ता एस. विग्नेश शिशिर, CBI और ED से जवाब भी मांगा था।

सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने हाई कोर्ट की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि राहुल गांधी को सुने बिना जांच एजेंसियों को निर्देश देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। शीर्ष अदालत ने भी इस बात पर जोर दिया था कि अदालतों को निर्देश जारी करते समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।

BJP कार्यकर्ता की शिकायत से शुरू हुआ मामला

राहुल गांधी की संपत्ति को लेकर विवाद की शुरुआत कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता ने कांग्रेस नेता की संपत्ति और उनकी आय के ज्ञात स्रोतों को लेकर आरोप लगाए थे। इसके बाद मामले की जांच कराने की मांग करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया गया।

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हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने मामले की सुनवाई को दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग भी की थी। उनका पक्ष था कि मामले की प्रक्रिया और जांच एजेंसियों को दिए गए निर्देशों पर न्यायिक समीक्षा की आवश्यकता है।

हालांकि, संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोपों को अभी सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और आरोपों की सत्यता पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

CBI और ED की भूमिका पर भी उठे थे सवाल

अगस्त में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी सवाल किए थे। अदालत ने पूछा था कि यदि आरोप गंभीर हैं, तो एजेंसियों ने अपने स्तर पर क्या कार्रवाई की है और क्या उन्हें जांच के लिए अदालत के निर्देश की जरूरत थी।

शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जांच एजेंसियां कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती हैं, लेकिन अदालत की ओर से कोई निर्देश जारी करते समय संबंधित पक्षों को सुनने और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने का सवाल महत्वपूर्ण है।

अब आगे क्या होगा?

मंगलवार की सुनवाई में सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद राहुल गांधी से जुड़े इस मामले पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, वकील की ओर से मामले को सूचीबद्ध कराने की मांग और कथित बयान के आधार पर सुनवाई की मांग को राहुल गांधी के खिलाफ आरोपों पर किसी नए न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

फिलहाल, आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़ी मुख्य कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट के पहले के अंतरिम आदेश लागू हैं। आगे की स्थिति अदालत के निर्देशों और संबंधित पक्षों के जवाबों पर निर्भर करेगी। मामले में अंतिम निर्णय आने तक आरोपों और न्यायिक रूप से स्थापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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