IPS की पत्नी का हाईवोल्टेज ड्रामा, CM हाउस के बाद SP आवास पर धरना, बेटी से मिलने की मांग
खगड़िया एसपी भानु प्रताप सिंह की पत्नी पूजा सिंह बेटी से मिलने की मांग को लेकर एसपी आवास पर धरने पर बैठीं। जानिए पूरा पारिवारिक विवाद।
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार के खगड़िया में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का पारिवारिक विवाद अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। खगड़िया के एसपी भानु प्रताप सिंह और उनकी पत्नी पूजा सिंह के बीच चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अपनी छह वर्षीय बेटी से मिलने और पति के साथ दोबारा परिवार बसाने की मांग को लेकर पूजा सिंह एक बार फिर धरने पर बैठ गई हैं। इस बार उन्होंने खगड़िया स्थित एसपी आवास के बाहर मोर्चा खोल दिया है। तीन दिनों के भीतर दूसरी बार धरने पर बैठने के बाद यह मामला पुलिस महकमे से लेकर बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों तक चर्चा में आ गया है।
इससे पहले 1 नवंबर को पूजा सिंह ने पटना में मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना दिया था। इसके बाद उन्होंने बिहार पुलिस मुख्यालय और महिला आयोग के अधिकारियों से भी अपनी शिकायत रखी। लेकिन उनका कहना है कि अब तक उन्हें अपनी छह साल की बेटी से मिलने का मौका नहीं मिला है। पूजा सिंह का सवाल है कि आखिर किस कानून के तहत एक मां को अपनी बच्ची से मिलने से रोका जा रहा है?
IPS भानु प्रताप सिंह के आवास के बाहर क्यों धरने पर बैठीं पूजा?
खगड़िया में एसपी आवास के बाहर धरने पर बैठीं पूजा सिंह ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि उन्हें आवास के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करीब दो महीने होने को आए हैं, लेकिन उन्हें अपनी बेटी से मिलने नहीं दिया जा रहा है।
पूजा सिंह के मुताबिक, वह अपने पति से अलग नहीं होना चाहतीं। उनकी मांग है कि उन्हें अपनी बेटी से मिलने दिया जाए और परिवार को फिर से एक साथ रहने का मौका मिले।
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उन्होंने सवाल उठाया कि जब वह अपनी बच्ची और पति से मिलना चाहती हैं तो उन्हें आवास के गेट पर क्यों रोका जा रहा है? उनका कहना है कि वह लगातार अधिकारियों से गुहार लगा रही हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
यह मामला अब केवल पति-पत्नी के बीच का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसमें एक छह वर्षीय बच्ची के हित और मां-बेटी के संपर्क का सवाल भी जुड़ गया है।
मुख्यमंत्री आवास से पुलिस मुख्यालय तक पहुंचीं पूजा सिंह
पूजा सिंह ने अपनी शिकायत को लेकर सबसे पहले 1 नवंबर को पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सरकारी आवास के बाहर धरना दिया था। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री से भावुक अपील करते हुए कहा था कि उन्हें उनकी छह साल की बेटी से मिलवाया जाए।
धरने की सूचना मिलने के बाद पटना पुलिस की महिला टीम मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाकर सदर एसडीएम कार्यालय पहुंचाया, जहां अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे तक बातचीत हुई।
बताया गया कि इस दौरान पूजा सिंह को आश्वासन दिया गया कि खगड़िया एसपी को पटना बुलाया जाएगा और डीजीपी सहित वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराई जाएगी।
इसके बाद पूजा सिंह बिहार पुलिस मुख्यालय पहुंचीं और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखी। हालांकि, उनका दावा है कि इस बातचीत से उन्हें संतोष नहीं मिला। मुख्यालय से बाहर निकलने के बाद उन्होंने मीडिया के सामने रोते हुए आरोप लगाया कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उनके पति का पक्ष ले रहे हैं।
पूजा ने एडीजी, आईजी और डीजीपी पर भी अपने पति का समर्थन करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि उन्हें बेटी से मिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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तलाक नहीं चाहतीं पूजा, दोबारा बसाना चाहती हैं परिवार
पूजा सिंह की सबसे बड़ी मांग यह है कि उनका परिवार दोबारा एक हो जाए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह अपने पति से तलाक नहीं चाहतीं और न ही उनके खिलाफ किसी तरह की कानूनी लड़ाई लड़ना उनका उद्देश्य है।
उनका कहना है कि पिछले कई महीनों से वह अपनी बेटी से दूर हैं। वह चाहती हैं कि पति-पत्नी के बीच जो भी मतभेद हैं, उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाया जाए।
पूजा के मुताबिक, उन्होंने अपने जीवन में पति के साथ रहने के लिए कई व्यक्तिगत फैसले लिए और अब वह अपने परिवार को टूटने से बचाना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें आज भी अपने पति की ईमानदारी पर भरोसा है और वह उनका सम्मान करती हैं।
हालांकि, उनके आरोपों और पूरे विवाद पर आईपीएस भानु प्रताप सिंह का पक्ष सामने आना भी जरूरी है। मामले की निष्पक्ष स्थिति समझने के लिए दोनों पक्षों की बात और बच्ची के हित को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।
IPS भानु प्रताप और पूजा सिंह की लव स्टोरी कैसे शुरू हुई?
