पप्पू यादव के बयान पर भड़की महिला आयोग अध्यक्ष अप्सरा, फोटो के दुरुपयोग का आरोप; मानहानि की चेतावनी

महिला आयोग

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने सांसद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने उनके फोटो का गलत इस्तेमाल किया है और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है।

पटना: पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव के एक विवादित बयान और सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने सांसद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने उनके फोटो का गलत इस्तेमाल किया है और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है। इस मामले में उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, सांसद पप्पू यादव ने हाल ही में महिलाओं को लेकर एक विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि “90% महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के बेड से शुरू होता है।” इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। मामला तब और बढ़ गया जब उन्होंने फेसबुक लाइव के दौरान एक तस्वीर दिखाते हुए यह दावा किया कि इसी तरह से राजनीतिक ग्रोथ होती है।

इस वीडियो में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा की तस्वीर भी दिखाई गई, जिसे लेकर अब विवाद गहरा गया है। अप्सरा ने आरोप लगाया कि उनकी छवि को गलत तरीके से पेश किया गया और यह न केवल व्यक्तिगत हमला है बल्कि महिलाओं के सम्मान पर भी आघात है।

अप्सरा का कड़ा जवाब

पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अप्सरा ने पप्पू यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “उन्होंने बिना सोचे-समझे मेरे खिलाफ टिप्पणी की है। मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई गई है। मैं उन्हें हर स्तर पर घेरूंगी।”

उन्होंने आगे कहा कि पप्पू यादव पर पहले से ही कई मामले दर्ज हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे किसी के सम्मान के साथ खिलवाड़ करें। अप्सरा ने साफ किया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

30 अप्रैल तक मांगा जवाब

महिला आयोग की ओर से सांसद को नोटिस जारी किया गया है, जिसमें उन्हें 30 अप्रैल को सबूतों के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। अप्सरा ने कहा कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो आयोग आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नोटिस का जवाब देने के बजाय पप्पू यादव ने सोशल मीडिया पर आयोग की कार्रवाई का मजाक उड़ाया और उसे “कचरे में फेंकने” जैसी टिप्पणी की। अप्सरा के अनुसार, यह व्यवहार एक जनप्रतिनिधि के पद की गरिमा के खिलाफ है।

“मैं पूर्णिया की बेटी हूं”

अप्सरा ने अपनी पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने दम पर यह मुकाम हासिल किया है। “मेरे परिवार में कोई राजनीति में नहीं रहा। उस समय जब महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती थीं, मैंने संघर्ष किया और आगे बढ़ी। मेरे ऊपर कभी कोई कलंक नहीं लगा,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी कहा कि वह पूर्णिया जाएंगी और वहां के लोगों को बताएंगी कि उनके सांसद की कथनी और करनी में कितना अंतर है।

बयान को बताया ‘मानसिक दिवालियापन’

अप्सरा ने पप्पू यादव के बयान को “मानसिक दिवालियापन और कुंठित राजनीति” करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा न केवल महिलाओं का अपमान है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती है।

उन्होंने बताया कि वह 1997-98 से छात्र राजनीति में सक्रिय रही हैं और लंबे समय से सामाजिक बदलाव के लिए काम कर रही हैं। वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें महिला आयोग की जिम्मेदारी सौंपी, ताकि वह महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा कर सकें।

बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद

यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। विभिन्न दलों के नेताओं और महिला संगठनों ने पप्पू यादव के बयान की आलोचना की है और उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की है। वहीं, आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ने की संभावना है, खासकर तब जब आयोग की सुनवाई और संभावित कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

महिलाओं को लेकर दिए गए बयान और एक संवैधानिक पद पर बैठी महिला की छवि के कथित दुरुपयोग ने इस पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अब सबकी नजर 30 अप्रैल पर टिकी है, जब पप्पू यादव को अपना पक्ष रखना है। यह देखना अहम होगा कि क्या मामला सुलझता है या कानूनी लड़ाई और तेज होती है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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