बिहार विधानसभा में आज सम्राट चौधरी का फ्लोर टेस्ट, NDA के पास मजबूत आंकड़े, विपक्ष की नजर ‘क्रॉस वोटिंग’ पर

सम्राट चौधरी

बिहार की सियासत आज एक अहम मोड़ पर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शुक्रवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेंगे।

पटना: बिहार की सियासत आज एक अहम मोड़ पर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शुक्रवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेंगे। विशेष सत्र के दौरान वे विश्वास मत का प्रस्ताव पेश करेंगे, जिस पर चर्चा के बाद मतदान होगा। आंकड़ों के लिहाज से सत्तारूढ़ NDA के पास स्पष्ट बढ़त है और सरकार के आसानी से फ्लोर टेस्ट पास करने की संभावना जताई जा रही है।

NDA के पास मजबूत समर्थन

विधानसभा के मौजूदा समीकरण के अनुसार कुल 242 सीटों में से एक सीट खाली है, जिससे प्रभावी संख्या 241 हो जाती है। बहुमत के लिए 121 विधायकों की जरूरत होती है, जबकि NDA के पास करीब 201 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है। इसमें BJP के 88, JDU के 85, LJP (रामविलास) के 19, HAM के 5 और RLM के 4 विधायक शामिल हैं।

इस मजबूत समर्थन के चलते NDA खेमे में आत्मविश्वास साफ दिख रहा है। विधानसभा पहुंचने पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का NDA विधायकों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। वे विक्ट्री साइन दिखाते हुए सदन में दाखिल हुए, जिससे यह संदेश गया कि सरकार बहुमत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।

विपक्ष की रणनीति और चिंता

दूसरी ओर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव इस फ्लोर टेस्ट को सरकार को घेरने के मौके के रूप में देख रहे हैं। हालांकि संख्या बल विपक्ष के पक्ष में नहीं है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी चिंता क्रॉस वोटिंग को लेकर है।

विपक्ष के पास कुल 41 विधायक हैं, जिनमें RJD के 25, कांग्रेस के 6, वाम दलों के 3, AIMIM के 5 और अन्य दलों के विधायक शामिल हैं। हाल के राज्यसभा चुनाव में विपक्षी विधायकों की गैरमौजूदगी ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। उस दौरान RJD और कांग्रेस के कुछ विधायक वोटिंग से दूर रहे थे, जिससे सत्ता पक्ष को अप्रत्यक्ष फायदा मिला था।

इसी अनुभव को देखते हुए तेजस्वी यादव अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटे हैं। फ्लोर टेस्ट से पहले लगातार बैठकों का दौर जारी है, ताकि किसी भी तरह की टूट-फूट को रोका जा सके।

कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर असमंजस

विपक्षी खेमे में कांग्रेस की स्थिति भी थोड़ी असहज बनी हुई है। अभी तक पार्टी विधायक दल के नेता का चयन नहीं हो पाया है, जिससे फ्लोर टेस्ट के दौरान उसकी भूमिका कुछ कमजोर दिख सकती है। यह स्थिति विपक्ष की रणनीति पर भी असर डाल सकती है।

नीतीश कुमार के बाद नया दौर

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत 14 अप्रैल को हुई, जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। इसके अगले ही दिन 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अब वे कैबिनेट विस्तार से पहले विधानसभा में बहुमत साबित करना चाहते हैं।

यह बदलाव बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय तक सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार अब राज्यसभा सदस्य बन चुके हैं और विधानसभा में नजर नहीं आएंगे।

20 साल बाद सदन में बड़ा बदलाव

2005 के बाद यह पहला मौका होगा जब विधानसभा में न तो नीतीश कुमार मौजूद होंगे और न ही बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन। दोनों नेताओं की गैरमौजूदगी सदन के राजनीतिक माहौल में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार सदन में नीतीश कुमार के कार्यकाल को लेकर धन्यवाद प्रस्ताव भी ला सकती है। यदि ऐसा होता है, तो फ्लोर टेस्ट के दौरान उनके योगदान पर चर्चा देखने को मिल सकती है।

सदन की विशेष व्यवस्था

फ्लोर टेस्ट के दौरान सदन में बैठने की व्यवस्था भी चर्चा का विषय बनी हुई है। जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार को मंत्रियों वाली बेंच पर बैठाया गया है, जबकि पूर्व मंत्री दूसरी पंक्ति में नजर आएंगे। पूर्व डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को भी विशेष स्थान दिया गया है।

क्या होगा आगे?

संख्या बल को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है कि सम्राट चौधरी सरकार विश्वास मत हासिल कर लेगी। इसके बाद कैबिनेट विस्तार और नई राजनीतिक रणनीति पर काम तेज हो सकता है।

हालांकि, विपक्ष की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या फ्लोर टेस्ट के दौरान कोई अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है या नहीं। खासकर क्रॉस वोटिंग या अनुपस्थिति जैसे फैक्टर पूरे समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।

बिहार विधानसभा का यह फ्लोर टेस्ट सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य की बदलती राजनीति का संकेत भी है। जहां एक ओर NDA अपनी ताकत दिखाने के लिए तैयार है, वहीं विपक्ष इसे अपनी एकजुटता की परीक्षा के रूप में देख रहा है। आने वाले समय में इसका असर राज्य की राजनीतिक दिशा तय कर सकता है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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