IIT पटना के रजिस्ट्रार AK ठाकुर पर आरक्षण-विरोधी टिप्पणी का आरोप, जांच शुरू, निष्कर्ष भारत ने पहले उठाया था मुद्दा
IIT पटना के रजिस्ट्रार AK ठाकुर पर आरक्षण-विरोधी सोशल मीडिया पोस्ट का आरोप लगा है। निदेशक अमित पात्रा ने जांच की पुष्टि की, ठाकुर ने आरोप नकारे।
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) पटना के रजिस्ट्रार अवलेन्द्र के. ठाकुर सोशल मीडिया पर कथित आरक्षण-विरोधी टिप्पणियों को लेकर विवादों में हैं। संस्थान को इस मामले में फैकल्टी सदस्यों और अधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से शिकायतें मिली हैं। आरोप है कि ठाकुर के सोशल मीडिया अकाउंट से आरक्षण की नीति और दलित समुदाय से संबंधित टिप्पणियां की गई थीं। हालांकि, रजिस्ट्रार ने इन पोस्ट को फर्जी और छेड़छाड़ करके तैयार किया गया बताया है। संस्थान के निदेशक अमित पात्रा ने मामले की जांच किए जाने की पुष्टि की है और कहा है कि आरोप साबित होने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस विवाद के बीच निष्कर्ष भारत ने भी दावा किया है कि उसने अपनी रिसर्च के आधार पर इस मुद्दे को पहले ही अपने यूट्यूब चैनल पर उठाया था। चैनल की ओर से 30 सितम्बर, 2026 जारी किए गए वीडियो में कथित सोशल मीडिया टिप्पणियों को लेकर सवाल उठाए गए थे। निष्कर्ष भारत का कहना है कि उसने इस मामले में रजिस्ट्रार से जवाब मांगने की कोशिश की, लेकिन उसे संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
IIT पटना में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर क्यों उठा विवाद?
मामले की शुरुआत 24 सितंबर को लिंक्डइन और फेसबुक पर कथित तौर पर साझा की गई टिप्पणियों से जुड़ी है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इन पोस्ट में आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था की समीक्षा करने और दलित समुदाय के बारे में आपत्तिजनक विचार व्यक्त किए गए थे। इन टिप्पणियों को लेकर संस्थान के भीतर और बाहर सवाल उठने लगे।
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लिंक्डइन पर मौजूद एक पोस्ट में भारत सरकार से आरक्षण और छूट की नीति की समीक्षा करने की मांग की गई थी। पोस्ट में दावा किया गया था कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान शुरुआत में केवल दस वर्षों के लिए किया गया था और इसके बाद तथ्यों के आधार पर समीक्षा की गुंजाइश थी।
पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि आरक्षण की व्यवस्था समय के साथ राजनीतिक दलों के लिए वोट बैंक बनाए रखने का माध्यम बन गई है। इसमें युवाओं के भविष्य, सामाजिक लाभ और देश को मजबूत बनाने के व्यापक हित में नीति की समीक्षा करने की बात कही गई थी।
सोमवार तक यह पोस्ट ठाकुर के लिंक्डइन अकाउंट पर मौजूद होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, फेसबुक पर दलित समुदाय से संबंधित बताई गई एक अन्य कथित टिप्पणी बाद में दिखाई नहीं दे रही थी। इन पोस्ट को लेकर शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया कि संस्थान में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी के नाम से ऐसी बातें सामने आना गंभीर विषय है।
IIT पटना के रजिस्ट्रार की भूमिका पर उठे सवाल
IIT पटना में एक फैकल्टी सदस्य ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर इन कथित टिप्पणियों को समस्याग्रस्त बताया। उनका कहना था कि रजिस्ट्रार और डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन जैसे पदों पर बैठे अधिकारी संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं।
ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारियों में संस्थान के नियमों और संबंधित नीतियों को लागू करने से जुड़े कार्य भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे में यदि किसी अधिकारी के नाम से आरक्षण-विरोधी विचार सार्वजनिक होते हैं, तो इससे छात्रों और दूसरे फैकल्टी सदस्यों के बीच भरोसे को लेकर सवाल पैदा हो सकते हैं।
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शिकायतकर्ता पक्ष का तर्क है कि आरक्षण केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं है, बल्कि यह संवैधानिक प्रावधानों और सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा भी है। इसलिए संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी के नाम से सामने आई ऐसी पोस्ट की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ठाकुर ने पोस्ट लिखने से इनकार किया है। इसलिए जांच पूरी होने और तथ्यों की पुष्टि होने से पहले कथित टिप्पणियों को उनकी प्रमाणित राय मानना उचित नहीं होगा।
