CM सम्राट की पहल से बदलेंगी बिहार की सड़कें, 7 साल तक होगी देखरेख, जानें नई व्यवस्था

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बिहार में 13,033 किमी सड़कों का 7 साल तक होगा रखरखाव

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार में सड़कों की तस्वीर बदलने और आवागमन को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने रखरखाव की नई व्यवस्था शुरू की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 26 सितंबर 2026 को ओपीआरएमसी-3 (आउटपुट एवं परफॉर्मेंस बेस्ड रोड मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट) के तीसरे चरण का शुभारंभ किया। इसके तहत 10,590.53 करोड़ रुपये की लागत से राज्य की 13,033 किलोमीटर सड़कों का अगले सात वर्षों तक रखरखाव किया जाएगा। योजना में राज्य उच्च पथों और वृहद जिला पथों को शामिल किया गया है। काम को 66 पैकेजों में बांटा गया है और इसकी अवधि 2026 से 2033 तक निर्धारित की गई है।

इस व्यवस्था की खास बात यह है कि अब सड़क निर्माण के साथ उसकी गुणवत्ता बनाए रखने और नियमित मरम्मत की जिम्मेदारी भी लंबे समय के लिए तय होगी। सरकार का जोर केवल नई सड़कें बनाने पर नहीं, बल्कि पहले से बनी सड़कों को भी चलने लायक और सुरक्षित बनाए रखने पर है। इससे आम लोगों को गड्ढों, खराब सतह और समय पर मरम्मत नहीं होने जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है।

बिहार में सड़कों के रखरखाव के लिए सात साल का अनुबंध

ओपीआरएमसी-3 के तहत चयनित एजेंसियों को निर्धारित सड़कों का सात वर्षों तक संधारण करना होगा। इस मॉडल में ठेकेदारों की जिम्मेदारी केवल निर्माण या मरम्मत तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें अनुबंध में तय मानकों के अनुसार सड़क की स्थिति बनाए रखनी होगी।

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पारंपरिक व्यवस्था में कई बार सड़क बनने के कुछ समय बाद उसकी मरम्मत को लेकर अलग से प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती थी। इससे शिकायतों के समाधान में देरी और सड़क की गुणवत्ता बनाए रखने में परेशानी आती थी। दीर्घकालीन अनुरक्षण अनुबंध के जरिए सरकार इसी समस्या को कम करना चाहती है।

खराब सड़क की मरम्मत और गुणवत्ता पर रहेगी नजर

नई व्यवस्था में सड़क की स्थिति को लगातार बेहतर बनाए रखने पर जोर रहेगा। सड़क पर गड्ढे होने, सतह खराब होने या किसी हिस्से में मरम्मत की जरूरत पड़ने पर संबंधित एजेंसी की जवाबदेही तय होगी। इससे विभाग के लिए यह देखना आसान होगा कि निर्धारित मानकों के अनुसार काम हो रहा है या नहीं।

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पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल के अनुसार, सड़क निर्माण के साथ नियमित रखरखाव को प्राथमिकता देना जरूरी है। सरकार का मानना है कि बेहतर अनुरक्षण से सड़कें लंबे समय तक उपयोगी रहेंगी और बार-बार बड़े स्तर पर मरम्मत कराने की जरूरत भी कम हो सकती है।

बिहार के किसी भी सदर से पटना चार घंटे में पहुंचने का लक्ष्य

राज्य सरकार ने सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रखा है। पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज पाल के मुताबिक, कोशिश है कि बिहार के किसी भी जिला मुख्यालय यानी सदर क्षेत्र से राजधानी पटना पहुंचने में चार घंटे से अधिक समय नहीं लगे।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल सड़क की लंबाई बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। सड़क की चौड़ाई, सतह की गुणवत्ता, पुल-पुलियों की स्थिति, यातायात प्रबंधन और नियमित मरम्मत भी अहम भूमिका निभाएंगे। कई इलाकों में खराब सड़क या जर्जर पुल के कारण यात्रा का समय बढ़ जाता है। ऐसे में रखरखाव की बेहतर व्यवस्था से आवागमन को सुगम बनाने में मदद मिल सकती है।

व्यापार, रोजगार और किसानों को भी होगा फायदा

सड़कों की बेहतर स्थिति का असर सिर्फ यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहता। ग्रामीण इलाकों से कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने, छोटे कारोबारियों के सामान की ढुलाई और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार में भी सड़क संपर्क की अहम भूमिका होती है।

