महावीर मंदिर में हनुमान जयंती की भव्य तैयारी, 51 किलो लड्डू का लगेगा भोग, लाल गुलाब से श्रृंगार
पटना महावीर मंदिर में हनुमान जयंती पर 51 किलो लड्डू का लगेगा भोग।
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। हनुमान जयंती को लेकर पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस विशेष अवसर पर बजरंगबली के दरबार को लाल गुलाब के फूलों से सजाया जाएगा। भगवान हनुमान को 51 किलो का नैवेद्यम लड्डू अर्पित किया जाएगा। पूजा-अर्चना के बाद इस विशेष प्रसाद को श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जाएगा। मंदिर प्रबंधन की ओर से आयोजन को लेकर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ भक्तों की सुविधा और सुरक्षा की भी व्यवस्था की जा रही है।
हनुमान जयंती के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए सरकारी और निजी सुरक्षाकर्मियों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी। मंदिर परिसर में भीड़ को व्यवस्थित रखने और दर्शन के दौरान किसी तरह की परेशानी से बचाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।
इस बार आयोजन की खास बात 51 किलो का नैवेद्यम लड्डू और लाल गुलाब से होने वाला विशेष श्रृंगार होगा। नौ दिनों तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठान के जरिए मंदिर परिसर में रामभक्ति और हनुमान भक्ति का माहौल बना रहेगा।
पटना महावीर मंदिर में लाल गुलाब से होगा बजरंगबली का श्रृंगार
हनुमान जयंती पर महावीर मंदिर में भगवान हनुमान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इसके लिए लाल गुलाब के फूलों का इस्तेमाल होगा। फूलों से सजे दरबार में भक्तों को बजरंगबली के आकर्षक स्वरूप के दर्शन होंगे। मंदिर में विशेष पूजा और भोग की तैयारी भी की जा रही है।
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धार्मिक परंपराओं में हनुमान जी को शक्ति, साहस, भक्ति और सेवा का प्रतीक माना जाता है। इस कारण हनुमान जयंती पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पटना के महावीर मंदिर में भी इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्त भगवान को प्रसाद अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं।
इस बार 51 किलो का नैवेद्यम लड्डू विशेष आकर्षण रहेगा। भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच बांटा जाएगा। मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए यह आयोजन धार्मिक उत्साह का खास अवसर होगा।
बिहार में नौ दिनों तक होगा रामचरितमानस नवाह पाठ
महावीर मंदिर में हनुमान जयंती के अवसर पर नौ दिनों तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत कलश स्थापना के साथ हो चुकी है। इसके साथ ही श्रीरामचरितमानस नवाह पाठ का शुभारंभ किया गया। मंदिर के ऊपरी तल पर बने स्थायी मंडप में इस पाठ का आयोजन किया जा रहा है।
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इस अनुष्ठान के लिए मिथिला से 11 सदस्यीय मंडली पहुंची है। मंडली के सदस्य लगातार नौ दिनों तक रामचरितमानस का पाठ करेंगे। आयोजन की पूर्णाहुति हनुमान जयंती के दिन होगी। इस दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक पाठ, पूजा और भक्ति से जुड़े कार्यक्रमों का माहौल रहेगा।
रामचरितमानस का पाठ हनुमान भक्ति से भी विशेष रूप से जुड़ा माना जाता है। भगवान हनुमान को प्रभु श्रीराम का परम भक्त कहा जाता है। इसी मान्यता के कारण हनुमान जयंती के अवसर पर रामचरितमानस पाठ का आयोजन धार्मिक महत्व रखता है। भक्तों के लिए यह केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि राम और हनुमान के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने का भी माध्यम है।
सायण कुणाल निभा रहे यजमान की भूमिका
इस वर्ष महावीर मंदिर में आयोजित अनुष्ठान में श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल यजमान की भूमिका निभा रहे हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार यजमान पूजा और अनुष्ठान से जुड़े प्रमुख विधि-विधानों में भाग लेते हैं।
नौ दिनों तक चलने वाले नवाह पाठ की पूर्णाहुति हनुमान जयंती के दिन की जाएगी। इसके साथ ही मंदिर में विशेष पूजा और भगवान को नैवेद्यम अर्पित करने की तैयारी है। आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
बिहार में हनुमान जयंती की तारीख को लेकर अलग-अलग मान्यताएं
महावीर मंदिर में हनुमान जयंती कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह परंपरा जगद्गुरु रामानंदाचार्य की परंपरा के अनुसार है। हालांकि, देश के अलग-अलग हिस्सों में हनुमान जी के जन्मोत्सव को लेकर अलग-अलग तिथियां प्रचलित हैं।

कई क्षेत्रों में चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, सुंदरकांड पाठ, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण जैसे कार्यक्रम होते हैं। वहीं, महावीर मंदिर में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमान जयंती मनाने की परंपरा का पालन किया जाता है।
यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हनुमान जयंती एक ही दिन नहीं मनाई जाती। तिथि का निर्धारण संबंधित धार्मिक परंपरा और मान्यताओं के आधार पर होता है। महावीर मंदिर भी अपनी स्थापित परंपरा के अनुसार इस पर्व का आयोजन करता है।
धार्मिक ग्रंथों में भी मिलती है जन्मतिथि की मान्यता
हनुमान जी के जन्म से जुड़ी तिथि को लेकर धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में अलग-अलग उल्लेख मिलते हैं। मंदिर की परंपरा के अनुसार अगस्त्य संहिता के नाम से प्रचलित श्लोक और वायु पुराण की मान्यता में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को उनके जन्म से जोड़ा गया है।
इसी धार्मिक मान्यता के आधार पर महावीर मंदिर में इस तिथि को हनुमान जयंती मनाई जाती है। मंदिर प्रबंधन का आयोजन इसी परंपरा के अनुरूप होता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि हनुमान जयंती की तिथि अलग-अलग होने के पीछे क्षेत्रीय और धार्मिक परंपराओं की भूमिका है।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम
हनुमान जयंती पर महावीर मंदिर में भक्तों की संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी। मंदिर में सरकारी और निजी सुरक्षाकर्मियों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी, ताकि श्रद्धालु व्यवस्थित तरीके से दर्शन कर सकें।
पर्व के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में भीड़ बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाता है। मंदिर प्रबंधन की कोशिश रहेगी कि पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण के दौरान श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।
पटना के महावीर मंदिर में इस बार हनुमान जयंती का आयोजन विशेष धार्मिक उत्साह के साथ किया जा रहा है। लाल गुलाब से सजा बजरंगबली का दरबार, 51 किलो का नैवेद्यम लड्डू और नौ दिनों तक चलने वाला रामचरितमानस नवाह पाठ इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण होंगे। श्रद्धालुओं को अब हनुमान जयंती के दिन विशेष पूजा और दर्शन का इंतजार है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
