पटना का राजेंद्रनगर ROB 5 नवंबर तक बंद, चारपहिया और भारी वाहनों की रहेगी नो एंट्री

पटना

पटना का राजेंद्रनगर ROB 5 नवंबर तक चारपहिया और भारी वाहनों के लिए बंद रहेगा। जानें किन वाहनों को छूट है और कौन से वैकल्पिक रास्ते अपनाएं।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में राजेंद्रनगर रेलवे ओवरब्रिज (ROB) से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए जरूरी खबर है। करीब 46 साल पुराने इस पुल की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का काम शुरू होने के कारण 5 नवंबर तक चारपहिया और भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई है। इस दौरान कार, जीप, बस, ट्रक और अन्य भारी व्यावसायिक वाहन पुल से नहीं गुजर सकेंगे। हालांकि, बाइक, स्कूटर, साइकिल, रिक्शा, ई-रिक्शा और ऑटो को आवागमन की छूट दी गई है।

राजेंद्रनगर आरओबी पटना के प्रमुख संपर्क मार्गों में शामिल है। इसके जरिए शहर के कई महत्वपूर्ण इलाकों के बीच आवागमन होता है। ऐसे में पुल पर वाहनों की आवाजाही सीमित होने से आसपास की सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ने की आशंका है। खासकर कंकड़बाग, राजेंद्रनगर, पुराने बाइपास और गुलजारबाग की ओर जाने वाले लोगों को अगले कुछ दिनों तक अतिरिक्त समय लेकर निकलना होगा।

पथ निर्माण विभाग की ओर से पुल को मजबूत बनाने के लिए विशेष तकनीकी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसका उद्देश्य केवल मौजूदा ढांचे की मरम्मत करना नहीं, बल्कि पुल को आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले यातायात का दबाव झेलने के योग्य बनाना है। विभाग की योजना इस पुल को अगले 25 वर्षों तक सुरक्षित और उपयोगी बनाए रखने की है।

पटना राजेंद्रनगर ROB पर 5 नवंबर तक क्यों लगी रोक?

राजेंद्रनगर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण करीब 1980 के आसपास पूरा हुआ था। इसकी डिजाइनिंग 1975 में की गई थी। उस समय पटना की आबादी और वाहनों की संख्या आज की तुलना में काफी कम थी। लेकिन पिछले चार दशकों में शहर का विस्तार हुआ है और निजी वाहनों के साथ व्यावसायिक वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।

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लगातार बढ़ते ट्रैफिक और वाहनों के भार को देखते हुए पुल के पिलरों की मजबूती बढ़ाने का फैसला लिया गया है। नूतन राजधानी पथ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अभिषेक कुमार के मुताबिक, भारी यातायात के दबाव को ध्यान में रखते हुए पिलरों की स्ट्रेंथ बढ़ाई जा रही है।

पिलरों की मोटाई बढ़ाकर मजबूत किया जा रहा पुल

पुल के सुदृढ़ीकरण के लिए पिलरों की पाइलिंग की मोटाई बढ़ाई जा रही है। इसके लिए आधुनिक रेट्रोफिटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के जरिए पुराने पुल के बुनियादी ढांचे को अतिरिक्त मजबूती देने की कोशिश की जा रही है।

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रेट्रोफिटिंग का उद्देश्य किसी पुराने निर्माण को पूरी तरह हटाकर नया बनाने के बजाय उसकी मौजूदा संरचना को तकनीकी उपायों से अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाना होता है। राजेंद्रनगर आरओबी के मामले में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, ताकि पुल की उपयोगिता लंबे समय तक बनी रहे।

पटना में किन वाहनों को मिलेगी छूट, किस पर रहेगा प्रतिबंध?

मरम्मत कार्य के दौरान यातायात व्यवस्था को नियंत्रित रखने के लिए वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। चारपहिया और भारी वाहनों पर प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि दोपहिया और कुछ छोटे वाहनों को पुल से गुजरने की अनुमति दी गई है।

इन वाहनों की आवाजाही पर रहेगी रोक

  • कार और जीप
  • बस और ट्रक
  • सभी भारी व्यावसायिक वाहन

इन वाहनों को मिलेगी आवागमन की छूट

  • बाइक और स्कूटर
  • साइकिल और रिक्शा
  • ई-रिक्शा और ऑटो

वाहन चालकों को पुल के पास पहुंचने से पहले यातायात संबंधी निर्देशों पर ध्यान देना चाहिए। खासकर चारपहिया वाहन चालकों को प्रतिबंधित मार्ग पर जाने के बजाय निर्धारित वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना होगा।

राजेंद्रनगर ROB बंद होने पर कहां से जाएं?

राजेंद्रनगर ओवरब्रिज पर चारपहिया वाहनों की आवाजाही बंद रहने के कारण वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना जरूरी होगा। कंकड़बाग, पुराने बाइपास और गुलजारबाग की ओर आने-जाने वाले वाहन चालक आरएन सिंह मोड़ अथवा बहादुरपुर वाले मार्ग से अपना सफर पूरा कर सकते हैं।

पटना के इन इलाकों में बढ़ सकता है ट्रैफिक दबाव

राजेंद्रनगर आरओबी शहर के कई व्यस्त इलाकों को जोड़ता है। ऐसे में पुल पर प्रतिबंध के बाद आसपास की सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ सकता है। विशेष रूप से सुबह कार्यालय जाने और शाम को घर लौटने के समय जाम की स्थिति बन सकती है।

कंकड़बाग और पुराने बाइपास की ओर जाने वाले लोगों को वैकल्पिक रास्तों पर सामान्य से अधिक समय लग सकता है। इसलिए जरूरी काम से निकलने वाले वाहन चालकों को अपनी यात्रा पहले से तय करनी चाहिए। रास्ते में भीड़ मिलने पर जल्दबाजी करने के बजाय यातायात नियमों का पालन करना बेहतर होगा।

पटना के विकास में राजेंद्रनगर ROB की रही है अहम भूमिका

राजेंद्रनगर ओवरब्रिज का इतिहास पटना के शहरी विकास से जुड़ा हुआ है। इसके निर्माण से पहले शहर के उत्तर और दक्षिण हिस्सों के बीच आवागमन के लिए लोगों को रेलवे गुमटियों पर निर्भर रहना पड़ता था। कोलकाता-पटना-मुगलसराय रेल लाइन पर ट्रेन गुजरने के दौरान रेलवे फाटक बंद हो जाते थे। इससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती थी और लोगों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ता था।

इस समस्या को दूर करने के लिए चिरैयाटांड़, राजेंद्रनगर और चितकोहरा में रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए। बाद में भिखारी ठाकुर आरओबी भी शहर की यातायात व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। इन पुलों ने कंकड़बाग, करबिगहिया, मीठापुर और अनीसाबाद जैसे इलाकों को गांधी मैदान और सचिवालय क्षेत्र से बेहतर संपर्क दिया।

पुराने पुलों को भी आधुनिक बनाने की जरूरत

समय के साथ पटना की आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में पुराने पुलों की नियमित जांच और मरम्मत जरूरी हो गई है। चिरैयाटांड़ आरओबी का पुनर्निर्माण हो चुका है, जबकि चितकोहरा आरओबी की छत की मरम्मत भी कराई गई है। अब राजेंद्रनगर आरओबी को आधुनिक तकनीक से मजबूत बनाने का काम किया जा रहा है।

46 साल पुराने पुल को मिलेगा 25 साल का नया जीवन

राजेंद्रनगर आरओबी की मरम्मत को पटना के आधारभूत ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शहर के विस्तार के साथ पुराने संपर्क मार्गों पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पुलों की मजबूती बनाए रखना सुरक्षित आवागमन के लिए जरूरी है।

इस काम के पूरा होने के बाद पुल की संरचनात्मक मजबूती बढ़ाने और उसकी उपयोगिता लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसके लिए समय-समय पर तकनीकी जांच और रखरखाव भी जरूरी होगा।

फिलहाल वाहन चालकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि 5 नवंबर तक राजेंद्रनगर आरओबी पर चारपहिया और भारी वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी। इसलिए घर से निकलने से पहले वैकल्पिक रास्ते की योजना बनाएं और अतिरिक्त समय लेकर चलें। कुछ दिनों की यह असुविधा पुल को लंबे समय तक सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से की जा रही है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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