‘रामायण’ टीजर पर उठे सवाल: कॉस्ट्यूम डिजाइनर्स ने कहा—राम के दिव्य स्वरूप के साथ नहीं हुआ पूरा न्याय

रामायण

बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण का टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री में बहस तेज हो गई है

बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण का टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री में बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर दर्शक फिल्म के विजुअल्स और स्केल को लेकर उत्साहित नजर आए, वहीं दूसरी ओर पौराणिक शृंखलाओं पर काम कर चुके कॉस्ट्यूम डिजाइनर्स ने फिल्म के लुक और कॉस्ट्यूम पर सवाल उठाए हैं।

क्या है पूरा विवाद?

टीजर सामने आने के बाद से ही फिल्म के किरदारों, खासकर भगवान राम के लुक को लेकर चर्चा हो रही है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े बजट और आधुनिक तकनीक के बावजूद फिल्म में वह “दिव्यता” और “सांस्कृतिक गहराई” नजर नहीं आई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

कॉस्ट्यूम डिजाइनर्स की प्रतिक्रिया

टीवी के लोकप्रिय पौराणिक शो श्रीमद् रामायण और राधाकृष्ण पर काम कर चुकी कॉस्ट्यूम डिजाइनर शिबप्रिया सेन ने फिल्म के टीजर को “उम्मीद से कम प्रभावशाली” बताया।

उन्होंने कहा कि पौराणिक किरदारों के परिधानों को डिजाइन करते समय भारतीय परंपरा, मंदिर वास्तुकला और प्राचीन मूर्तियों से प्रेरणा लेना बेहद जरूरी होता है।
उनके अनुसार:

  • भगवान राम के मुकुट में सूर्य रथ का चक्र और पीले रंग का विशेष महत्व होता है
  • माता सीता के परिधानों में मधुबनी कला की झलक दिखाई जाती है
  • भगवान हनुमान के लुक में अजंता, एलोरा और हम्पी की मूर्तियों से प्रेरणा ली जाती है

सेन ने यह भी कहा कि “राम सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। ऐसे में उनके स्वरूप के साथ प्रयोग करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।”

टीवी बनाम फिल्म: तुलना क्यों?

डिजाइनर्स का मानना है कि टीवी इंडस्ट्री में सीमित बजट और समय के बावजूद कॉस्ट्यूम्स अधिक समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से गहरे होते थे।

इसके विपरीत, बड़े बजट वाली फिल्मों में तकनीकी संसाधन अधिक होने के बावजूद कई बार उस “आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव” की कमी महसूस होती है।

दूसरी डिजाइनर की कड़ी टिप्पणी

पौराणिक शो सिया के राम, देवों के देव…महादेव और हातिम से जुड़ी कॉस्ट्यूम डिजाइनर नीरूषा निकहत ने भी फिल्म के लुक पर असंतोष जताया।

उन्होंने कहा कि फिल्म में “नवाचार और सौंदर्य” की कमी नजर आती है। उनके मुताबिक, निर्माता नमित मल्होत्रा इस प्रोजेक्ट में और अधिक प्रयोगात्मक और यादगार डिजाइन पेश कर सकते थे।

नीरूषा ने यह भी सवाल उठाया कि इतने बड़े प्रोजेक्ट में अनुभवी डिजाइनर्स को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई। उनका मानना है कि पौराणिक विषयों पर काम करने के लिए विशेष अनुभव और सांस्कृतिक समझ जरूरी होती है।

“चूक गया रचनात्मक अवसर”

डिजाइनर्स का सामूहिक मत है कि रामायण जैसे भव्य प्रोजेक्ट में परिधानों और आभूषणों के जरिए भारतीय संस्कृति की गहराई को और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता था।

उनका कहना है कि:

  • कॉस्ट्यूम्स में और अधिक पारंपरिक तत्व जोड़े जा सकते थे
  • आभूषणों और रंगों में प्रतीकात्मकता को बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था
  • किरदारों के दिव्य स्वरूप को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता था

दर्शकों की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर भी दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ लोग फिल्म के विजुअल्स और वीएफएक्स की तारीफ कर रहे हैं, तो कई यूजर्स कॉस्ट्यूम और किरदारों के लुक को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

रिलीज से पहले ही बढ़ा दबाव

फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई है, लेकिन टीजर के बाद ही उस पर अपेक्षाओं का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में मेकर्स के सामने चुनौती है कि वे आने वाले ट्रेलर और फिल्म में इन आलोचनाओं का जवाब दे सकें।

रामायण सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था से जुड़ा एक बड़ा प्रोजेक्ट है। ऐसे में हर पहलू—चाहे वह कहानी हो, अभिनय हो या कॉस्ट्यूम—दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरना जरूरी है।

कॉस्ट्यूम डिजाइनर्स की आलोचना यह संकेत देती है कि दर्शक सिर्फ भव्यता नहीं, बल्कि प्रामाणिकता और सांस्कृतिक गहराई भी चाहते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म रिलीज के बाद इन उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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