“125 यूनिट फ्री बिजली का वादा टूटा? तेजस्वी यादव और सहनी ने उठाए सवाल”

तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी ने एकजुट होकर नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

पटना | स्पेशल रिपोर्ट

बिहार में बिजली दरों में बदलाव को लेकर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी ने एकजुट होकर नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। दोनों नेताओं ने सरकार पर जनता से किए गए वादों से मुकरने और बिजली दरों के जरिए आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया है।


चुनावी वादों पर सवाल

तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरते हुए कहा कि चुनाव के दौरान 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया गया था, लेकिन सत्ता में आने के महज चार महीने बाद ही सरकार अपने “असल रंग” में लौट आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के साथ छल किया गया है और अब नई दरों के जरिए उनकी जेब पर सीधा असर डाला जा रहा है।

तेजस्वी ने “चीटर मीटर” शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। उनके अनुसार यह व्यवस्था पारदर्शी नहीं है और आम लोगों को समझ से बाहर रखकर उनसे अधिक भुगतान कराया जा रहा है।


नई बिजली दरों से बढ़ा बोझ

विपक्षी नेताओं ने नई बिजली दरों की संरचना पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार अब समय के आधार पर अलग-अलग दरें लागू की गई हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा:

  • पीक आवर (शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक – 6 घंटे): ₹8.10 प्रति यूनिट
  • रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक – 10 घंटे: ₹7.10 प्रति यूनिट
  • बाकी समय – 8 घंटे: ₹5.94 प्रति यूनिट

तेजस्वी यादव का कहना है कि यह नई व्यवस्था आम लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि परेशानी का कारण बनेगी। खासकर मध्यम वर्ग और गरीब तबके पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।


“खजाना खाली, जनता से वसूली”

तेजस्वी यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के दौरान सरकारी खजाने से बड़े पैमाने पर धन खर्च किया गया और अब उसकी भरपाई जनता से की जा रही है।

उन्होंने कहा, “सरकार का खजाना लगभग खाली हो चुका है। अब अगले पांच वर्षों तक जनता से ही इसकी भरपाई की जाएगी।” तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता हासिल करने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की गई है और अब भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।


मुकेश सहनी का हमला: “जनता पर दोहरी मार”

इस मुद्दे पर मुकेश सहनी ने भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि 125 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा सिर्फ एक चुनावी “झुनझुना” साबित हुआ है।

सहनी ने कहा कि अब पीक आवर के नाम पर दरें बढ़ाकर जनता पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। “एक तरफ रसोई गैस की कीमतें बढ़ रही हैं, दूसरी तरफ बिजली महंगी हो रही है। यह आम लोगों के लिए दोहरी मार है,” उन्होंने कहा।


गर्मी में बढ़ती परेशानी

मुकेश सहनी ने यह भी मुद्दा उठाया कि मार्च के महीने में ही गर्मी बढ़ने लगी है और कई इलाकों में बिजली कटौती शुरू हो चुकी है। ऐसे समय में बिजली दरों में बढ़ोतरी करना जनता के साथ अन्याय है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम कर लोगों को राहत दी जाए, लेकिन इसके उलट बिजली महंगी कर दी गई है, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।


सरकार की ओर से क्या?

हालांकि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अब तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि नई दरें बिजली वितरण और मांग-आपूर्ति संतुलन को ध्यान में रखते हुए लागू की गई हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि “टाइम ऑफ डे टैरिफ” (Time-of-Day Tariff) व्यवस्था का उद्देश्य पीक समय में बिजली खपत को नियंत्रित करना होता है, लेकिन इसका प्रभाव उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव के रूप में भी सामने आ सकता है।


बिहार में बिजली दरों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है। विपक्ष जहां इसे जनता के साथ धोखा बता रहा है, वहीं सरकार इसे एक आवश्यक सुधार के रूप में पेश कर सकती है।

फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह नई दरें वास्तव में बिजली व्यवस्था को सुधारेंगी या फिर आम लोगों की मुश्किलें बढ़ाएंगी।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट