AAP में बढ़ी अंदरूनी कलह: राघव चड्ढा की सुरक्षा हटी, पार्टी से टकराव तेज
आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर इन दिनों बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और संगठन के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।
आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर इन दिनों बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और संगठन के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में पंजाब की भगवत मान सरकार ने राघव चड्ढा को दी गई पंजाब पुलिस की सुरक्षा वापस ले ली है, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, राघव चड्ढा को पंजाब के सह-प्रभारी और राज्यसभा में पार्टी के उपनेता होने के नाते सुरक्षा दी गई थी। लेकिन हालिया फैसले के बाद उनकी सुरक्षा हटा ली गई है, जिसे पार्टी के अंदर चल रहे विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।
केंद्रीय सुरक्षा को लेकर भी सस्पेंस
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब दिल्ली के वरिष्ठ AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने राघव चड्ढा को Z+ सुरक्षा देने का फैसला किया है। हालांकि, चड्ढा के करीबी सूत्रों ने इस दावे को फिलहाल खारिज किया है और कहा है कि अभी उन्हें केंद्र से कोई सुरक्षा नहीं मिली है।
हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें जल्द ही केंद्रीय सुरक्षा मिल सकती है और तब तक दिल्ली पुलिस की ओर से सुरक्षा दी जा सकती है।
उपनेता पद से हटाए जाने के बाद बढ़ा विवाद
विवाद की शुरुआत 2 अप्रैल को हुई, जब AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया। उनकी जगह पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को सूचित किया कि अब राघव चड्ढा को सदन में पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए। इस फैसले के बाद से ही पार्टी और चड्ढा के बीच दूरी बढ़ती चली गई।
“मुझे खामोश किया गया”: राघव चड्ढा
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उन्हें “खामोश” करने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझिए। मैं वह दरिया हूं, जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।”
उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर सियासी तापमान और बढ़ा दिया।
AAP नेताओं के आरोप
राघव चड्ढा के बयान के बाद पार्टी के कई नेता खुलकर सामने आए। आतिशी, भगवत मान और सौरभ भारद्वाज समेत कई नेताओं ने उन पर पार्टी लाइन से हटने का आरोप लगाया।

नेताओं का कहना है कि जब अरविन्द केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई, उस समय राघव चड्ढा विदेश में थे। साथ ही उन पर यह भी आरोप लगाया गया कि वे संसद में केंद्र सरकार और नरेंद्र मोदी से जुड़े बड़े मुद्दों पर सवाल नहीं उठाते।
“स्क्रिप्टेड कैंपेन चलाया जा रहा”: चड्ढा
इन आरोपों पर पलटवार करते हुए राघव चड्ढा ने 4 अप्रैल को एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ “स्क्रिप्टेड कैंपेन” चलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “मैं संसद में शोर मचाने या हंगामा करने नहीं गया, बल्कि जनता के मुद्दे उठाने गया हूं।” उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा—“घायल हूं, इसलिए घातक हूं।”
लगातार वीडियो जारी कर दे रहे जवाब
5 अप्रैल को भी राघव चड्ढा ने एक और वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने सहयोगियों को जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने संसद में पंजाब के मुद्दे कई बार उठाए हैं।

उन्होंने कहा, “पंजाब मेरे लिए सिर्फ एक विषय नहीं, बल्कि मेरा घर और मेरी पहचान है।”
सोशल मीडिया और पोस्ट डिलीट करने का आरोप
इस विवाद के बीच सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की आलोचना वाले अपने पुराने सोशल मीडिया पोस्ट हटा दिए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि अब उनके अकाउंट पर सिर्फ कुछ ही पोस्ट बचे हैं, जिनमें मोदी की तारीफ की गई है।
किताब के जरिए इशारा?
विवाद के बीच राघव चड्ढा ने अमेरिकी लेखक Robert Greene की किताब The 48 Laws of Power पढ़ते हुए एक फोटो शेयर की।
इस फोटो में जिस पेज को उन्होंने दिखाया, उसमें लिखा था कि “अपने बॉस से ज्यादा चमकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।” इसे कई लोग पार्टी नेतृत्व, खासकर अरविन्द केजरीवाल पर इशारे के तौर पर देख रहे हैं।
AAP के भीतर यह विवाद अब खुलकर सामने आ चुका है। सुरक्षा हटाने, पद से हटाने और लगातार बयानबाजी से यह साफ है कि पार्टी के अंदर गंभीर मतभेद चल रहे हैं।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या राघव चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच सुलह होती है या यह टकराव और गहराता है, क्योंकि इसका असर न सिर्फ पार्टी की छवि पर पड़ेगा, बल्कि आगामी चुनावों पर भी दिख सकता है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
