5 राज्यों के चुनाव बाद नई सरकारों का गठन तेज, केरल में अब भी सीएम चेहरे पर सस्पेंस; असम में 12 मई को फिर शपथ लेंगे हिमंता
केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की पूर्ण बहुमत के बावजूद मुख्यमंत्री के चेहरे पर अब तक सस्पेंस बना हुआ है।
5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे 4 मई को आने के बाद देश की राजनीति में नई सरकारों के गठन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में नए मुख्यमंत्रियों ने शपथ ले ली है, जबकि पुडुचेरी और असम में भी मुख्यमंत्री के नाम और शपथ ग्रहण की तारीख तय हो चुकी है। हालांकि, केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की पूर्ण बहुमत के बावजूद मुख्यमंत्री के चेहरे पर अब तक सस्पेंस बना हुआ है।
केरल में कांग्रेस गठबंधन की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कई बड़े नेताओं के नाम सामने आए हैं। इनमें कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, पिछले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे वी.डी. सतीशन और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। लेकिन चुनाव परिणाम आने के 6 दिन बाद भी पार्टी आलाकमान किसी एक नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाया है।
के.सी. वेणुगोपाल सबसे मजबूत दावेदार
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान की ओर से भेजे गए पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट में के.सी. वेणुगोपाल का पलड़ा सबसे भारी बताया गया है। कांग्रेस ने 6 मई को वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक और अजय माकन को पर्यवेक्षक बनाकर केरल भेजा था। दोनों नेताओं ने पार्टी विधायकों से अलग-अलग बातचीत की और उनकी राय जानी।

बैठक के बाद पर्यवेक्षकों ने कहा था कि सभी विधायकों की राय लेकर रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के 63 विधायकों में से करीब 75 से 80 प्रतिशत विधायकों ने के.सी. वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाने का समर्थन किया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि वेणुगोपाल मुख्यमंत्री बनाए जाते हैं, तो उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा का सदस्य बनना होगा। ऐसे में इरिक्कूर सीट से चुनाव जीते सनी जोसेफ इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे वेणुगोपाल उपचुनाव लड़कर विधानसभा पहुंच सकें।
वी.डी. सतीशन को सहयोगी दलों का समर्थन
हालांकि, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में वी.डी. सतीशन भी पूरी तरह बाहर नहीं हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विधायक दल की बैठक में उन्हें केवल 6 विधायकों का समर्थन मिला, लेकिन बाद में कांग्रेस के तीन पूर्व प्रदेश अध्यक्षों ने खुलकर उनके नाम का समर्थन किया।

इसके अलावा UDF के प्रमुख सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और केरल कांग्रेस (जोसेफ) ने भी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाए जाने की वकालत की है। माना जा रहा है कि गठबंधन सहयोगियों का यह समर्थन पार्टी नेतृत्व के फैसले को प्रभावित कर सकता है।
रमेश चेन्निथला भी लंबे समय से कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय और अनुभवी चेहरा हैं। हालांकि, वर्तमान समीकरणों में उनका नाम अपेक्षाकृत पीछे माना जा रहा है।
असम में 12 मई को फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे हिमंता
वहीं पूर्वोत्तर राज्य असम में भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर स्थिति साफ कर दी है। रविवार को हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में हिमंता बिस्वा सरमा को एक बार फिर विधायक दल का नेता चुना गया।

हिमंता बिस्वा सरमा 12 मई को सुबह 11 बजे लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बीजेपी ने इस समारोह को भव्य बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के शीर्ष नेता और एनडीए के कई वरिष्ठ सहयोगियों के शामिल होने की संभावना है।
असम बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि पार्टी जल्द ही राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। उन्होंने कहा कि यह राज्य के लिए ऐतिहासिक क्षण होगा, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में हिमंता बिस्वा सरमा 102 विधायकों के समर्थन के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में हिमंता की दोबारा ताजपोशी पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी की मजबूत पकड़ का संकेत है। पिछले कार्यकाल में हिमंता ने संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर अपनी मजबूत छवि बनाई है।
पुडुचेरी में 13 मई को शपथ लेंगे एन. रामास्वामी

उधर, पुडुचेरी में भी नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। एन. रामास्वामी 13 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनने जा रही है। शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।
केरल पर टिकी देश की नजर
फिलहाल देश की राजनीति में सबसे ज्यादा नजरें केरल पर टिकी हुई हैं, जहां कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री के चेहरे पर सहमति बनाने की है। पार्टी आलाकमान जल्द फैसला लेने के दबाव में है, क्योंकि सरकार गठन में ज्यादा देरी राजनीतिक संदेश पर असर डाल सकती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि केरल में लिया गया फैसला न सिर्फ राज्य की राजनीति बल्कि कांग्रेस संगठन के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
