NEET छात्रा केस के 100 दिन: न्याय अधूरा, पुलिस–CBI पर सवाल, आवाजें क्यों हुईं खामोश?

NEET छात्रा केस,

बिहार के बहुचर्चित NEET छात्रा रेप और मर्डर केस में एक बार फिर न्याय व्यवस्था और जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कोर्ट की फटकार के बावजूद चार्जशीट नहीं, आरोपी को मिली जमानत

पटना:
बिहार के बहुचर्चित NEET छात्रा रेप और मर्डर केस में एक बार फिर न्याय व्यवस्था और जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एजेंसी ने आदेश के बावजूद जानबूझकर समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं की। कोर्ट ने 10 अप्रैल तक जांच पूरी करने या स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया था, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया, जो सीधे तौर पर अदालत के आदेश का उल्लंघन है।

इस टिप्पणी के साथ ही आरोपी मनीष रंजन को जमानत दे दी गई, जिससे पीड़ित परिवार और आम जनता में गहरा आक्रोश देखने को मिला। जमानत की खबर मिलते ही छात्रा की मां की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें पटना के PMCH अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।


जमानत के बाद बढ़ा आक्रोश

आरोपी को जमानत मिलने के बाद पीड़ित परिवार पूरी तरह टूट चुका है। परिवार का आरोप है कि शुरुआत से ही मामले को दबाने की कोशिश की गई। छात्रा की मां, जो पहले से ही मानसिक तनाव में थीं, इस खबर के बाद बेहोश हो गईं। डॉक्टरों के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया था और उन्हें ICU में भर्ती करना पड़ा।

परिजनों का कहना है कि वे लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन सिस्टम उनकी आवाज को अनसुना कर रहा है। अब परिवार ने उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कही है।


जांच पर गंभीर सवाल

इस केस में सबसे बड़ा सवाल जांच की दिशा और पारदर्शिता को लेकर उठ रहा है। पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट में कई ऐसे संकेत मिले हैं, जो रेप और हत्या की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक—

  • शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान
  • प्राइवेट पार्ट्स में गहरी चोट
  • कपड़ों का फटा होना
  • खून के निशान
  • अंडरगारमेंट में संदिग्ध स्पर्म की मौजूदगी

इन सबके बावजूद शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताने की कोशिश की। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें सुसाइड मानने के लिए दबाव डाला और धमकाया भी।


सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप

परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जांच एजेंसियों पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि—

  • CCTV फुटेज गायब कर दिए गए
  • कपड़ों को देर से फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया
  • घटनास्थल की ठीक से जांच नहीं की गई

करीब 20 दिनों तक पुलिस और SIT की टीम पर सबूत मिटाने और छिपाने के आरोप लगते रहे। बाद में मामला CBI को सौंप दिया गया, लेकिन वहां भी जांच की गति धीमी रही।


CBI की भूमिका पर उठे सवाल

कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद CBI की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यह पहली बार नहीं है जब बिहार में CBI की जांच पर सवाल उठे हैं।

नवरुणा केस:
मुजफ्फरपुर में 14 वर्षीय बच्ची के अपहरण और हत्या मामले में CBI ने 6 साल की जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी, जिसमें किसी को दोषी नहीं ठहराया गया।

ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड:
2012 में हुई इस हत्या की जांच भी वर्षों तक चली। 2023 में चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन अब भी मामला पूरी तरह सुलझा नहीं है।

शिल्पी-गौतम केस:
इस हाई-प्रोफाइल केस में भी पहले सुसाइड की थ्योरी सामने आई, बाद में कई सवाल उठे, लेकिन अंततः CBI ने इसे डबल सुसाइड बताकर केस बंद कर दिया।

इन मामलों के उदाहरण देकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस केस में भी न्याय मिल पाएगा या नहीं।


सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में राज्य सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली भी कटघरे में है। एक ओर मंत्री स्तर से इसे हत्या का मामला बताया गया, वहीं दूसरी ओर पुलिस आत्महत्या की थ्योरी पर अड़ी रही।

मामले की जांच के लिए IG स्तर के अधिकारी की निगरानी में SIT बनाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या जांच एजेंसियां पहले से तय निष्कर्ष के अनुसार काम कर रही हैं?


प्रदर्शन थमे, सवाल कायम

घटना के बाद पटना समेत कई जगहों पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। छात्र संगठनों, NGO और आम लोगों ने सड़क पर उतरकर न्याय की मांग की थी। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला।

हालांकि समय बीतने के साथ विरोध की आवाजें कमजोर पड़ती दिख रही हैं। कई प्रमुख चेहरे, जो शुरुआत में सक्रिय थे, अब चुप नजर आ रहे हैं।


परिवार की लड़ाई जारी

पीड़ित परिवार अब भी न्याय की उम्मीद में दर-दर भटक रहा है। छात्रा की मां की मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। परिवार का कहना है कि वे तब तक लड़ाई जारी रखेंगे जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिल जाता।


सिस्टम पर बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक छात्रा की मौत का नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। क्या जांच एजेंसियां निष्पक्ष हैं? क्या न्याय समय पर मिलेगा? क्या सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं हुई?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आम नागरिक इस सिस्टम पर भरोसा कर सकता है?


NEET छात्रा रेप और मर्डर केस ने बिहार ही नहीं, पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अदालत की टिप्पणी, CBI की भूमिका, पुलिस की जांच और आरोपी को मिली जमानत—इन सभी पहलुओं ने इस मामले को और जटिल बना दिया है।

अब जरूरत है पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और लोगों का कानून पर भरोसा बना रहे। क्योंकि अगर न्याय में देरी होती है, तो यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, पूरे समाज की हार होती है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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