पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले ED की बड़ी कार्रवाई: I-PAC डायरेक्टर विनेश चंदेल गिरफ्तार, सियासी घमासान तेज

I-PAC Vinesh Chandel

ED ने I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के डायरेक्टर और को-फाउंडर विनेश चंदेल को मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें दिल्ली से हिरासत में लिया गया।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक 10 दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। ED ने I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के डायरेक्टर और को-फाउंडर विनेश चंदेल को मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें दिल्ली से हिरासत में लिया गया।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है। I-PAC, जो एक प्रमुख राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म है, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनावी रणनीति तैयार करती रही है।

TMC ने उठाए सवाल

इस गिरफ्तारी के बाद TMC ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर कहा कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।

उन्होंने कहा कि ED, CBI और NIA जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल डरने वाला नहीं है।

पहले भी हुई थी छापेमारी

इस पूरे मामले की जड़ें पहले की गई छापेमारी से जुड़ी हैं। 2 अप्रैल को ED ने दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई समेत कई शहरों में I-PAC से जुड़े ठिकानों पर रेड डाली थी।

इन छापों में I-PAC के अन्य को-फाउंडर ऋषिराज सिंह और आम आदमी पार्टी के पूर्व कम्युनिकेशन इंचार्ज विजय नैर के ठिकाने भी शामिल थे।

इससे पहले 8 जनवरी को ED ने कोलकाता में I-PAC से जुड़े दफ्तर और प्रतीक जैन के घर पर भी छापेमारी की थी।

ममता बनर्जी का सीधा हस्तक्षेप

जनवरी में हुई कार्रवाई के दौरान ममता बनर्जी खुद I-PAC ऑफिस पहुंच गई थीं। उन्होंने ED पर आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार उनकी पार्टी की गोपनीय चुनावी रणनीति हासिल करने की कोशिश कर रही है।

ममता बनर्जी ने यह भी कहा था कि केंद्रीय एजेंसियां अपनी सीमा से बाहर जाकर काम कर रही हैं। उस दौरान उनके कार्यालय से फाइलें लेकर बाहर निकलने की तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया था।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला कथित ₹2,742 करोड़ के कोयला घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 27 नवंबर 2020 को इस मामले में FIR दर्ज की थी, जिसके बाद ED ने 28 नवंबर 2020 से जांच शुरू की।

आरोप है कि इस घोटाले के तहत करीब ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक पहुंचाए गए। ED इसी एंगल से जांच कर रही है कि क्या इन पैसों का इस्तेमाल चुनावी गतिविधियों में किया गया।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

ED ने इस मामले में Supreme Court of India का रुख भी किया है। एजेंसी ने मुख्यमंत्री पर जांच में हस्तक्षेप और शक्ति के दुरुपयोग का आरोप लगाया है तथा इसकी CBI जांच की मांग की है।

वहीं राज्य सरकार और TMC ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह सब राजनीतिक बदले की कार्रवाई है।

चुनावी माहौल में बढ़ा तनाव

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल पहले से ही गर्म है, ऐसे में ED की इस कार्रवाई ने सियासी तनाव को और बढ़ा दिया है। विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता है। एक तरफ TMC इसे “एजेंसियों का दुरुपयोग” बता रही है, वहीं भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर पेश कर सकती है।

I-PAC की भूमिका पर भी चर्चा

I-PAC देश की प्रमुख राजनीतिक कंसल्टेंसी कंपनियों में से एक है, जिसने कई राज्यों में चुनावी रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाई है। प्रशांत किशोर के साथ जुड़े इस संगठन का प्रभाव भारतीय राजनीति में लगातार बढ़ता रहा है।

चुनाव से ठीक पहले I-PAC से जुड़े बड़े चेहरे की गिरफ्तारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि इस मामले का चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ता है और क्या जांच एजेंसियों की कार्रवाई सियासी मुद्दा बनकर उभरती है।

फिलहाल, विनेश चंदेल की गिरफ्तारी और उसके बाद उठे सवाल आने वाले दिनों में बंगाल चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट