पटना में अग्निकांड में सब कुछ स्वाहा, रो पड़े दुकानदार, 50 से अधिक दुकानें राख
पटना के खेमनीचक सब्जी मंडी में भीषण आग से 50 से अधिक दुकानें राख हो गईं। सिलेंडर धमाकों के बीच दुकानदारों की जमा पूंजी जल गई।
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना के रामकृष्णनगर थाना क्षेत्र के खेमनीचक स्थित सब्जी मंडी में गुरुवार की अहले सुबह भीषण अग्निकांड ने दर्जनों छोटे कारोबारियों की जिंदगी को बड़ा झटका दिया। पटना में सुबह करीब 3:45 बजे लगी आग ने देखते ही देखते 50 से अधिक छोटी-बड़ी दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। झोपड़ीनुमा दुकानों में तेजी से फैलती लपटों के बीच कई गैस सिलेंडर फटने से लगातार धमाके होते रहे। हालात ऐसे थे कि दुकानदारों को अपना सामान बाहर निकालने तक का मौका नहीं मिला। आग में कई मोटरसाइकिलें भी जल गईं।
दमकल की 12 गाड़ियों ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक दुकानों में रखा सामान जलकर राख हो चुका था। घटना के बाद मंडी में हर तरफ जली हुई दुकानों, टूटे सामान और राख का ढेर नजर आया। जिन दुकानों से कुछ घंटे पहले तक परिवारों की रोजी-रोटी चल रही थी, वहां अब कारोबार दोबारा शुरू करने की चिंता खड़ी हो गई है।
पटना अग्निकांड के बाद मंडी में पसरा मातम
आग बुझने के बाद गुरुवार को पटना के खेमनीचक मंडी में बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। दुकानदार अपनी जली दुकानों के सामने खड़े होकर नुकसान का जायजा लेते रहे। कोई राख के ढेर में अपना बचा हुआ सामान तलाश रहा था, तो कोई दुकान की हालत देखकर फूट-फूटकर रो रहा था। कई लोग चेहरे पर गमछा रखकर आंसू पोंछते नजर आए।
पटना में दुकानदारों के परिवार के सदस्य भी घटनास्थल पर पहुंचे। जली हुई दुकानों को देखकर महिलाओं की आंखें भर आईं। आसपास के लोग पीड़ित कारोबारियों को ढांढस बंधाने की कोशिश करते रहे, लेकिन जिन लोगों की सालों की मेहनत और जमा पूंजी कुछ ही देर में खत्म हो गई, उनके दुख को शब्दों में समझाना मुश्किल था।
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पटना मंडी में छोटी-छोटी दुकानों के सहारे कई परिवारों का जीवन चलता था। किसी की दुकान पर पूजा सामग्री बिकती थी, तो कोई प्लास्टिक का सामान, मोबाइल, सब्जी, किराना या खाने-पीने की चीजें बेचता था। इन कारोबारियों के लिए दुकान केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य की उम्मीद भी थी।
पटना की मंडी में लाखों का सामान जला, कारोबारी बेबस
पटना में पूजा सामग्री और प्लास्टिक सामान की दुकान चलाने वाले रमेश कुमार ने बताया कि उन्होंने घटना से ठीक एक दिन पहले ही लाखों रुपये का सामान खरीदकर दुकान में रखा था। उनके अनुसार, दुकान में करीब 15 लाख रुपये का सामान मौजूद था। आग ने एक ही रात में उनकी पूरी पूंजी खत्म कर दी।

रमेश के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि सामान बचाने का अवसर ही नहीं मिला। दुकान में रखे माल के साथ उनकी मेहनत और कारोबार की जमा पूंजी भी जल गई। अब उनके सामने दोबारा दुकान शुरू करने की चुनौती है।
स्थानीय व्यापारी प्रकाश कुमार ने बताया कि मंडी में छोटे कारोबारी कई तरह की दुकानें चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इनमें पूजा सामग्री, मोबाइल, सब्जी, किराना और होटल सहित अलग-अलग कारोबार शामिल हैं। उन्होंने आशंका जताई कि अगर सरकार और प्रशासन से मदद नहीं मिली, तो कई परिवारों के लिए रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो सकता है।
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पटना में व्यापारियों की चिंता केवल दुकान जलने तक सीमित नहीं है। उनके सामने बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया, भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करने का सवाल भी खड़ा हो गया है।
सो रहे थे लोग, सिलेंडर धमाकों से बढ़ी दहशत
व्यापारियों के अनुसार, आग लगने के समय अधिकांश लोग सो रहे थे। सुबह मौसम खराब था और हल्की बूंदाबांदी भी हो रही थी। इसी दौरान मंडी में आग भड़क उठी। जब तक लोगों को घटना की जानकारी मिली और वे मौके पर पहुंचे, तब तक लपटें कई दुकानों तक फैल चुकी थीं।
पटना में झोपड़ीनुमा दुकानों में रखे गैस सिलेंडरों के फटने से एक के बाद एक धमाकों की आवाज सुनाई देने लगी। इससे आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। आग की तपिश और सिलेंडर फटने के खतरे के कारण दुकानदार अंदर जाने या सामान निकालने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
आग की चपेट में कई मोटरसाइकिलें भी आ गईं। मंडी में रखे सामान और दुकानों के जलने से नुकसान का दायरा बढ़ गया। दमकल की 12 गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाया गया। हालांकि, आग बुझने के बाद भी दुकानदारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि अब वे अपना कारोबार कैसे दोबारा शुरू करेंगे।
खेमनीचक मंडी की जमीन किराये पर, वर्षों से चल रही थीं दुकानें
स्थानीय जानकारी के अनुसार, मंडी की जमीन राजा बाबू उर्फ राजा प्रसाद की बताई जाती है। यहां छोटे दुकानदारों को किराये पर जगह दी गई थी। कई कारोबारी वर्षों से इसी स्थान पर अपनी दुकानें चलाकर परिवार का खर्च उठाते आ रहे थे।
मंडी में पूजा सामग्री, प्लास्टिक के सामान, मोबाइल, सब्जी, किराना और खाने-पीने की दुकानें थीं। इन कारोबारों से होने वाली रोजाना की कमाई से परिवारों की जरूरतें पूरी होती थीं। कई दुकानदारों के लिए यही आय का प्रमुख या एकमात्र साधन था।
ऐसे में आग से दुकानों के नष्ट होने का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। जिन कारोबारियों के पास दोबारा निवेश करने के लिए बचत नहीं है, उनके लिए दुकान खड़ी करना और फिर से सामान जुटाना बड़ी चुनौती बन सकता है।
पटना अग्निकांड की वजह अब तक स्पष्ट नहीं
पटना खेमनीचक मंडी में आग कैसे लगी, इसकी वास्तविक वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। व्यापारियों के मुताबिक, आग लगने के कारण का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। अभी तक नुकसान का पूरा आकलन भी सामने नहीं आया है।
स्थानीय स्तर पर 50 से अधिक दुकानों के जलने की बात कही जा रही है। हालांकि, प्रभावित दुकानों की सटीक संख्या और कुल आर्थिक नुकसान की पुष्टि विस्तृत सर्वे के बाद ही हो सकेगी। गैस सिलेंडरों के धमाकों और आग के तेजी से फैलने के कारण नुकसान अधिक होने की आशंका है।

आग लगने के कारण का पता लगाना इसलिए भी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें। बाजारों में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम, गैस सिलेंडरों का सुरक्षित रखरखाव और आपात स्थिति में बाहर निकलने की व्यवस्था छोटे कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण है।
सरकार से आर्थिक सहायता की गुहार, दोबारा दुकान शुरू करने की चिंता
आग में अपनी दुकान गंवाने वाले व्यापारियों ने सरकार और प्रशासन से नुकसान का आकलन कराने तथा आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत से खड़ा किया गया कारोबार कुछ ही समय में खत्म हो गया। अब दोबारा दुकान शुरू करने के लिए पूंजी जुटाना उनके लिए आसान नहीं होगा।
पीड़ित दुकानदार चाहते हैं कि प्रशासन प्रभावित कारोबारियों की सूची तैयार करे और नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराए। इसके बाद जरूरतमंद परिवारों को उचित सहायता मिले, ताकि वे फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
फिलहाल मंडी के दुकानदारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आजीविका का संकट है। जिन दुकानों से रोज घर का चूल्हा जलता था, वे अब राख में बदल चुकी हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी स्थिति को देखते हुए जल्द राहत पहुंचाएगा।
खेमनीचक का यह अग्निकांड छोटे व्यापारियों की असुरक्षा और सीमित संसाधनों की समस्या को भी सामने लाता है। नुकसान का वास्तविक आंकड़ा जांच के बाद स्पष्ट होगा, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए अब सबसे अहम सवाल यही है कि उनकी रोजी-रोटी कब और कैसे पटरी पर लौटेगी।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
