बिहार Congress में जिलाध्यक्षों की घोषणा पर सियासत तेज, जातीय प्रतिनिधित्व और बिजली बिल बढ़ोतरी पर बड़ा आंदोलन घोषित

Congress Bihar

बिहार में Congress संगठन के नए ढांचे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हाल ही में कांग्रेस ने राज्य में जिलाध्यक्षों की नई सूची जारी की, जिसमें कथित तौर पर सवर्ण जाति के नेताओं की संख्या अधिक होने पर सवाल उठने लगे हैं।

बिहार में Congress संगठन के नए ढांचे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हाल ही में कांग्रेस ने राज्य में जिलाध्यक्षों की नई सूची जारी की, जिसमें कथित तौर पर सवर्ण जाति के नेताओं की संख्या अधिक होने पर सवाल उठने लगे हैं। इस पर बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी “जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी” के सिद्धांत पर काम करती रहेगी और आगे इसमें सुधार भी किया जाएगा।

जिलाध्यक्षों की नई सूची और विवाद

Congress द्वारा जारी नई सूची में कुल 53 जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं। पहले यह संख्या 40 थी, लेकिन संगठन को मजबूत और सक्रिय बनाने के लिए इसमें बदलाव किया गया है। जिन जिलों में विधानसभा सीटों की संख्या अधिक है, वहां संगठनात्मक कार्य को सुचारु बनाने के लिए 13 जिलों को विभाजित किया गया है।

हालांकि, इस सूची के सामने आने के बाद विपक्ष ही नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर भी प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना है कि इसमें कुछ जातीय और सामाजिक समूहों को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाई है।

इस पर राजेश राम ने स्वीकार किया कि सूची पूरी तरह संतुलित नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ग और समूह इस बार छूट गए हैं, लेकिन पार्टी जल्द ही दूसरी सूची जारी कर इन कमियों को दूर करेगी।

‘सामाजिक संतुलन’ पर कांग्रेस का फोकस

राजेश राम ने स्पष्ट किया कि Congress सामाजिक न्याय और भागीदारी की राजनीति में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य हर वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व देना है और संगठन में सभी समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में संगठन में और बदलाव हो सकते हैं, जिससे कांग्रेस आगामी चुनावों के लिए खुद को मजबूत कर सके।

बिजली बिल बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन

संगठनात्मक मुद्दों के साथ-साथ Congress ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने घोषणा की है कि 2 अप्रैल को पूरे बिहार में प्रखंड स्तर पर बिजली बिल बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा।

इसके बाद 3 अप्रैल को राजधानी पटना में एक बड़ा आंदोलन आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन को लेकर Congress कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है।

राजेश राम ने कहा कि वह गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जनता को ठग रही है और चुनावी वादों से पीछे हट रही है।

बिजली दरों में बढ़ोतरी पर सवाल

राज्य सरकार द्वारा 1 अप्रैल से बिजली दरों में बढ़ोतरी लागू की जा रही है। Congress का आरोप है कि यह फैसला आम लोगों के हितों के खिलाफ है। पार्टी के अनुसार, घरेलू उपभोक्ताओं पर 10% से अधिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर 20% से अधिक अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।

राजेश राम ने कहा कि चुनाव के दौरान सरकार ने मुफ्त बिजली और राहत पैकेज जैसे बड़े वादे किए थे, लेकिन अब उन्हें लागू करने के बजाय जनता पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।

उन्होंने तंज कसते हुए एलपीजी के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि पहले इसका मतलब “लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस” था, लेकिन अब यह “ले पाओगे” बन गया है, जो आम जनता की स्थिति को दर्शाता है।

सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनाव के दौरान किए गए वादों को सरकार ने भुला दिया है। पार्टी के अनुसार, 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया गया था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।

राजेश राम ने कहा कि सरकार ने जनता को लुभाकर वोट लिया और अब उन्हें महंगाई और आर्थिक दबाव के बीच छोड़ दिया है।

नालंदा घटना पर जताई संवेदना

इस बीच राजेश राम ने नालंदा में हुई भगदड़ की घटना पर भी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल रही है।

उन्होंने सत्तारूढ़ दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो सरकार खुद को सनातन धर्म का रक्षक बताती है, वह भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा नहीं कर सकी।

राजनीतिक माहौल गर्म

बिहार में Congress के संगठनात्मक बदलाव और सरकार के खिलाफ आंदोलन की घोषणा के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। एक ओर कांग्रेस सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर वह महंगाई और बिजली दरों को लेकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस का यह आंदोलन कितना असर डालता है और क्या पार्टी अपने संगठनात्मक बदलावों के जरिए राजनीतिक जमीन मजबूत कर पाती है या नहीं।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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