यदि जिला मुख्यालयों और राजधानी के बीच यात्रा का समय कम होता है, तो लोगों को इलाज, शिक्षा, सरकारी काम और रोजगार से जुड़े अवसरों तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है। कारोबारियों के लिए माल ढुलाई आसान हो सकती है और किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में कम परेशानी होगी।

बिहार की अनुरक्षण नीति के तीन चरणों की कहानी

बिहार में सड़कों के रखरखाव को व्यवस्थित करने के लिए पथ निर्माण विभाग ने वर्ष 2013 में बिहार पथ अनुरक्षण नीति लागू की थी। इसका उद्देश्य सड़क बनने के बाद उसकी देखरेख की जिम्मेदारी और प्रक्रिया को व्यवस्थित करना था।

पहले चरण यानी 2013 से 2018 के दौरान 2,579.17 करोड़ रुपये खर्च कर 9,064 किलोमीटर सड़कों का संधारण किया गया। इसके बाद 2019 से 2026 तक दूसरे चरण में 6,654.77 करोड़ रुपये की लागत से 13,064 किलोमीटर सड़कों के रखरखाव की व्यवस्था 72 पैकेजों के तहत की गई।

अब तीसरे चरण में सात वर्षों तक सड़कों के रखरखाव की नई व्यवस्था लागू की जा रही है। सरकार ने व्यापक ओपीआरएमसी-3 कार्यक्रम के लिए 100 पैकेजों और करीब 15,967 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति का भी उल्लेख किया है। हालांकि, 26 सितंबर को शुभारंभ किए गए कार्यों का विशिष्ट दायरा 66 पैकेज, 13,033 किलोमीटर सड़क और 10,590.53 करोड़ रुपये है। ये दोनों आंकड़े अलग-अलग स्तर के कार्यक्रम और कार्यक्षेत्र से संबंधित हैं।

आधुनिक तकनीक से होगी बिहार की सड़कों की निगरानी

ओपीआरएमसी-3 में सड़क अनुरक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। योजना से जुड़ी रूपरेखा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित निगरानी व्यवस्था को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सड़क की स्थिति से जुड़ी जानकारी जुटाना और मरम्मत की जरूरत का समय पर पता लगाना है।

तकनीक आधारित निगरानी से विभाग को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किस सड़क पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा, मॉडल बिडिंग डॉक्यूमेंट में बदलाव कर अनुबंध की शर्तों और काम के मानकों को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है।

मासिक रिपोर्ट और जवाबदेही पर जोर

सड़क रखरखाव के काम में नियमित निगरानी जरूरी है। केवल शिकायत मिलने के बाद मरम्मत शुरू करने के बजाय सड़क की स्थिति का समय-समय पर आकलन करने से समस्याओं को शुरुआती स्तर पर पकड़ा जा सकता है। इससे मरम्मत में देरी और यात्रियों को होने वाली परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पुलों पर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही रोकने और ग्रामीण सड़कों को भी भारी वाहनों से होने वाले नुकसान से बचाने का निर्देश दिया है। सड़क और पुलों की क्षमता के अनुरूप वाहनों का परिचालन सुनिश्चित करना भी इस व्यवस्था की अहम जरूरत है।

आम लोगों को कब दिखेगा नई व्यवस्था का असर?

सरकार की इस पहल का वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा, जब अनुबंधित एजेंसियां तय समय पर मरम्मत करें और विभाग उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करे। सात साल की अवधि में सड़क की गुणवत्ता बनाए रखना इस योजना की सबसे बड़ी कसौटी होगी।

बिहार में बेहतर सड़क संपर्क से जिला मुख्यालयों, प्रखंडों और राजधानी के बीच आवाजाही आसान बनाने की उम्मीद है। हालांकि, हर इलाके में इसका असर सड़क की मौजूदा स्थिति, काम की प्रगति और निगरानी व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

फिलहाल ओपीआरएमसी-3 के जरिए सरकार ने सड़क निर्माण के साथ उनके दीर्घकालीन रखरखाव को भी प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सात वर्षों की यह व्यवस्था कागजों से निकलकर जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और आम लोगों को खराब सड़कों से कितनी राहत मिलती है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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