विवाद के बीच पूजा सिंह ने अपनी प्रेम कहानी और शादी से जुड़ी कई पुरानी बातें भी साझा की हैं। उनके अनुसार, भानु प्रताप सिंह से उनकी पहली मुलाकात वर्ष 2015 में कोलकाता में एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी।
पूजा बताती हैं कि भानु प्रताप के पिता सेना में थे और उनके मौसा भी सेना से जुड़े थे। इसी पारिवारिक परिचय के कारण दोनों की मुलाकात हुई। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी और दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे।
पूजा के अनुसार, जब उन्होंने अपने परिवार को इस रिश्ते के बारे में बताया तो घरवालों ने इसका विरोध किया। भानु के परिवार की ओर से भी शुरुआत में सहमति नहीं मिली। इसी दौरान पूजा के लिए एक डॉक्टर का रिश्ता आया, जो बेंगलुरु में रहता था। पूजा ने इसकी जानकारी भानु को दी तो उन्होंने उनसे शादी करने का भरोसा दिलाया।
घर छोड़कर भरतपुर पहुंचीं पूजा, 2017 में हुई शादी
पूजा के मुताबिक, परिवार की सहमति नहीं मिलने पर उन्होंने घर छोड़कर भानु के पास जाने का फैसला किया। वह हावड़ा-जोधपुर ट्रेन से भरतपुर पहुंचीं और बाद में अपनी मां को फोन करके पूरे मामले की जानकारी दी।

पूजा बताती हैं कि भानु ने उनकी मां से भी बातचीत की और भरोसा दिया कि वह उनका साथ कभी नहीं छोड़ेंगे। इसके बाद 16 जनवरी 2017 को दोनों की शादी हुई।
पूजा के अनुसार, शादी में उनके परिवार की ओर से मां और मौसी के परिवार के कुछ लोग शामिल हुए थे, जबकि भानु के परिवार के सदस्य भी मौजूद थे।
पति की तैयारी के लिए स्कूल में नौकरी करती थीं पूजा
पूजा सिंह ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि शादी के बाद दोनों राजस्थान के भरतपुर में रहते थे। उस समय भानु प्रताप सिंह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।
घर की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। ऐसे में पूजा ने संत पीटर्स स्कूल में नौकरी शुरू की। उनके मुताबिक, उन्हें हर महीने करीब 17 हजार रुपये वेतन मिलता था। इसी आमदनी से दोनों घर का खर्च चलाते थे।
पूजा का कहना है कि वह सुबह जल्दी उठकर घर का काम करती थीं, पति के लिए खाना बनाती थीं और फिर स्कूल जाती थीं। उनका उद्देश्य था कि भानु बिना किसी घरेलू परेशानी के अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकें।
बाद में भानु प्रताप सिंह दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने लगे। पूजा के अनुसार, उस दौरान आर्थिक कठिनाइयां थीं। उन्होंने अपने पति की तैयारी जारी रखने के लिए शादी में मिले सोने के गहने तक बेचने की पेशकश की थी।
2020 में IPS बनने की मिली खुशखबरी, बेटी का भी हुआ जन्म
पूजा के मुताबिक, लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 2020 में भानु प्रताप सिंह का आईपीएस में चयन हुआ। इसी वर्ष उनकी बेटी का जन्म भी हुआ। पूजा बताती हैं कि बेटी की देखभाल के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी थी।
भानु प्रताप सिंह प्रशिक्षण के लिए शिमला चले गए थे, जबकि पूजा अपनी बेटी के साथ मायके में रहने लगी थीं। उनके अनुसार, इस दौरान दोनों वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में रहते थे।
पूजा ने यह भी बताया कि उनके पति ने वर्ष 2019 के एक मॉक इंटरव्यू में अपनी शादी के दिन को जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल बताया था। इन पुरानी यादों का जिक्र करते हुए पूजा कहती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनके रिश्ते में ऐसी स्थिति आ जाएगी।
महिला आयोग में शिकायत के बाद बढ़ा विवाद
इस पारिवारिक विवाद की शुरुआत बिहार राज्य महिला आयोग में की गई शिकायत से हुई थी। पूजा सिंह ने अपने पति पर उत्पीड़न और मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत मिलने के बाद महिला आयोग ने खगड़िया एसपी भानु प्रताप सिंह को समन जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था।
इसके बाद भानु प्रताप सिंह के 45 दिनों की छुट्टी पर जाने की जानकारी भी सामने आई थी। मामला धीरे-धीरे पुलिस और प्रशासनिक महकमे में चर्चा का विषय बन गया।
पूजा ने अपने पुराने बयानों में यह भी आरोप लगाया था कि विवाद के दौरान उन्होंने मानसिक तनाव में जहर पी लिया था। उन्होंने पति के परिवार की ओर से एक करोड़ रुपये लेकर रिश्ता खत्म करने का प्रस्ताव दिए जाने का भी दावा किया है। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दूसरे पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।
अब सबसे बड़ा सवाल, बेटी से कब मिल पाएंगी पूजा सिंह?
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे संवेदनशील पहलू छह वर्षीय बच्ची का है। एक तरफ पूजा सिंह अपनी बेटी से मिलने की मांग कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पति-पत्नी के बीच विवाद का समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर यह जरूरी है कि मामले को संवेदनशीलता के साथ देखा जाए। बच्ची की सुरक्षा, मानसिक स्थिति और उसके सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए दोनों पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और प्रशासन इस पारिवारिक विवाद का कोई समाधान निकाल पाएंगे? क्या पूजा सिंह को अपनी बेटी से मिलने का अवसर मिलेगा? फिलहाल खगड़िया एसपी आवास के बाहर जारी उनका धरना इसी सवाल को सामने ला रहा है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