IIT पटना के निदेशक से शिकायत, कार्रवाई की मांग
आरक्षण से संबंधित कथित पोस्ट के खिलाफ अधिकार कार्यकर्ता और IIM एलुमनाई ग्लोबल नेटवर्क के संस्थापक सदस्यों में शामिल अनिल वागडे ने IIT पटना के चेयरमैन टी.वी. नरेंद्रन और निदेशक अमित पात्रा को शिकायत भेजी।
शिकायत में कथित टिप्पणियों को दलित समुदाय का अपमान बताते हुए संस्थान के शीर्ष अधिकारियों से पूछा गया कि इस मामले में क्या कदम उठाए जाएंगे। वागडे का कहना है कि किसी संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी के नाम से ऐसी सामग्री सामने आने पर प्रबंधन को मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
उन्होंने रजिस्ट्रार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनकी मांगों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC/ST एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी शामिल है।
हालांकि, शिकायत में की गई मांग और किसी कानून के तहत अपराध साबित होना अलग-अलग बातें हैं। किसी भी कानूनी कार्रवाई का आधार जांच में सामने आने वाले तथ्य और संबंधित कानून के प्रावधान होंगे।
IIT पटना ने क्या कहा, रजिस्ट्रार ने आरोपों को नकारा
IIT पटना के निदेशक अमित पात्रा ने मामले की जांच किए जाने की पुष्टि की है। व्हाट्सएप संदेश में उन्होंने कहा कि आरोप साबित होने पर जरूरी कार्रवाई की जाएगी। उनके बयान से स्पष्ट है कि संस्थान ने शिकायतों को संज्ञान में लिया है और मामले में तथ्यों की जांच की जा रही है।
दूसरी ओर, अवलेन्द्र के. ठाकुर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने व्हाट्सएप संदेश में कहा कि उनके नाम से सामने आई पोस्ट फर्जी, मनगढ़ंत, छेड़छाड़ की गई और झूठी हैं।
ठाकुर ने यह भी कहा कि विरोधियों की ओर से उनके नाम पर इस तरह की दूसरी सामग्री भी तैयार की गई हो सकती है, जिसकी उन्हें जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि वह ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होते और न ही इस तरह की चीजों पर ध्यान देते हैं।
रजिस्ट्रार ने संकेत दिया कि उनके नाम से कथित टिप्पणियां पोस्ट करने वालों के खिलाफ वह कार्रवाई करेंगे। इस तरह मामले में शिकायतकर्ताओं के आरोप और रजिस्ट्रार का पक्ष एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। अब जांच के निष्कर्ष से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पोस्ट किसने साझा की थीं और उनकी प्रामाणिकता क्या है।
निष्कर्ष भारत ने पहले मुद्दा उठाने का किया दावा
इस पूरे विवाद में निष्कर्ष भारत ने कहा है कि उसने अपनी रिसर्च के आधार पर इस मुद्दे को पहले ही अपने यूट्यूब चैनल पर उठाया था। चैनल के अनुसार, उसके वीडियो में IIT पटना के रजिस्ट्रार के नाम से सामने आई कथित टिप्पणियों पर सवाल उठाए गए थे। चैनल ने यह भी कहा कि उसने इससे पहले IIT पटना में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।

निष्कर्ष भारत का दावा है कि रजिस्ट्रार से अलग-अलग मामलों में जवाब मांगने के बावजूद उसे अब तक संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। आरक्षण विवाद को लेकर भी चैनल की ओर से वीडियो जारी कर सवाल पूछे गए थे।
हालांकि, इस दावे और पहले प्रकाशित सामग्री की तारीखों की स्वतंत्र पुष्टि अलग विषय है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर शिकायतें संस्थान तक पहुंची हैं और IIT पटना ने जांच शुरू करने की बात कही है।
जांच के नतीजे पर टिकी नजरें
IIT पटना का यह मामला केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका, आरक्षण पर सार्वजनिक विमर्श, शिकायतकर्ताओं की मांग और आरोपों से इनकार करने वाले रजिस्ट्रार का पक्ष शामिल है।
अब सबसे अहम सवाल यह है कि कथित पोस्ट वास्तव में किसने लिखीं, क्या उनके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ हुई और शिकायतों में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या प्रमाण मिलते हैं। संस्थान की जांच इन सवालों के जवाब देने में महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल, निदेशक ने आरोप साबित होने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जबकि रजिस्ट्रार ने पोस्ट को फर्जी बताया है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। मामले की निष्पक्ष जांच और उसके परिणामों को सार्वजनिक करने से विवाद से जुड़े सवालों का जवाब मिलने की उम्मीद है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
